इंटरग्लोब एविएशन (IndiGo) के वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजों में कंपनी की ऑपरेशनल मजबूती के बावजूद बड़ी वित्तीय चुनौती सामने आई है. आय और यात्री संख्या बढ़ने के बावजूद रुपये की कमजोरी और बढ़ते खर्चों के कारण कंपनी को कुल मिलाकर घाटा उठाना पड़ा.
सालाना प्रदर्शन: मजबूत ऑपरेशन, लेकिन घाटा
वित्त वर्ष 2025-26 में इंडिगो की उड़ान क्षमता में 9.5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि कुल आय 6.4% बढ़कर करीब 8.95 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई. कंपनी ने पूरे साल में 12.34 करोड़ यात्रियों को सेवाएं दीं, जो पिछले साल के मुकाबले 4% ज्यादा हैं. हालांकि, विदेशी मुद्रा विनिमय और अन्य विशेष खर्चों का असर इतना अधिक रहा कि 75,025 मिलियन रुपये के ऑपरेशनल मुनाफे के बावजूद कंपनी को अंततः 23,936 मिलियन रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज करना पड़ा.
मार्च तिमाही में बिगड़ा संतुलन
वित्त वर्ष की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च 2026) में कंपनी को 25,369 मिलियन रुपये का शुद्ध घाटा हुआ, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी मुनाफे में थी. हालांकि विशेष मद और फॉरेक्स प्रभाव हटाने पर 19,206 मिलियन रुपये का लाभ रहा है. इस दौरान उड़ान क्षमता 3.4% बढ़ी, लेकिन यात्रियों की संख्या में 1.1% की हल्की गिरावट दर्ज हुई है. सीट भराव दर 85.8% रही और ऑपरेशनल आय 1.3% बढ़कर 2.24 लाख करोड़ रुपये पहुंची.
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खर्चों में तेज उछाल से दबाव
कंपनी के कुल खर्च में इस तिमाही में 30% की तेज बढ़ोतरी हुई और यह 2.59 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया. खासतौर पर ईंधन के अलावा अन्य खर्चों में 46% से ज्यादा की वृद्धि ने मुनाफे पर बड़ा दबाव बनाया है. हालांकि ईंधन लागत में कुछ राहत मिली, लेकिन कुल लागत संरचना अभी भी भारी बनी हुई है.
घाटे की मुख्य वजहें
कंपनी ने घाटे के पीछे कई कारण बताए हैं, जिनमें रुपये में तेज गिरावट, नए श्रम कानूनों के चलते अतिरिक्त प्रावधान और मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण उड़ानों पर पड़ा असर प्रमुख हैं. इन सभी बाहरी कारकों ने वित्तीय प्रदर्शन को प्रभावित किया.
मजबूत बैलेंस शीट का सहारा
31 मार्च 2026 तक इंडिगो के पास 5.16 लाख करोड़ रुपये की कुल नकदी उपलब्ध है, जिसमें 3.62 लाख करोड़ रुपये फ्री कैश शामिल है. हालांकि कंपनी पर 7.77 लाख करोड़ रुपये का कर्ज भी है. इसके बावजूद कंपनी का कहना है कि उसकी बैलेंस शीट मजबूत है और वह भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार है.
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ऑपरेशनल मजबूती बरकरार
इंडिगो के पास मार्च 2026 तक कुल 441 विमान थे, जिनमें एयरबस, ATR और बोइंग के साथ कार्गो विमान भी शामिल हैं. कंपनी रोजाना 2,241 उड़ानें संचालित कर रही थी और 97 घरेलू व 45 अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों को कवर कर रही थी. टेक्निकल डिस्पैच रिलायबिलिटी 99.9% रही, ऑन-टाइम परफॉर्मेंस 79.9% और फ्लाइट कैंसिलेशन रेट सिर्फ 0.6% दर्ज किया गया.
कंपनी का बयान और आगे की योजना
इंडिगो के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल भाटिया ने वित्त वर्ष 2025-26 को चुनौतीपूर्ण बताते हुए कहा कि कंपनी का मुख्य कारोबार मजबूत बना हुआ है. उन्होंने भरोसा जताया कि मजबूत नकदी स्थिति कंपनी को आगे बढ़ने में मदद करेगी. कंपनी को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में उसकी क्षमता 3-4% तक बढ़ेगी.
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