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LPG Prices Hike: 642 रुपये का पड़ेगा एलपीजी सिलेंडर! जानिए किसे 45, किसे 66 और किसे 164 रुपये की पड़ रही 1 किलो गैस

LPG Price Per KG: देश में जब भी LPG सिलेंडर की कीमतें बढ़ती है, आम लोग गुणा-गणित बिठाने लगते हैं कि उनका महीने का खर्च अब कितना बढ़ जाएगा. ब्‍लैक मार्केट को छोड़ दें तो LPG सिलेंडर फिलहाल 3 अलग-अलग रेट्स में उपलब्‍ध है. प्रति किलो का हिसाब यहां समझा जा सकता है.

LPG Prices Hike: 642 रुपये का पड़ेगा एलपीजी सिलेंडर! जानिए किसे 45, किसे 66 और किसे 164 रुपये की पड़ रही 1 किलो गैस
LPG Prices Per KG: क्‍या आपने कैलकुलेशन किया है कि एक किलो गैस आपको कितने रुपये की पड़ रही है?
NDTV इंडिया ग्राफिक्‍स

देश में 14.2 किलो वाले घरेलू LPG गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने के बाद दिल्‍ली में कीमत 942 रुपये हो गई है. वहीं 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत दिल्‍ली में 3,113.50 रुपये हो गई है. हालांकि जिन लोगों के घरों में उज्‍जवला गैस कनेक्‍शन है, उन्‍हें 14.2 किलो वाली गैस पर 300 रुपये की सब्सिडी मिल रही है. यानी उन्‍हें एक सिलेंडर 642 रुपये का पड़ रहा है. सरकार का कहना है कि अभी भी तेल मार्केटिंग कंपनियों को 942 रुपये में एक सिलेंडर बेचे जाने पर 700 रुपये का नुकसान सहना पड़ रहा है, जिसे अंडर-रिकवरी कहा जाता है. आम उपभोक्ता दिल्ली में इसे 942 रुपये में खरीदता है, जबकि इसकी वास्तविक आपूर्ति लागत अब 1600 रुपये से ज्‍यादा हो चुकी है. हमने तीनों तरह के गैस सिलेंडर का भाव प्रति किलो जानने के लिए थोड़ा कैलकुलेशन किया तो बेहद अलग-अलग आंकड़े सामने आए. 

सामान्‍य लोगों को 66 रुपये/किलो पड़ रही गैस 

सरकार की ओर से पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि हमारे-आपके घरों में इस्तेमाल होने वाली रसोई गैस की कीमतें कम हैं. मंत्रालय के मुताबिक, अभी भी देश में घरेलू गैस न केवल पड़ोसी देशों, बल्कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे विकसित देशों की तुलना में काफी कम कीमत में मिल रही है. सरकार ने कहा कि 14.2 किलो वाले घरेलू LPG की कीमत उपभोक्ताओं के लिए नियंत्रित (मॉडरेट) रखी जाती है. 

कोई भी परिवार अपनी जरूरत के अनुसार 942 रुपये प्रति सिलेंडर की दर से जितने चाहें उतने सिलेंडर खरीद सकता है. इस कीमत में हमने 14.2 से भाग दिया  यानी डिवाइड किया तो पता चला कि आम परिवारों को LPG गैस 66.33 रुपये/किलो पड़ रही है. 

इन परिवारों को 45 रुपये/किलो पड़ रही LPG

अब जरा उज्‍जवला योजना वाले परिवारों की बात कर लेते हैं. पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया है कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थी परिवारों को 14.2 किलो वाला सिलेंडर 642 रुपये का पड़ता है. आप सोचेंगे कैसे, तो जवाब ये है कि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को हर साल पहले चार रिफिल पर 300 रुपये प्रति सिलेंडर की प्रत्यक्ष सब्सिडी मिलती है, इसलिए उनकी प्रभावी कीमत करीब 642 रुपये प्रति सिलेंडर होती है. 

अब इस कीमत के अनुसार, एक किलो का दाम निकालने के लिए 642 रुपये में हमने 14.2 से डिवाइड किया तो पता चला कि लाभार्थी परिवारों को  LPG गैस 45.21 रुपये/किलो पड़ रही है. ये सबसे कम कीमत है. 

