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ट्रंप ने 20% टोल लगाया तो एक जहाज पर 290 करोड़ का खर्च बढ़ेगा! भारत के लिए कितनी चिंता की बात?

कुछ दिनों की शांति के बाद अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर जंग शुरू हो गई है. इस जंग की एक बड़ी वजह होर्मुज के कंट्रोल को लेकर है.

ट्रंप ने 20% टोल लगाया तो एक जहाज पर 290 करोड़ का खर्च बढ़ेगा! भारत के लिए कितनी चिंता की बात?
ट्रंप ने होर्मुज पर 20% टोल का ऐलान किया है.

फारस की खाड़ी को अरब सागर तक जोड़ने वाले होर्मुज स्ट्रेट पर किसका कंट्रोल होगा? अमेरिका का या ईरान का. क्योंकि दोनों के बीच कुछ दिन की शांति के बाद फिर से शुरू हुई जंग की बड़ी वजह इसी 'कंट्रोल' को लेकर है. अमेरिका ने पिछले कुछ दिन में ईरान के सैकड़ों ठिकानों पर बमबारी की है. वहीं, ईरान ने बहरीन, कुवैत जैसे खाड़ी देशों में बने अमेरिकी बेस को निशाना बनाया है.

अमेरिका और ईरान की जंग में होर्मुज स्ट्रेट एक बड़ा अखाड़ा बन गया है. अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को जिस MoU पर साइन हुए थे, उसमें साफ था कि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जाएगा और वहां से जहाज पहले की तरह आ-जा सकेंगे. 

लेकिन जब बीते दिनों अमेरिका ने बमबारी शुरू की तो ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का ऐलान कर दिया. हालांकि, अमेरिका ने कहा कि होर्मुज खुला है और जहाज सुरक्षित निकल रहे हैं. इसी बीच अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज का कंट्रोल अपने हाथ में लेने की बात कही है. उन्होंने कहा कि यहां से गुजरने वाले जहाजों को 20% टोल देना होगा. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान पर नौसैनिकों की नाकाबंदी फिर से लागू होगी. जबकि, ईरान का कहना है कि ऐसा करके अमेरिका दुनिया की तेल और गैस की सप्लाई को कतरे में डाल रहा है.

होर्मुज का 'गार्जियन' कौन?

ट्रंप ने सोमवार रात को ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट कर अमेरिका को होर्मुज का 'गार्जियन' बताया और कहा कि यहां से गुजरने वाले जहाजों से 20% टोल लिया जाएगा.

ट्रंप ने कहा, 'होर्मुज स्ट्रेट खुला है. ईरान के साथ या उसके बिना भी खुला ही रहेगा. हम 'ईरानी नाकेबंदी' को फिर से लागू कर रहे हैं. इसे यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि यह नाकेबंदी सिर्फ ईरान के जहाजों या ग्राहकों को ही आने-जाने से रोकती है. बाकी सभी देश इस स्ट्रेट को खुले तौर पर इस्तेमाल कर सकेंगे.'

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उन्होंने आगे कहा, 'अब से अमेरिका को 'होर्मुज स्ट्रेट का गार्जियन' माना जाएगा. साथ ही निष्पक्षता के नाते दुनिया के इस संवेदनशील हिस्से में सुरक्षा और हिफाजत का काम करने के लिए जरूरी सभी खर्चों की भरपाई के तौर पर यहां से गुजरने वाले सभी कार्गो पर 20% की दर से टोल लिया जाएगा. यह प्रक्रिया और व्यवस्था तुरंत शुरू हो जाएगी.'

ट्रंप की इस पोस्ट पर ईरान ने भी जवाब दिया. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट का 'गार्जियन' बताया. 

X पर पोस्ट करते हुए अराघची ने कहा, 'अमेरिकी राष्ट्रपति बिल्कुल सही कह रहे हैं. जो कोई भी होर्मुज स्ट्रेट से कमर्शियल जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की सुविधा देता है, उसे इसके लिए कंपनसेट मिलना चाहिए. ईरान हमेशा से इस स्ट्रेट का 'गार्जियन' रहा है और हमेशा रहेगा.'

उन्होंने ट्रंप के 20% टोल पर सवाल उठाते हुए कहा कि '20% निश्चित रूप से बहुत ज्यादा है. हम सही दर तय करेंगे.'

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क्या टोल लगा सकते हैं ट्रंप?

