अगर आप रोल्स-रॉयस, लैंड रोवर,जैगुआर, एस्टन मार्टिन जैसी लग्जरी कार खरीदने का सपना देख रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. भारत-यूके के बीच हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) आज यानी 15 जुलाई से लागू हो गया है. इस समझौते का सबसे बड़ा असर ऑटोमोबाइल सेक्टर पर देखने को मिलेगा. अब यूके से भारत आने वाली कई लग्जरी कारों पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी कम हो जाएगी. इसका असर आने वाले समय में इन कारों की कीमतों पर भी दिख सकता है.
क्यों सस्ती होंगी लग्जरी कारें?
भारत-यूके FTA के तहत अब यूके में बनी और पूरी तरह तैयार होकर आने वाली लग्जरी कारों पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी को 110 फीसदी से घटाकर सीधे 30 फीसदी कर दी गई है. यह राहत पहले साल 20,000 कारों के तय कोटा पर मिलेगी. यही वजह है कि Rolls-Royce, Land Rover, Jaguar, Aston Martin, McLaren और Bentley जैसे ब्रिटिश ब्रांड की कारें पहले के मुकाबले कम कीमत पर मिल सकती हैं.
हालांकि कंपनियां अभी नई कीमतों का ऐलान करने की तैयारी कर रही हैं. यह खबर उन लोगों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं है जो रोल्स-रॉयस, लैंड रोवर, एस्टन मार्टिन या मैकलारेन जैसी महंगी और आलीशान गाड़ियां खरीदने का सपना देखते हैं.
कौन सी कारों को मिलेगा फायदा?
इस समझौते का फायदा सबसे ज्यादा यूके में बनी लग्जरी कारों को मिलेगा. Rolls-Royce, Land Rover, Jaguar, Aston Martin, McLaren और Bentley जैसे ब्रांड इसके दायरे में आएंगे. इसके अलावा यूके से आने वाले कई ऑटो पार्ट्स भी सस्ते हो सकते हैं, जिससे भविष्य में कुछ गाड़ियों की कीमत और मेंटेनेंस कॉस्ट पर भी असर पड़ सकता है.
कितनी सस्ती हो जाएंगी ये कारें?
लग्जरी कारों की कीमत में इंपोर्ट ड्यूटी का हिस्सा सबसे ज्यादा होता है, इसलिए 80 फीसदी की यह भारी कटौती कार की लैंडेड कॉस्ट को बहुत कम कर देगी. इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन कारों की कीमतों में 20 फीसदी से लेकर 30 फीसदी तक की सीधी गिरावट आ सकती है. इसका मतलब है कि जिस कार की कीमत अभी 7 से 8 करोड़ रुपये है, ड्यूटी कम होने के बाद उसकी कीमत में 2 से 3 करोड़ रुपये तक की कमी हो सकती है. वहीं करीब 5 करोड रुपये की कार पर भी 1 से 2 करोड रुपये तक की राहत मिल सकती है.
यानी कार के मॉडल और कीमत के हिसाब से अब आपको करोड़ों रुपये की इन शानदार गाड़ियों पर बड़ी बचत करने का मौका मिलेगा. हालांकि, अंतिम कीमत GST, रोड टैक्स और डीलर मार्जिन पर भी निर्भर करेगी. यह बदलाव मुख्य रूप से उन कारों पर लागू होगा जो यूके में तैयार होकर भारत आती हैं, जिन्हें ऑटो सेक्टर की भाषा में सीबीयू यानी कंप्लीटली बिल्ट यूनिट कहा जाता है.
किस तरह काम करेगा यह कोटा सिस्टम?
इस डील में सरकार ने भारतीय ऑटो सेक्टर का भी पूरा ख्याल रखा है. यह ड्यूटी कटौती एक तय कोटे के अंदर आने वाली गाड़ियों पर ही मिलेगी. पहले साल में करीब 20,000 गाड़ियां इस कोटे का हिस्सा बनेंगी. वहीं पेट्रोल और डीजल वाली गाड़ियों को शुरुआत से ही ये छूट मिलने लगेगी, जबकि इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारों के लिए नियम थोड़े अलग होंगे, ताकि भारतीय ईवी बनाने वाली कंपनियों को शुरुआती 5 सालों तक कोई दिक्कत न हो.
इसके अलावा, भारत से यूके जाने वाली भारतीय इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारों को भी वहां ड्यूटी-फ्री एंट्री मिलेगी, जिससे हमारे एक्सपोर्ट को भी नई ताकत मिलेगी.
ट्रक और अन्य वाहनों पर भी मिलेगा फायदा
सिर्फ लग्जरी कारें ही नहीं, बल्कि यूके से आने वाले ट्रकों पर भी टैक्स कम कर दिया गया है. अभी ट्रकों पर 44 फीसदी ड्यूटी लगती है, जो अगले 5 सालों में घटकर 8.8 फीसदी के करीब आ जाएगी. इससे कमर्शियल सेक्टर में भी सस्ती मशीनरी और ट्रांसपोर्ट के नए रास्ते खुलेंगे. हालांकि, अभी कंपनियों की ओर से नई कीमतों का ऐलान नहीं हुआ है लेकिन आने वाले कुछ दिनों में शोरूम्स में इन कारों के नए रेट्स देखने को मिलेंगे.
हर कंपनी की अपनी अलग पॉलिसी और प्रॉफिट मार्जिन होता है, इसलिए हर कार की कीमत में होने वाली कमी मॉडल और इंजन क्षमता के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है. यह ट्रेड डील भारतीय ग्राहकों के लिए लग्जरी कारों को पहले से कहीं ज्यादा बजट फ्रेंडली बनाने वाली है.
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