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देश में अनाज की जबरदस्‍त पैदावार का अनुमान, गेहूं और चावल तोड़ेंगे रिकॉर्ड, मिडिल ईस्‍ट जंग के बीच सामने आए दमदार आंकड़े

इस बार खाद्यान्न उत्पादन का परिदृश्य ऐतिहासिक स्तर पर है. साल 2025-26 के लिए खरीफ खाद्यान्न उत्पादन 1741.44 लाख मीट्रिक टन और रबी खाद्यान्न उत्पादन 1745.13 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है.

देश में अनाज की जबरदस्‍त पैदावार का अनुमान, गेहूं और चावल तोड़ेंगे रिकॉर्ड, मिडिल ईस्‍ट जंग के बीच सामने आए दमदार आंकड़े
खरीफ चावल का उत्पादन रिकॉर्ड 1239.28 लाख मीट्रिक टन होने का अनुमान है.

एक तरफ मध्य-पूर्व एशिया (West Asia) में जारी भीषण युद्ध ने दुनिया भर में तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई चेन को हिलाकर रख दिया है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय खेतों से एक बहुत ही सुखद और राहत भरी खबर आई है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने साल 2025-26 के लिए मुख्य फसलों के उत्पादन का दूसरा अग्रिम अनुमान (Second Advance Estimates) जारी कर दिया है. ये आंकड़े बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के बावजूद भारत 'खाद्य सुरक्षा' (Food Security) के मामले में न केवल आत्मनिर्भर है, बल्कि बेहद मजबूत स्थिति में है. मंगलवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इन आंकड़ों को मंजूरी दी, जो देश में रिकॉर्ड तोड़ खाद्यान्न उत्पादन की ओर इशारा कर रहे हैं.

टूटेगा पिछले साल का रिकॉर्ड

कृषि मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस बार खाद्यान्न उत्पादन का परिदृश्य ऐतिहासिक स्तर पर है. साल 2025-26 के लिए खरीफ खाद्यान्न उत्पादन 1741.44 लाख मीट्रिक टन और रबी खाद्यान्न उत्पादन 1745.13 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है.

यह पिछले साल (2024-25) की तुलना में एक बड़ी छलांग है. पिछले साल खरीफ उत्पादन 1694.60 लाख मीट्रिक टन था, जिसमें इस बार लगभग 2.8% (46 LMT) की बढ़ोतरी हुई है. वहीं, रबी उत्पादन में पिछले साल (1691.66 LMT) के मुकाबले 3.2% (53 LMT) की शानदार वृद्धि देखी गई है.

चावल और गेहूं: रिकॉर्ड उत्पादन की तैयारी

देश की थाली के सबसे अहम हिस्से, यानी चावल और गेहूं के मोर्चे पर भी भारत ने अपनी बादशाहत कायम रखी है. खरीफ चावल का उत्पादन रिकॉर्ड 1239.28 लाख मीट्रिक टन होने का अनुमान है. वहीं, रबी सीजन में भी चावल का उत्पादन 167.20 लाख मीट्रिक टन रहने की उम्मीद है. रबी सीजन की सबसे मुख्य फसल गेहूं का उत्पादन भी इस बार रिकॉर्ड 1202.10 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है. यह पिछले साल के 1179.45 लाख मीट्रिक टन की तुलना में 22.65 लाख मीट्रिक टन अधिक है.

दालों के उत्पादन में भी मजबूती

महंगाई को काबू में रखने के लिए दालों का उत्पादन बेहद अहम है. मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार दालों की जबरदस्‍त पैदावार होगी. 

  • तूर (अरहर): 34.55 लाख मीट्रिक टन
  • चना: 117.92 लाख मीट्रिक टन
  • मसूर: 17.33 लाख मीट्रिक टन

वैश्विक संकट के बीच क्यों अहम हैं ये आंकड़े?

वर्तमान में ईरान-इजरायल युद्ध और लाल सागर में जारी तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और व्यापार में भारी अनिश्चितता है. ईंधन और खाद (Fertilizer) की बढ़ती कीमतों के बीच भारत में अनाज का यह बंपर उत्पादन एक 'सुरक्षा कवच' की तरह है. यह सुनिश्चित करता है कि दुनिया में कहीं भी युद्ध हो, भारत की जनता को अनाज की कमी नहीं होगी और घरेलू बाजार में कीमतें नियंत्रण में रहेंगी.

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