- दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है.
- देश में लोगों का खर्च बढ़ रहा है. लोग अपनी बचत का बड़ा हिस्सा अब म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में लगा रहे हैं.
- यही कारण है कि भारत की विकास कहानी अभी भी मजबूत मानी जा रही है.
अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं या निवेश करने की सोच रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही आने वाले कुछ महीनों में भारतीय शेयर बाजार में ज्यादा तेजी न दिखे और बाजार एक सीमित दायरे में घूमता रहे, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए भारत अब भी दुनिया के सबसे आकर्षक बाजारों में से एक बना हुआ है.
वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी पीएल वेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था, बढ़ता उपभोग, इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार खर्च और लोगों का बैंक जमा से आगे बढ़कर म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में निवेश करना, आने वाले वर्षों में बाजार को मजबूती दे सकता है.
फिलहाल क्यों नहीं दौड़ रहा बाजार?
पिछले कुछ समय से निवेशक कई तरह की चिंताओं से घिरे हुए हैं. कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई और कंपनियों के मुनाफे को लेकर बनी अनिश्चितता बाजार को प्रभावित कर रही है.
रिपोर्ट के अनुसार आने वाले समय में बाजार की चाल काफी हद तक इन बातों पर निर्भर करेगी कि तेल के दाम क्या रहते हैं, मानसून कैसा रहता है, महंगाई कितनी बढ़ती या घटती है और कंपनियों के तिमाही नतीजे कैसे आते हैं.
यही वजह है कि विशेषज्ञ फिलहाल पूरे बाजार पर दांव लगाने के बजाय अच्छी और मजबूत कंपनियों को चुनकर निवेश करने की सलाह दे रहे हैं.

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भारत क्यों दिख रहा है मजबूत?
रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं धीमी विकास दर की चुनौती से जूझ रही हैं, लेकिन भारत की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है.
देश में लोगों का खर्च बढ़ रहा है, फैक्ट्रियां उत्पादन बढ़ा रही हैं, सरकार सड़क, रेलवे, एयरपोर्ट और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर लगातार निवेश कर रही है. इसके अलावा पहले जहां लोग अपनी बचत का बड़ा हिस्सा केवल बैंक एफडी या सोने में रखते थे, वहीं अब बड़ी संख्या में लोग म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार की ओर रुख कर रहे हैं.
यही कारण है कि भारत की विकास कहानी अभी भी मजबूत मानी जा रही है.

छोटे निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
रिपोर्ट में कहा गया है कि निवेशकों को एक बार में बड़ी रकम लगाने के बजाय धीरे-धीरे निवेश करना चाहिए. इसे आसान भाषा में समझें तो अगर आपके पास निवेश के लिए 1 लाख रुपये हैं, तो पूरी रकम एक साथ लगाने के बजाय उसे अलग-अलग हिस्सों में कुछ महीनों के दौरान निवेश करना बेहतर हो सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी कंपनियों और बड़ी-मध्यम श्रेणी की कंपनियों वाले फंड फिलहाल अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प हो सकते हैं.
अगले दो साल में क्या बदल सकता है?
रिपोर्ट का मानना है कि अगले 6 से 24 महीनों के दौरान महंगाई का दबाव कम हो सकता है और वैश्विक स्तर पर कुछ अनिश्चितताएं भी घट सकती हैं. अगर ऐसा होता है तो कंपनियों की कमाई में सुधार देखने को मिल सकता है.
जब कंपनियां ज्यादा मुनाफा कमाती हैं तो उनके शेयरों की कीमतों में भी बढ़ोतरी की संभावना बढ़ जाती है. यही वजह है कि विशेषज्ञ लंबी अवधि को लेकर आशावादी बने हुए हैं.

सोने को लेकर भी सकारात्मक संकेत
रिपोर्ट में सोने को भी निवेश का महत्वपूर्ण विकल्प बताया गया है. दुनिया भर में बढ़ते तनाव, युद्ध जैसी स्थितियों और महंगाई की चिंताओं के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश करते हैं. ऐसे समय में सोना सबसे भरोसेमंद विकल्पों में गिना जाता है.
कई देशों के केंद्रीय बैंक भी लगातार सोना खरीद रहे हैं. इससे सोने की कीमतों को लंबे समय तक सहारा मिलने की उम्मीद है.

अर्थव्यवस्था के आंकड़े क्या कहते हैं?
रिपोर्ट के मुताबिक भारत के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के ताजा आंकड़े दुनिया की अधिकांश बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर हैं. इसका मतलब है कि देश में उत्पादन और सेवाओं से जुड़ी गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि यही मजबूत आर्थिक आधार आने वाले वर्षों में शेयर बाजार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद कर सकता है.
तो इस रिपोर्ट से आम निवेशकों को क्या समझना चाहिए? इस रिपोर्ट का सबसे बड़ा संदेश यह है कि अगर आप रोजाना बाजार की उठापटक देखकर घबराते हैं, तो आपको लंबी अवधि की तस्वीर भी देखनी चाहिए. अगले कुछ महीनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बने रह सकते हैं, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत दिखाई दे रही है.
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