Kunal Shah WhatsApp New Chief: मेटा प्लेटफॉर्म्स (Meta Platforms) ने भारतीय फिनटेक स्टार्टअप क्रेड (Cred) के फाउंडर कुणाल शाह को वॉट्सऐप (WhatsApp) का नया ग्लोबल हेड नियुक्त किया है.यह फैसला ऐसे समय आया है जब मेटा ने क्रेड में करीब 900 मिलियन डॉलर यानी लगभग 8,550 करोड़ रुपये का एक बड़ा निवेश किया है .अब दुनिया के सबसे पॉपुलर मैसेजिंग ऐप्स में से एक WhatsApp की कमान कुणाल शाह के हाथ में होगी. कुणाल शाह के पास फिनटेक सेक्टर और डिजिटल पेमेंट्स का एक बेहद शानदार अनुभव है, जिसका फायदा मेटा उठाना चाहता है. हालांकि उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां भी हैं, जिनका असर आने वाले समय में करोड़ों यूजर्स पर पड़ सकता है.
कुणाल शाह को अब वॉट्सऐप के लिए कमाई के नए रास्ते तलाशने होंगे, एडवरटाइजमेंट और सब्सक्रिप्शन फीचर्स को मजबूत करना होगा . इसके साथ ही ऐप के अंदर एआई (AI) एजेंट्स को सही तरीके से जोड़ना होगा. आइए जानते हैं कि वॉट्सऐप के नए बॉस के सामने कौन सी बड़ी चुनौतियां हैं...
1. वॉट्सऐप बिजनेस के नए नियमों पर मचा बवाल,कमाई बढ़ाना सबसे बड़ी चुनौती
वॉट्सऐप के पास दुनिया भर में अरबों यूजर्स हैं, लेकिन कंपनी की कमाई का बड़ा हिस्सा वॉट्सऐप बिजनेस से आता है. कई बड़ी कंपनियां ग्राहकों को ओटीपी (OTP), फ्लाइट कन्फर्मेशन, ऑर्डर ट्रैकिंग जैसी जरूरी अपडेट्स भेजने के लिए वॉट्सऐप बिजनेस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करती हैं.हाल ही में WhatsApp ने अपने बिजनेस मॉडल में बदलाव किया है. जिसके बाद पूरा बिलिंग सिस्टम बदल गया है.
पहले कंपनियां 24 घंटे की बातचीत के लिए एक छोटा चार्ज देती थीं, लेकिन अब कंपनी ने अपने पुराने 24-घंटे के बातचीत वाले प्राइसिंग मॉडल को पूरी तरह बंद कर दिया है. अब हर मैसेज के हिसाब से चार्ज लिया जा रहा है. भारत जैसे बड़े बाजार में मार्केटिंग टेम्पलेट की कीमत भी करीब 10 फीसदी बढ़ाई गई है. इस फैसले को लेकर वॉट्सऐप का इस्तेमाल करने वाले कई कारोबारियों ने नाराजगी जताई है. क्योंकि अब उन्हें 24 घंटे के फिक्स चार्ज की जगह हर एक मैसेज के लिए पैसे देने पड़ रहे हैं. इसके साथ ही उन्हें मेटा द्वारा मंजूर किए गए मैसेज टेम्पलेट्स का ही इस्तेमाल करना पड़ रहा है. ऐसे में कुणाल शाह के सामने चुनौती होगी कि कंपनी की कमाई भी बढ़े और बिजनेस यूजर्स भी खुश रहें.
2. WhatsApp Business में AI की वजह से यूजर्स की प्राइवेसी पर उठ रहे सवाल
Meta तेजी से अपने AI फीचर्स को वॉट्सऐप में जोड़ रही है. कंपनी AI पावर्ड चैट असिस्टेंट, AI इमेज, बिजनेस AI एजेंट और सर्च-रिकॉमेंडेशन जैसे फीचर्स ला रही है.वॉट्सऐप जिस तरह से एआई (AI) एजेंट्स को ऐप के अंदर ला रहा है और कंपनियों को सीधे बिना मांगे मैसेज भेजने की सुविधा दे रहा है, उससे आम यूजर्स ऐप से दूर हो सकते हैं. इससे लोगों के मन में डेटा प्राइवेसी को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.
कुणाल शाह को यह सुनिश्चित करना होगा कि ये नए फीचर्स यूजर्स के लिए उपयोगी बनें और बिजनेस के लिए भी कमाई का नया जरिया तैयार करें. Meta की योजना है कि वॉट्सऐप बिजनेस चैट में Meta AI को और गहराई से जोड़ा जाए, जिससे कंपनियां ग्राहकों को बेहतर सर्विस दे सकें.
3. प्राइवेसी पर भरोसा बनाए रखना आसान नहीं ,चैट लीक होने का डर
भले ही वॉट्सऐप अपनी चैट्स को एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड यानी पूरी तरह सुरक्षित बताता है, लेकिन प्राइवेसी के मुद्दों को लेकर हाल के महीनों में Meta और WhatsApp को कई कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है.साल 2026 की शुरुआत में ही कैलिफोर्निया की फेडरल कोर्ट में मेटा और वॉट्सऐप के खिलाफ मुकदमे दायर किए गए हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि Meta ने यूजर्स को प्राइवेसी को लेकर गुमराह किया.