अब कमर्शियल सिलेंडर का गुणा-गणित समझ लीजिए 

घरेलू सिलेंडर की कीमत हर महीने सीधे नहीं बदली जाती, लेकिन कमर्शियल सिलेंडर, जो होटल और व्यवसायों में इस्तेमाल होता है, उसकी कीमत हर महीने अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार बदली जाती है. मिडिल ईस्‍ट (पश्चिम एशिया) संकट के दौरान कमर्शियल सिलेंडर के दाम पांच बार बढ़े हैं और इस तरह होटल और रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने वाला 19 किलो का सिलेंडर की कीमत दिल्ली में 3,113.50 रुपये हो गई है. इस कीमत को 19 से डिवाइड करने पर पता चलता है कि उन्‍हें गैस 163.86 यानी करीब 164 रुपये प्रति किलो पड़ रही है. 

अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर बढ़े गैस के दाम 

भारत पहले अपनी LPG जरूरतों का लगभग 60 फीसदी आयात करता था. इसका आयात मूल्य सऊदी अरब के कॉन्ट्रैक्ट प्राइस पर आधारित होता है, जो हर महीने की शुरुआत में तय होता है. फरवरी में यानी संकट से पहले LPG की कीमत लगभग 543 डॉलर प्रति टन थी, वो फरवरी के अंत में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने के बाद अप्रैल में बढ़कर 775 डॉलर प्रति टन हो गई. वहीं जून में ये कीमत और बढ़कर लगभग 790 डॉलर प्रति टन हो गई है. इस तरह देखा जाए तो LPG का अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क फरवरी की तुलना में करीब 46 फीसी बढ़ चुकी है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि इसी कारण से आयातित LPG की लागत बढ़ी है. 

सरकार ने क्‍या-क्‍या कदम उठाए? 

युद्ध संकट के बीच, भारत उन कुछ देशों में से एक था, जो अपने एनर्जी कार्गो की आवाजाही जारी रखने में कामयाब रहा है.लगातार तालमेल बिठाकर, भारतीय झंडे वाले टैंकरों ने होर्मुज स्ट्रेट (जलडमरूमध्य) से गुजरना और भारतीय बंदरगाहों पर कच्चा तेल और LPG की लगातार खेप उतारना जारी रखा. लगातार तालमेल की वजह से LPG ले जाने वाले जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से निकलते रहे. भारत ने किसी भी दूसरे देश के मुकाबले ऐसे सबसे ज्यादा जहाज बाहर निकाले और ऐसा बिना कोई टोल दिए किया.

मंत्रालय ने कहा कि किसी भी पेट्रोलियम उत्पाद की कोई कमी नहीं हुई और पूरे नेटवर्क में बॉटलिंग और डिस्ट्रीब्यूशन का काम सामान्य रूप से चलता रहा. रुकावट के बावजूद सप्लाई बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए गए. सप्लाई के मोर्चे पर, आयात में आई कमी की भरपाई के लिए घरेलू LPG उत्पादन को लगभग 32 TMT से बढ़ाकर लगभग 52 TMT कर दिया गया, यानी इसमें 60 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी की गई.

सरकारी बयान के मुताबिक, दुनिया भर के सप्लायर्स से LPG मंगाने का दायरा बढ़ाया गया, जिनमें वे देश (जैसे अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया) भी शामिल थे, जिनके जहाज इस जलडमरूमध्य से नहीं गुजरते. ऐसा कर उपलब्ध LPG को घरों, अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों जैसे प्राथमिकता वाले उपभोक्ताओं तक पहुंचाया गया. 

वहीं, मांग के नजरिए से ग्राहकों को जहां भी सुविधा हो, वहां पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिससे सिलेंडरों पर दबाव कम हुआ. 

घरेलू स्तर पर सीमित सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए, राज्य सरकारों और इंडस्ट्री एसोसिएशन के साथ मिलकर सप्लाई के गलत इस्तेमाल को रोकने के उपाय कड़े किए गए. OTP-आधारित डिलीवरी वेरिफिकेशन को लगभग 90 फीसदी तक बढ़ाया गया, जिससे सब्सिडी वाली घरेलू LPG का कमर्शियल मार्केट में गलत इस्तेमाल रोका जा सका. 

पिछले फाइनेंशियल ईयर के आखिर तक, घरेलू LPG पर कुल अंडर-रिकवरी 60 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो उससे पिछले साल 41,338 करोड़ रुपये थी. यूनियन कैबिनेट ने इस मद में मार्केटिंग कंपनियों को 30 हजार करोड़ रुपये का मुआवजा देने को मंजूरी दी है. 

Source: NDTV Research, Petroleum Ministry, IANS, PTI

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