भारत ने 'बंधुआ मजदूरी' से बने सामान के आयात पर रोक लगा दी है. भारत की व्यापार नीति में यह अहम बदलाव है. ये बदलाव ऐसे समय किया गया है, जब अमेरिका की ओर से भारत समेत 60 देशों के खिलाफ बंधुआ मजदूरी से जुड़े आयात को लेकर जांच की जा रही है. अमेरिका ने भारत पर 12.5% टैरिफ लगाने की धमकी भी दी है.
अब भारत ने पहली बार बंधुआ मजदूरी से जुड़े आयात को रोकने के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि बंधुआ मजदूरी कैसे तय होगी और यह किन चीजों पर लागू होगी?
क्या है ये पूरा मामला? बंधुआ मजदूरी की परिभाषा क्या है? क्या ये फैसला तत्काल लागू हो जाएगा? जानते हैं ऐसे ही सवालों के जवाब.
भारत की पॉलिसी में क्या बदला?
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने 13 जुलाई को इसे लेकर नोटिफिकेशन जारी किया गया था. इसके मुताबिक, 'जबरदस्ती मजदूरी करवाकर पूरी तरह या आंशिक रूप से बनाए गए या तैयार किए गए सामान का आयात प्रतिबंधित है.'
इसमें आगे कहा गया है, 'बंधुआ मजदूरी के तहत वे सभी काम आते हैं, जो किसी व्यक्ति को डरा-धमकाकर कराए गए हों और उसके लिए व्यक्ति ने अपनी मर्जी से काम करने की पेशकश नहीं की हो.'
भारत ने भी बंधुआ मजदूरी की वही परिभाषा रखी है, जो अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की है. दुनियाभर में बंधुआ मजदूरी की यही परिभाषा मानी जाती है.
नई फॉरेन ट्रेड पॉलिसी के तहत, केंद्र सरकार के पास अब किसी खास सामान के आयात पर रोक लगाने का अधिकार है, अगर उसे जांच या दूसरे जरूरी सबूतों के आधार पर पता चलता है कि वह सामान बंधुआ मजदूरी से बनाया गया था.

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पॉलिसी बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?
न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, भारत की पॉलिसी में यह बदलाव तब हुआ है, जब यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) भारत समेत 60 देशों में बंधुआ मजदूरी से जुड़ी चिंताओं को लेकर 'धारा 301' के तहत जांच कर रहा है. USTR का आरोप है कि ये देश बंधुआ मजदूरी से बने सामानों के आयात पर रोक लगाने में नाकाम रहे हैं.
3 जून को अमेरिका ने भारत समेत 54 देशों से होने वाले आयात पर 12.5% टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, क्योंकि ये देश कथित तौर पर बंधुआ मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक नहीं लगा पाए.
बाकी बचे छह देशों- कनाडा, इक्वाडोर, यूरोपीय संघ, इंडोनेशिया, मैक्सिको और पाकिस्तान पर 10% अतिरिक्त इम्पोर्ट ड्यूटी लगेगी, क्योंकि इन्होंने बंधुआ मजदूरी से बने सामानों के आयात पर रोक लगाने के लिए उपाय लागू किए हैं.
ट्रेड पॉलिसी ये बदलाव इसलिए भी जरूरी हो जाता है क्योंकि भारत, अमेरिका के साथ बायलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट (BTA) पर बातचीत भी कर रहा है.
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क्या आयात पर तत्काल बैन लग जाएगा?
गजट नोटिफिकेशन में कहा गया है कि इसके नियम ऑफिशियल गजट में छपने के 30 दिन बाद लागू होंगे.
ये नोटिफिकेशन किसी भी देश से आने वाले सामान या इम्पोर्ट पर तुरंत रोक नहीं लगाता है. इसके बजाय यह एक कानूनी ढांचा बनाता है जो सरकार को भविष्य में कुछ खास सामानों पर रोक लगाने की इजाजत देता है, बशर्ते कि DGFT की जांच से ये साबित हो जाए कि इन सामानों को बंधुआ मजदूरी करवाकर बनाया गया था.

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और ये जांच कैसे होगी?
अभी साफ नहीं है. इस तरह के सामानों की जांच करने की प्रक्रिया 'हैंडबुक ऑफ प्रोसीजर्स 2023' में बताई जाएगी.
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के फाउंडर अजय श्रीवास्तव ने PTI से कहा, 'इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार जांच कैसे करती है? बंधुआ मजदूरी साबित करने के लिए किस तरह के सबूतों की जरूरत होती है? और किन प्रोडक्ट्स को टारगेट किया जाता है?'
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तो क्या अभी भी होती है बंधुआ मजदूरी?
हां. अभी भी दुनिया के कई देशों में बंधुआ मजदूरी करवाई जाती है. ILO का अनुमान है कि दुनियाभर में 2.8 करोड़ से ज्यादा लोग बंधुआ मजदूरी करते हैं.
इस नोटिफिकेशन में किसी देश का नाम नहीं है. लेकिन इससे चीन को बड़ा झटका जरूर लग सकता है. GTRI का कहना है कि खेती, माइनिंग, मैनुफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन और सर्विस सेक्टर में ऐसे मामले सामने आए हैं और चीन के शिनजियांग इलाके पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर रखी जा रही है.
शिनजियांग वही प्रांत है, जहां सबसे ज्यादा उइगर मुसलमान रहते हैं. माना जाता है कि इन्हीं मुसलमानों से चीन जबरदस्ती काम करवाता है.
अजय श्रीवास्तव ने PTI से कहा कि अमेरिकी अधिकारी कपास, टेक्सटाइल, सोलर पैनल पॉलीसिलिकॉन, सीफूड, मेटल, बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे प्रोडक्ट्स को बंधुआ मजदूरी के दायरे में मानते हैं, खासकर तब जब इनका संबंध चीन के शिनजियांग से हो. उन्होंने कहा कि इसके बावजूद अमेरिका और यूरोपीय संघ चीन से ऐसे कई प्रोडक्ट्स का आयात कर रहे हैं.

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कारोबार में बंधुआ मजदूरी बड़ा मुद्दा क्यों?
PTI के मुताबिक, बंधुआ मजदूरी के कारण प्रोडक्शन की लागत कम हो जाती है और ऐसे सामान बाकी सामानों की तुलना में सस्ते बिकने लगते हैं. इसलिए इसे न सिर्फ मानवाधिकारों का उल्लंघन माना जाता है, बल्कि अनुचित व्यवहार भी माना जाता है.
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इससे भारत को क्या मिलेगा?
अजय श्रीवास्तव ने कहा कि भारत में बंधुआ मजदूरी में काम करवाने पर पहले से हो रोक है लेकिन विदेश में जबरदस्ती काम करवाकर बनाए गए सामान के आयात को रोकने के लिए ट्रेड पॉलिसी में कोई साफ प्रावधान नहीं था. ये नोटिफिकेशन उसी कमी को पूरा करता है.
श्रीवास्तव के अनुसार, इस नोटिफिकेशन का मकसद भारत के व्यापार नियमों को अंतरराष्ट्रीय लेबर स्टैंडर्ड्स के अनुरूप बनाना, बंधुआ मजदूरी से जुड़े इंपोर्ट को रोकना, सप्लाई-चेन की विश्वसनीयता को मजबूत करना और व्यापार बातचीत में भारत की स्थिति को बेहतर बनाना है.
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