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RBI की पॉलिसी और GDP डेटा तय करेंगे निफ्टी-सेंसेक्स की चाल, निवेश से पहले जान लें ये 5 बड़े ट्रिगर्स

भारतीय शेयर बाजार में पिछले हफ्ते काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला. कमजोर मानसून के अनुमान और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से निफ्टी और सेंसेक्स पर दबाव बना रहा. अब आने वाले दिनों में बाजार किस तरफ जाएगा, ये खबर में बताईं 5 बड़ी बातों पर डिपेंड करेगा.

RBI की पॉलिसी और GDP डेटा तय करेंगे निफ्टी-सेंसेक्स की चाल, निवेश से पहले जान लें ये 5 बड़े ट्रिगर्स

अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे तनाव का असर दुनियाभर के मार्केट पर देखने मिल रहा है. ऐसे में भारतीय शेयर मार्केट इसके असर से अछूता नहीं रहा. बीते हफ्ते निवेशकों का पोर्टफोलियो कभी हरे तो कभी लाल निशान में दिखाई दिया. शुरुआती सेशन में कुछ तेजी बाजार में दिखाई दी, लेकिन हफ्ते के आखिर में मार्केट लाल सागर में डूब गया. अब निवेशकों के मन में बस एक ही सवाल है, अगले हफ्ते बाजार में क्या होगा? आपको बता दें कि आने वाला हफ्ता बाजार की चाल के लिए अहम है. इसी हफ्ते में आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी के साथ देश की जीडीपी के आंकड़े आने हैं. तो चलिए इस खबर में आपको उन बड़े ट्रिगर्स के बारे में बताते हैं जो भारतीय शेयर बाजार की दिशा और दशा तय करेंगे.

क्यों आ रही बाजार में गिरावट?

हफ्ते की शुरुआत बाजार के लिए अच्छी थी. कच्चे तेल की कीमतें कम होने और अमेरिका‑ईरान के बीच समझौते की उम्मीद से निवेशकों का भरोसा बढ़ा, जिससे निफ्टी पहली बार 24,000 के ऊपर पहुंच गया. लेकिन ये तेजी ज्यादा नहीं टिक पाई. इसी समय मौसम विभाग ने बताया कि इस साल कमजोर मानसून का अनुमान है. जताया, जिससे महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई. दूसरी तरफ विदेशी निवेशक लगातार मार्केट से पैसा निकालते रहे. इन सभी वजहों से पूरे हफ्ते में निफ्टी 0.72% गिरकर 23,547.75 पर और सेंसेक्स 0.85% टूटकर 74,775.74 पर बंद हुआ.

जानें वो बड़े ट्रिगर्स जिन पर टिकी बाजार की नजर

  • ऑटो सेल्स के आंकड़े

1 जून को जहां मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) के आंकड़े जारी होंगे. वहीं दूसरी तरफ ऑटोमोबाइल कंपनियां अपने ऑटो सेल्स के आंकड़े पेश करेंगी, जिससे कंज्यूमर डिमांड के बारे में पता चलेगा. इन आंकड़ों का असर बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के शेयरों पर सीधा देखने को मिलेगा.

  • अमेरिका के फेडरल रिजर्व पर निवेशकों की नजर

 फेडरल रिजर्व के फैसलों का असर शेयर बजार पर पड़ सकता है. 3 जून को अमेरिका में आर्थिक आंकड़े आने वाले हैं, जैसे नौकरी से जुड़े, सर्विस सेक्टर का पीएमआई डेटा. इनसे ये समझ आता है कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था कितनी मजबूत है और महंगाई बढ़ रही है या नहीं. इन सभी डेटा को देखते हुए फेडरल रिजर्व तय करता है कि ब्याज दरें बढ़ानी हैं या घटानी हैं. इसका असर सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के बाजारों पर पड़ता है. भारत के लिए ये इसलिए जरूरी है क्योंकि फेड के फैसले के बाद से ही विदेशी निवेशक अपनी दिशा तय करते हैं. 

  • आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी

आरबीआई की एमपीसी की मीटिंग 3 जून से शुरू होकर 5 जून 2026 तक चलेगी और फिर 5 जून को सुबह 10 बजे गवर्नर संजय मल्होत्रा मॉनेटरी पॉलिसी के बारे में बताएंगे. हालांकि बाजार को ब्याज दरों में बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है, लेकिन असली नजर इस बात पर रहेगी कि आरबीआई देश में महंगाई, दुनिया भर के हालात पर क्या कहता है. साथ ही मौसम विभाग ने कम मानसून की बात कही है तो इसे लेकर आरबीआई का रुख क्या है, इसके बारे में पता चलेगा.  इसका सीधा असर बैंक और NBFC सेक्टर के शेयरों पर पड़ सकता है.

  • देश की जीडीपी और आईआईपी के आंकड़े

मॉनेटरी पॉलिसी वाले दिन ही यानी 5 जून को एनएसओ वित्त वर्ष 26 के लिए भारत की मार्च तिमाही (Q4) के जीडीपी के आंकड़े जारी करेगा. इसी के साथ आईआईपी के आंकड़े भी आएंगे, जो मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग और बिजली सेक्टर की ग्रोथ के बारे में बताएंगे.

  • अमेरिका-ईरान पीस डील और कच्चे तेल की कीमतें

अमेरिका-ईरान के बीच पीस डील कब तक होती है, इस पर दुनियाभर के निवेशकों की नजर है. भारत की बात करें तो देश अपनी जरूरत का करीब 80 से 85% तेल का हिस्सा आयात करता है. ऐसे में मिडिल ईस्ट टेंशन की वजह से अगर एक बार फिर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आता है, तो भारत में महंगाई, के साथ कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर नेगेटिव असर देखने को मिल सकता है. डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए की चाल भी मार्केट का फ्लो तय करेगा.

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शुभम उपाध्याय
shubham.upadhyay@ndtv.com
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