Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में दो दिनो की तेजी के बाद एक बार फिर गिरावट का दौर दिखा. चौतरफा बिकवाली के बीच सेंसेक्स और निफ्टी ताश के पत्तों की तरह ढह गए. जंग के इस समय में जहां एक ओर निवेशकों के मन में डर का माहौल है, वहीं दूसरी ओर बड़े निवेशक इसे एक अवसर के रूप में देख रहे हैं. लेकिन सवाल ये है कि क्या आपको गिरते बाजार में हर शेयर को छूना चाहिए?
बाजार में आज 9 लाख करोड़ रुपये स्वाहा
आज के सेशन में सेंसेक्स 2.25% और निफ्टी50 2.09% टूटकर बंद हुए. इस बड़ी गिरावट की वजह से निवेशकों की करीब 9 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति पलक झपकते ही साफ हो गई. सबसे ज्यादा मार रियल्टी और ऑटो सेक्टर पर पड़ी, जहां शेयरों में बड़ी बिकवाली देखने को मिली.
किस्त वाला फॉर्मूला
मार्केट एक्सपर्ट निश्चल माहेश्वरी ने एनडीटीवी प्रॉफिट से बातचीत में बाजार की इस हालत पर कहा कि जो निवेशक अगले 3 से 5 साल का प्लान रखते हैं, उनके लिए अभी की वैल्युएशन बहुत फायदेमंद है. हालांकि, अंधाधुंध खरीदारी के बजाय निवेशकों को किस्त में अपनी पूंजी लगानी चाहिए. मान लीजिए अगर आपके पास निवेश के लिए 100 रुपये हैं, तो बाजार में हर 200-300 अंकों की गिरावट पर सिर्फ 15-15 रुपये निवेश करें. ये प्लान एवरेज आउट करने में मदद करेगी और जब बाजार रिकवर होगा, तो आपका मुनाफा कई गुना बढ़ सकता है.

Market Crash
ट्रेडिंग ना करना ही सबसे अच्छी ट्रेडिंग
जहां लॉन्ग टर्म के निवेशकों के लिए ये सेल जैसा मौका है, वहीं शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स के लिए माहेश्वरी की सलाह बिल्कुल अलग है. उन्होंने साफ किया कि मौजूदा उतार-चढ़ाव ट्रेडर्स की पूंजी के लिए ठीक नहीं हैं. ऐसे माहौल में स्टॉप-लॉस हिट होने के चांस ज्यादा रहते हैं. अभी ट्रेडिंग से दूरी बनाना ही सबसे समझदारी भरा ट्रेड है.
डिप पर खरीदने से पहले ध्यान रखें ये बातें
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि हर गिरता हुआ शेयर मल्टीबैगर नहीं बनता. ऐसे में निवेश से पहले 5 पॉइंट्स की चेकलिस्ट जरूर बनाएं. पहले ये पता करें कि क्या कंपनी का प्रोडक्ट या सर्विस फ्यूचर के हिसाब से है? सिर्फ सस्ते दाम देखकर कमजोर शेयर ना खरीदें. इसके बाद चेक करें कि क्या कंपनी पिछले 3-5 सालों से लगातार अपने मुनाफे में बढ़ोतरी कर रही है. इसके अलावा गिरते बाजार में बड़े कर्ज वाली कंपनियां सबसे पहले डूबती हैं. कम कर्ज वाली कंपनियां बड़े झटकों को झेल जाती हैं. कंपनी के साथ मैनेजमेंट का भी पता करें कि क्या कंपनी चलाने वाले लोग ईमानदार हैं? मैनेजमेंट का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड कैसा रहा है.
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