अमेरिका-ईरान के बीच हुए शांति समझौते से दुबई के रियल एस्टेट मार्केट की नई उम्मीद जगी है. हालांकि दुबई प्रॉपर्टी के सबसे बड़े खरीदारों में से एक भारतीय निवेशक अभी सोच समझकर ही फैसला लेने के मूड में हैं. जंग से पहले जहां दुबई के मार्केट में भारतीय विला और पेंटहाउस पर दांव लगा रहे थे, वहीं अब यहां एक बदलाव नजर आ रहा है. एनारॉक के अनुसार भारतीय निवेशक अब सस्ती और अच्छी डील पर फोकस कर रहे हैं. यानी मार्केट में चल रही उथल-पुथल के बीच अभी एक साथ पैसा लगाने से बचा जा रहा है.
बजट में आई बड़ी कमी
एनारॉक के अनुसार जंग से पहले भारतीय निवेशकों का बजट AED 2 मिलियन हुआ करता था. इसकी एक बड़ी वजह ये भी थी कि इतने बड़े निवेश के जरिए दुबई का गोल्डन वीजा भी मिल जाता था. लेकिन अभी के समय में रिस्क को देखते हुए ये बजट कम होकर AED 1.2 से 1.5 मिलियन पर आ पहुंचा है. एक्सपर्ट के अनुसार देश के निवेशकों की इन्क्वायरी भी 10 से 15 फीसदी कम हो गई है.
स्टूडियो और 1BHK फ्लैट्स की बढ़ी मांग
भारतीय निवेशक अब किसी आलीशान विला की जगह ऐसी प्रॉपर्टी देख रहे हैं, जहां से रेंट आसानी से मिल सके. इसलिए दुबई के प्राइम लोकेशंस पर स्टूडियो अपार्टमेंट्स के साथ 1बीएचके और छोटे साइज के 2बीएचके की डिमांड बढ़ गई है. साथ ही खरीदार अब फ्लैट बुक करने से पहले डेवलपर का ट्रैक रिकॉर्ड, मेंटेनेंस कॉस्ट के बारे में जानना चाह रहे हैं.
रेंटल यील्ड में आई कमी
एनारॉक के अनुसार साल 2026 में दुबई का ग्रॉस रेंटल यील्ड यानी किराए से होने वाली कमाई घटकर 5.5 फीसदी से 7 फीसदी के बीच में आ गई है. दो साल पहले यही 7 फीसदी से 9 फीसदी के बीच हुआ करती थी.
बैंक रिटर्न भी दे रहा कड़ी टक्कर
देश में विदेशी मुद्रा अनिवासी यानी FCNR पर 7 फीसदी का रिटर्न मिल रहा है. ये भी दुबई प्रॉपर्टी में पैसा ना लगाने की एक बड़ी वजह है. यानी देश में सेफ रिटर्न मिल रहा है. इसलिए एनआरआई इस रिटर्न को देखते हुए दुबई रियल एस्टेट से पैसा निकालकर बैंक में जमा कर रहे हैं.
पुराने घरों की बिक्री में 30% की भारी कमी
Anadolu Agency के डेटा के अनुसार, मिडिल ईस्ट में जंग के चलते पिछले कुछ महीने में सेकेंडरी मार्केट यानी पुराने घरों की बिक्री के ट्रांजेक्शन वॉल्यूम में लगभग 30% की गिरावट आई है. पिछले कुछ सालों में जो खरीदारी को लेकर दीवानगी दिख रही थी, वह अब काफी ठंडी पड़ गई है. लग्जरी इलाकों में तो खरीदारों की पूछताछ में बहुत ज्यादा कमी आई है.
हालांकि एक्सपर्ट का मानना है कि मिडिल ईस्ट में अब लगातार शांति रहती है तो ये गिरावट दुबई के रियल एस्टेट मार्केट के लिए एक सर्किट ब्रेकर का काम करेगा. आने वाले समय में भारतीय एक बार फिर दुबई मार्केट में वापसी करते हुए दिख सकते हैं.
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