Jobs - Hiring alert: त्यौहारों का मौसम शुरू होने वाला है और ऑनलाइन से ऑफलाइन तक बाजार में होगी बंपर खरीदारी. ग्राहक उमड़ेंगे, ऑर्डर बढ़ेंगे तो जाहिर है, स्टोर्स पर सेल्समैन से लेकर डिलीवरी ब्वॉय तक... बड़ी संख्या में लोगों की जरूरत भी होगी. तो भाईसाब यही मौका है, जब ई-कॉमर्स, क्विक-कॉमर्स, रिटेल और कंज्यूमर सर्विस सेक्टर की कंपनियां भर्तियां करती हैं.
ताजा रिपोर्ट ये है कि इस साल यानी 2026 की दूसरी छमाही में फेस्टिव सीजन के दौरान 2 से 2.5 लाख नौकरियां आने वाली हैं. फेस्टिव हायरिंग में इस साल 15-20 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. NLB सर्विसेज की रिपोर्ट में ये जानकारी सामने आई है.
नौकरियों को लेकर NDTV से क्या बोले पॉलिसी एक्सपर्ट?
पॉलिसी एक्सपर्ट डॉ प्रभात सिन्हा ने NDTV से बातचीत में कहा कि इन सनौकरियां भले ही स्थाई न हों, लेकिन बड़ी संख्या में रोजगार पैदा होगा, जो कि घरेलू इकोनॉमी के लिए अच्छा है. रिपोर्ट के मुताबिक, ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स, रिटेल, लॉजिस्टिक्स, हॉस्पिटैलिटी, ट्रैवल और कंज्यूमर सर्विस जैसे सेक्टर में लगभग दो से ढाई लाख सीजनल और गिग (अस्थायी) नौकरियां पैदा होंगी.
डॉ सिन्हा ने कहा कि अमेजन, फ्लिपकार्ट, ब्लिंकइट, जेप्टो, स्विगी, इंस्टामार्ट, डेल्हीवेरी, ब्लू डार्ट, ईकॉम एक्सप्रेस, रिलायंस रिटेल, ट्रेंट, टीमलीज सर्विसेज, एनएलबी सर्विसेज, एडेको इंडिया (Amazon, Flipkart, Blinkit, Zepto, Swiggy Instamart, Delhivery, Blue Dart, Ecom Express, Reliance Retail, Trent, TeamLease Services, NLB Services, Adecco India) जैसी कंपनियों में नौकरियां आने की संभावना है.
भर्ती की स्ट्रैटजी में बदलाव
NLB सर्विसेज के डेटा से पता चलता है कि इस साल मुख्य बदलाव सिर्फ हायरिंग में बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि यह है कि कंपनियां त्योहारों के दौरान काम के भारी दबाव (सीजनल सर्ज) के लिए कैसे तैयारी कर रही हैं. कंपनियां अक्सर आखिरी समय में भर्तियां करती रही हैं, लेकिन इस साल स्ट्रैटजी में बदलाव दिख सकता है. कंपनियां व्यवस्थित वर्कफोर्स प्लानिंग की ओर बढ़ रही हैं और त्योहारों के पीक सीज़न से लगभग 12-14 हफ्ते पहले ही तैयारी शुरू कर चुके हैं.
ताजा टैलेंट पर भरोसा कर रहीं कंपनियां
NLB सर्विसेज़ के SVP और APAC हेड, वरुण सचदेवा ने कहा कि त्योहारों का सीजन भारत के वर्कफोर्स के लिए एक 'रियल-टाइम स्ट्रेस टेस्ट' (वास्तविक समय में दबाव की परीक्षा) बनता जा रहा है और उन्होंने नियोक्ताओं के व्यवहार में आए बुनियादी बदलाव की ओर इशारा किया.
उन्होंने कहा, 'त्योहारों का सीजन भारत के वर्कफोर्स के लिए एक रियल-टाइम स्ट्रेस टेस्ट बनता जा रहा है और इसके नतीजे एक बुनियादी बदलाव की ओर इशारा कर रहे हैं. नियोक्ता अब जल्दी हायरिंग कर रहे हैं, पारंपरिक टैलेंट हब से आगे देख रहे हैं और टेक्नोलॉजी-इनेबल्ड, फ्लेक्सिबल और काम के लिए तुरंत तैयार टैलेंट पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं.' सचदेवा ने कहा, 'त्योहारों के दौरान हायरिंग का असल असर त्योहारों के सीजन के बाद भी बना रह सकता है.'
किस तरह की नौकरी के अवसर पैदा होंगे?
- मैनेजमेंट, फील्ड ऑपरेशन्स और हॉस्पिटैलिटी में हायरिंग का बड़ा हिस्सा बना रहेगा.
- साथ ही डार्क-स्टोर इन्वेंट्री कंट्रोलर्स, रिटर्न और रिफंड स्पेशलिस्ट, कस्टमर-रिजॉल्यूशन एग्जीक्यूटिव्स में भी मौके बनेंगे.
- वहीं, मार्केटप्लेस ऑपरेशन्स प्रोफेशनल्स, फ्रॉड और ट्रांजैक्शन-सपोर्ट स्टाफ की भी मांग है.
- जबकि कैटलॉग मैनेजमेंट एग्जीक्यूटिव्स और ऑर्डर-मैनेजमेंट स्पेशलिस्ट की मांग भी बढ़ रही है.
कंज्प्शन इकोनॉमी में टेक्नोलॉजी की भूमिका
हायरिंग के बदलते पैटर्न से भारत की कंजम्पशन इकॉनमी (उपभोग आधारित अर्थव्यवस्था) में टेक्नोलॉजी की बढ़ती भूमिका का पता चलता है. जिन भूमिकाओं को पारंपरिक रूप से पूरी तरह से ऑपरेशनल माना जाता था, वे अब डिजिटल प्लेटफॉर्म, डेटा, ऑटोमेशन और रियल-टाइम निर्णय लेने की प्रक्रिया पर ज्यादा निर्भर होती जा रही हैं.
45% नौकरी इन शहरों में, लिस्ट देख लीजिए
त्योहारों के दौरान हायरिंग अब बड़े मेट्रो शहरों से आगे बढ़कर अन्य जगहों पर भी फैल रही है. त्योहारों के दौरान होने वाली कुल हायरिंग की मांग में टियर-II और टियर-III शहरों की हिस्सेदारी लगभग 45% रहने की उम्मीद है, और इन मार्केट में भर्ती में 25-30 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है.
ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स, ऑर्गनाइज्ड रिटेल और रीजनल फुलफिलमेंट नेटवर्क के विस्तार के साथ जयपुर, लखनऊ, इंदौर, सूरत, नागपुर, भुवनेश्वर, कोयंबटूर, चंडीगढ़ और कोच्चि जैसे शहरों में मांग बढ़ने की उम्मीद है.
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