केस करने वालों का दावा है कि कंपनी के अंदर कुछ ऐसे इनटरनल सिस्टम और यूजर आईडी मौजूद हैं, जिनकी मदद से मेटा के कर्मचारी डेटा एक्सेस कर सकते हैं.यानी न्क्रिप्शन को बाईपास करके यूजर्स के मेटाडेटा और मैसेज को देख सकते हैं. हालांकि कंपनी इन आरोपों से सहमत नहीं है, लेकिन इससे WhatsApp की प्राइवेसी पर सवाल उठे हैं.ऐसे में कुणाल शाह के सामने सबसे अहम जिम्मेदारी होगी कि यूजर्स का भरोसा बना रहे और प्लेटफॉर्म की सुरक्षा पर कोई सवाल न उठे.
4. Meta AI को लेकर EU का सख्त एक्शन,थर्ड-पार्टी AI पर पाबंदी का आरोप
प्राइवेसी के अलावा कंपनी यूरोपियन कमीशन के एक बड़े एंटी-ट्रस्ट मुकदमे का भी सामना कर रही है. यह मामला वॉट्सऐप के अपडेटेड बिजनेस सॉल्यूशन टर्म्स से जुड़ा हुआ है.रेगुलेटर्स का आरोप है कि मेटा अपने दबदबे का गलत फायदा उठा रहा है. वह वॉट्सऐप में अपने खुद के 'मेटा एआई' (Meta AI) को तो सीधे जोड़ रहा है, लेकिन दूसरी कंपनियों के एआई प्रोवाइडर्स को वॉट्सऐप के एंटरप्राइज एपीआई (API) का इस्तेमाल करने से रोक रहा है. फरवरी 2026 तक यूरोपियन यूनियन (EU) ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए मेटा को इस तरह की मनमानी तुरंत रोकने के लिए इमरजेंसी कदम उठाने का प्लान तैयार कर लिया है. ऐसे में कुणाल शाह को AI एक्सपेंशन और नियमों के बीच बैलेंस बनाकर चलना होगा.
5. WhatsApp Pay को PhonePe और Google Pay से दिलानी होगी टक्कर
कुणाल शाह फिनटेक के मास्टर खिलाड़ी हैं. उनके पास डिजिटल पेमेंट्स और फिनटेक का बहुत बड़ा अनुभव है, जो वॉट्सऐप के लिए संजीवनी का काम कर सकता है. दरअसल, वॉट्सऐप अपने सबसे बड़े बाजार यानी भारत में 'पीयर-टू-पीयर' (P2P) पेमेंट्स की रेस में फोनपे (PhonePe) और गूगल पे (Google Pay) से बहुत बुरी तरह पिछड़ चुका है.
भारत WhatsApp का सबसे बड़ा बाजार है. देश में वॉट्सऐप के 50 करोड़ से ज्यादा एक्टिव यूजर्स हैं . लेकिन इसके बावजूद देश के कुल यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन में वॉट्सऐप पे (WhatsApp Pay) की हिस्सेदारी 1% से भी कम है. वहीं, अकेले फोनपे के पास करीब 45% और गूगल पे के पास लगभग 35% मार्केट शेयर हैं. ऐसे में कुणाल शाह के सामने बड़ी चुनौती होगी कि WhatsApp Pay को मजबूत बनाया जाए और ज्यादा से ज्यादा लोग इसका इस्तेमाल करें .
6.चैट से सीधे पेमेंट तक का सफर आसान बनाना होगा
Meta चाहती है कि WhatsApp केवल चैटिंग ऐप न रहे, बल्कि बिजनेस और पेमेंट का भी बड़ा प्लेटफॉर्म बने. कुणाल शाह के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे वॉट्सऐप के बिजनेस सेक्टर में लोन (Lending), इंश्योरेंस,शॉपिंग और प्रीमियम कॉमर्स जैसी बड़ी फाइनेंशियल सर्विस को सीधे कैसे जोड़ते हैं.उनका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना होगा कि वॉट्सऐप पर बिजनेस के साथ होने वाली हर बातचीत बिना किसी रुकावट के ऐप के अंदर ही सीधे पेमेंट और चेकआउट के साथ पूरी हो सके.
WhatsApp के नए ग्लोबल हेड के रूप में कुणाल शाह के सामने कमाई बढ़ाने, AI को सफल बनाने, प्राइवेसी बनाए रखने, WhatsApp Pay को मजबूत करने और बिजनेस सर्विस का विस्तार करने जैसी कई बड़ी चुनौतियां हैं. आने वाले महीनों में उनके फैसले तय करेंगे कि WhatsApp सिर्फ एक मैसेजिंग ऐप बना रहेगा या फिर एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनेगा जहां चैट, पेमेंट, शॉपिंग और AI सभी एक साथ मिलेंगे.
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