इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का सीजन चल रहा है. देश के टैक्सपेयर्स अपनी कमाई और टैक्स का हिसाब-किताब लगाने में लगे हुए हैं. पर बिना तैयारी के जल्दबाजी में अपना रिटर्न फॉर्म जमा करने जा रहे हैं, तो थोड़ा रुक जाइए. एक छोटी गलती होने पर टैक्स डिपार्टमेंट आपके घर कारण बताओ नोटिस भेज सकता है. टैक्स मामलों के एक्सपर्ट राजेश कुमार अग्रवाल से हमने पूछा कि वो कौन सी एक गलती है जो टैक्सपेयर्स की तरफ से हर साल देखने को मिलती ही है. उन्होंने बताया कि करदाता तीन जरूरी फॉर्म का मिलान करना अमूमन भूल जाते हैं. इन फॉर्म में AIS, फॉर्म 26AS और TIS शामिल है. अगर इन तीनों डॉक्यूमेंट्स के आंकड़ों में थोड़ा भी अंतर पाया जाता है, तो डिपार्टमेंट का ऑटोमेटेड सिस्टम रिटर्न को फ्लैग कर देगा. तो चलिए समझने की कोशिश करते हैं कि इन 3 स्टेटमेंट्स का क्या मतलब है और क्यों इनका मिलान करना जरूरी है.
3 स्टेटमेंट्स, जिन पर टैक्स विभाग की नजर
टैक्स एक्सपर्ट राजेश कुमार अग्रवाल के अनुसार, अब टैक्स डिपार्टमेंट पूरी तरह से डेटा-ड्रिवन हो गया है. मतलब पैन और आधार से होने वाले हर बड़े लेनदेन की जानकारी विभाग के पास पहले से होती है. ऐसे में आईटीआर फॉर्म में दी जानकारी का इन तीन स्टेटमेंट्स से मैच होना बेहद जरूरी है:.
- एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट
एक्सपर्ट राजेश अग्रवाल के अनुसार, AIS में फॉर्म 16B की इनकम की जानकारी होती है. इसके अलावा, इसमें मिले बैंक ब्याज, डिविडेंड, शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड से हुई कमाई और प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री की पूरी डिटेल होती है. इसिलए अगर कोई अहम कमाई AIS में तो है लेकिन आईटीआर में नहीं दिखी, तो नोटिस आना पक्का है.
- फॉर्म 26AS
फॉर्म 26AS को टैक्स पासबुक बोल सकते हैं. एक्सपर्ट राजेश ने बताया कि इसमें आमतौर पर फॉर्म 16A की इनकम की जानकारी और उस पर कटे हुए टीडीएस की डिटेल होती है. यानी सैलरी, फ्रीलांसिंग इनकम या बैंक एफडी पर जो भी टैक्स कटा है, वो यहां दिखाई देगा. आईटीआर में क्लेम किया टीडीएस अगर 26AS से मैच नहीं हुआ, तो टैक्सपेयर्स का रिफंड अटक सकता है.
- टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी
टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी असल में AIS का ही दूसरा रूप बोल सकते हैं. राजेश अग्रवाल के कहा, ये सिस्टम के जरिए टैक्स की जानकारी को एक जगह लाता है. जब AIS में कई तरह के डेटा आते हैं, तो सिस्टम उन सभी को प्रोसेस करके एक फाइनल टैक्सेबल वैल्यू तैयार करता है, जिसे टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी कहते हैं. सबसे बड़ी बात ये कि आईटीआर भरते समय इस समरी की वैल्यू को ही बेस बनाया जाता है.
'आंकड़ों का मिसमैच मतलब नोटिस को दावत देना'
टैक्स एक्सपर्ट राजेश कुमार अग्रवाल ने आखिर में बताया कि, "कई बार टैक्सपेयर्स केवल अपनी कंपनी के दिए फॉर्म 16 के भरोसे ही आईटीआर भर देते हैं. लेकिन अगर आपके बैंक ने ब्याज पर टीडीएस काटा है या आपने कोई बड़ा ट्रांजैक्शन किया है, जो फॉर्म 16 में नहीं है पर AIS या 26AS में है, तो ई-फाइलिंग पोर्टल का एआई तुरंत पकड़ लेगा. डेटा मिसमैच होते ही सेक्शन 143(1) में डिफेक्टिव रिटर्न या टैक्स डिमांड का नोटिस घर पहुंच जाएगा."
नोटिस से बचने के लिए क्या करें?
राजेश अग्रवाल ने बताया कि इस बड़ी गलती से बचना कोई मुश्किल नहीं है. बस अपनी कमाई की जानकारी टैक्सपेयर्स को होनी चाहिए. इसके लिए 3 स्टेप्स फॉलो किए जा सकते हैं. पहला ITR फॉर्म सलेक्ट से पहले इनकम टैक्स पोर्टल से अपनी असेसमेंट ईयर की AIS, TIS और 26AS फाइलें डाउनलोड करें. इसके बाद देखें कि तीनों फॉर्म पर आपकी ग्रॉस इनकम और टीडीएस का अमाउंट एक जैसा दिख रहा है या नहीं. अगर AIS में कोई जानकारी गलत है, यानी ऐसा कोई ट्रांजेक्शन है, जो आपने नहीं किया पर इसमें दिख रहा है, तो पोर्टल पर तुरंत ऑनलाइन फीडबैक दें, जिससे उसे ठीक किया जा सके.
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