Dubai Real Estate Crash Iran-Israel War: युद्ध किसी भी देश के लिए अच्छी खबर लेकर नहीं आता है. महंगाई से लेकर उठा पटक का दौर विश्वभर में फेल जाता है. ऐसा ही कुछ माहौल ईरान और इजरायल के बीच होती हुई जंग के बीच बना हुआ है. दुबई, ये वो जगह है जहां आज से करीब 20 दिन पहले प्रॉपर्टी रेट आसामान छू रहे थे, लेकिन जंग शुरू होने के बाद इन कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है. कभी निवेशकों के लिए स्वर्ग माना जाने वाला दुबई आज अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, जिसका सबसे बड़ा असर इसके रियल एस्टेट और टूरिज़्म सेक्टर पर पड़ा है.
दुबई फाइनेंशियल मार्केट रियल एस्टेट इंडेक्स (DFMREI) में आई गिरावट चौंकाने वाली है. 27 फरवरी को जो इंडेक्स 16,144 पर था, वो 16 मार्च की दोपहर तक गिरकर 11,047 पर आ गया है. सिर्फ दो हफ्तों में बाजार में 32% की गिरावट दर्ज आई है, जो अप्रैल 2025 के बाद का सबसे लो लेवल है. एक्सपर्ट का मानना है कि अगर तनाव ऐसे ही जारी रहा, तो प्रॉपर्टी के दाम 30% से 40% तक और गिर सकते हैं.
भारतीय निवेशकों का फंसा पैसा
दुबई के रियल एस्टेट में भारतीयों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा करीब 20 से 22% है. साल 2025 में जब दुबई ने 187 बिलियन डॉलर की रिकॉर्ड सेल की थी, तब भारतीय सबसे बड़े खरीदार बनकर उभरे थे. लेकिन अब इस जंग के बाद स्थिति बदल गई है. बड़े निवेशक अब दुबई से अपना पैसा निकालकर सिंगापुर और हॉन्गकॉन्ग जैसे सेफ हैवेन्स में लगा रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, कई भारतीय कारोबारियों ने युद्ध शुरू होते ही अपने बैंक खातों से लाखों डॉलर सिंगापुर ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इतना ही नहीं सिंगापुर के वेल्थ लॉयर्स के पास दुबई छोड़ने वाले क्लाइंट्स के लगातार सवाल आ रहे हैं.

Dubai Real Estate Crash Iran-Israel War
खाली पड़े होटल
दुबई की जीडीपी में 13% योगदान देने वाला टूरिज़्म सेक्टर फिलहाल खराब स्थिति में है. एयरपोर्ट और हवाई रास्तों पर असर पड़ने से फ्लाइट्स रद्द हैं. जो कमरे 400 यूरो में मिलते थे, उनके दाम ग्राहकों की कमी के चलते आधे से भी कम कर दिए हैं. जेबीआर और ऐन दुबई जैसे बड़े टूरिस्ट प्लेस अब सुनसान हैं.
लो-पेड वर्कर्स पर संकट
दुबई के टूरिज्म और सर्विस सेक्टर में काम करने वाले करीब 9.25 लाख लोग, जिनमें बड़ी संख्या भारतीयों और एशियाई प्रवासियों की है, अब अपनी नौकरियों को लेकर परेशान हैं. एक अनुमान के अनुसार, इस जंग से मिडिल ईस्ट के देशों के टूरिज्म को रोजाना 600 मिलियन डॉलर का बड़ा नुकसान झेलना पड़ रहा है.
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