ट्रंप ने जो 20% टोल का प्रस्ताव दिया है, उसके लिए उनका तर्क है कि जहाजों की सुरक्षा की जाएगी, अमेरिकी सैनिक तैनात होंगे और उनके खर्च की भरपाई इसी टोल से होगी.

ट्रंप से पहले ईरान ने होर्मुज पर टोल लगाने की बात कही थी. अमेरिका के साथ जो MoU हुआ था, उसमें भी यह बात थी कि होर्मुज के मैनेजमेंट को लेकर ईरान और ओमान आपस में चर्चा करेंगे. इसका मतलब यही था कि ईरान और ओमान मिलकर तय करेंगे कि होर्मुज से जहाज कैसे गुजरेंगे. 

समंदर के कानून 1982 से बने हुए हैं. इसे यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी (UNCLOS) कहा जाता है. इसके तहत, जहाजों को बिना किसी रुकावटे के इंटरनेशनल स्ट्रेट से गुजरने का अधिकार है. ये कानून किसी बाहरी देश को ऐसे समुद्री रास्तों से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने की इजाजत भी नहीं देता है.

इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) ने फिर से कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून में स्ट्रेट से गुजरने के लिए अनिवार्य टोल का कोई प्रावधान नहीं है.

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सांकेतिक तस्वीर. (IANS)

सांकेतिक तस्वीर. (IANS)

टोल लगा तो क्या असर होगा?

ट्रंप ने 20% टोल की बात कही है. ये बहुत ज्यादा है. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, विश्लेषकों का अनुमान है कि इससे 10 से 26 डॉलर प्रति बैरल तक लागत बढ़ सकती है. बड़े जहाजों के लिए तो 3 करोड़ डॉलर तक लागत बढ़ने का अनुमान है. आखिरकार इसका भार लोगों पर ही पड़ेगा.

ING रिसर्च में लॉजिस्टिक्स के सीनियर इकोनॉमिस्ट रिको लुमन ने NYT से कहा कि टैंकर कंपनियां फारस की खाड़ी से यूरोप तक तेल पहुंचाने के लिए लगभग 10 डॉलर प्रति बैरल का चार्ज लेती हैं. उन्होंने कहा कि अभी एक बैरल तेल की कीमत लगभग 80 डॉलर है, इसलिए होर्मुज से तेल ले जाने पर ट्रंप की फीस से प्रति बैरल 16 डॉलर और जुड़ सकते हैं. इससे ट्रांसपोर्टेशन का कुल खर्चा 26 डॉलर प्रति बैरल तक हो जाएगा.

उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े टैंकर जिससे एक बार में 20 लाख बैरल तेल ले जाया जा सकता है, उसकी लागत में 3 करोड़ डॉलर का खर्च और बढ़ सकता है. भारतीय करंसी में 3 करोड़ डॉलर का मतलब हुआ 290 करोड़ रुपये. इसका मतलब हुआ कि तेल आयात करने वाली कंपनियां इसका खर्चा ग्राहकों से वसूल करेंगी.

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भारत पर भी पड़ेगा बड़ा असर?

होर्मुज पर टोल लगता है या नहीं? ये तो अभी तक साफ नहीं है. लेकिन अगर ऐसा होता है तो इसका भारत पर भी बड़ा असर पड़ सकता है. वह इसलिए क्योंकि भारत के बहुत से जहाज तेल और गैस लेकर इसी रास्ते से आते हैं.

भारत अपनी जरूरत का 80 से 85% कच्चा तेल आयात करता है. इसमें से 30% कच्चा तेल होर्मुज के रास्ते से ही आता है. 60% LPG भी आयात करता है, जिसमें से 90% होर्मुज से ही आती है. इतना ही नहीं, 30% LNG भी होर्मुज के रास्ते ही आती है.

अगर इन आंकड़ों के हिसाब से अनुमान लगाया जाए तो 2025-26 में 7.37 करोड़ बैरल कच्चा तेल और 1.90 करोड़ मीट्रिक टन LPG होर्मुज के रास्ते से ही भारत आई थी.

ऐसे में अगर 20% टोल लगाया जाता है तो भारतीय तेल कंपनियों को कच्चा तेल मंगाने के लिए ज्यादा कीमत चुकानी होगी. इससे देश का आयात बिल और बढ़ जाएगा. और आखिरकार इससे भारत में तेल और गैस की कीमत बढ़ सकती है.

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