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मिडिल ईस्ट वॉर + कमजोर मॉनसून की दोहरी मार! क्या खेती के लिए पानी के साथ खाद की कमी भी बढ़ाएगी किसानों का सिरदर्द?

IMD ने दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दौरान कम बारिश का संकेत दिया है, वहीं दूसरी ओर मिडिल ईस्‍ट वॉर ने उर्वरक उत्पादन के लिए जरूरी LNG के सप्‍लाई चेन को हिला कर रख दिया है.

मिडिल ईस्ट वॉर + कमजोर मॉनसून की दोहरी मार! क्या खेती के लिए पानी के साथ खाद की कमी भी बढ़ाएगी किसानों का सिरदर्द?
कमजोर मॉनसून की संभावना के साथ किसानों के लिए एक और चुनौती

भारतीय इकोनॉमी की रीढ़ 'खेती-किसानी' इस साल दो मोर्चे पर चुनौतियों का सामना कर रही है. खेती के लिए जो 2 बेहद जरूरी चीज है- खाद और पानी. ये दोनों ही जरूरतें इस साल प्रभावित हो सकती हैं. आशंका जताई जा रही है कि सिंचाई और खाद, दोनों ही मोर्चे पर किसानों को इस साल दिक्‍कत हो सकती है. एक तरफ भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दौरान कम बारिश का संकेत दिया है, वहीं दूसरी ओर पिछले 45 दिनों से जारी  मिडिल ईस्‍ट वॉर ने उर्वरक उत्पादन के लिए जरूरी लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के सप्‍लाई चेन को हिला कर रख दिया है.

मॉनसून को लेकर आई बुरी खबर

भारत मौसम विभाग (IMD) के पहले लॉन्ग रेंज फोरकास्ट (LRF) के मुताबिक, इस साल जून से सितंबर के बीच लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) की केवल 92 प्रतिशत बारिश होने की संभावना है. आमतौर पर मॉनसून 1 जून को केरल तट पर दस्तक देता है, लेकिन इस बार 'बिलो नॉर्मल' मॉनसून का पूर्वानुमान ऐसे समय आया है जब मध्य-पूर्व एशिया में युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से कार्गो जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है.

उर्वरक आपूर्ति पर संकट के बादल

भारत अपनी जरूरत की लगभग 50 प्रतिशत नेचुरल गैस (LNG) आयात करता है, जिसमें से 40 प्रतिशत हिस्सा अकेले कतर से आता है. ईरान द्वारा कतर के गैस प्लांट्स पर मिसाइल हमलों और समुद्री मार्ग बाधित होने से भारत को होने वाली सप्लाई पर सीधा असर पड़ा है.

  • युद्ध के शुरुआती दौर में यूरिया संयंत्रों को गैस की आपूर्ति 60 प्रतिशत तक गिर गई थी.
  • 11 मार्च, 2026 को जारी नेचुरल गैस सप्लाई रेगुलेशन ऑर्डर (NGSRO) 2026 के तहत उर्वरक क्षेत्र को 'प्राथमिकता सूची' में डाला गया.
  • अप्रैल के पहले हफ्ते तक आपूर्ति बढ़ाकर 90 प्रतिशत की गई, जिसे 9 अप्रैल से बढ़ाकर 95 प्रतिशत कर दिया गया है.

रिपोर्ट के अनुसार, मार्च की शुरुआत में 9-10 लाख मीट्रिक टन (LMT) की कमी थी, जो अब 6-7 लाख मीट्रिक टन (LMT) रह गई है. यूरिया उत्पादन (मार्च 2026) में लगभग 18 लाख टन रहा, जोकि मार्च 2025 में यह 24.78 लाख टन था. वहीं, पी एंड के (P&K) उर्वरक मार्च में 9-10 लाख टन उत्पादन रहा, जो पिछले साल 11.90 लाख टन था. सल्फर की आपूर्ति को लेकर रिफाइनरीज को निर्देश दिया गया है कि वे उर्वरक कंपनियों को पर्याप्त सल्फर मुहैया कराएं.

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खरीफ सीजन 2026: क्या है सरकार का स्टॉक?

सरकार का दावा है कि आने वाले खरीफ सीजन के लिए देश में पर्याप्त भंडार मौजूद है. कुल जरूरत की बात करें तो खरीफ 2026 के लिए 390.54 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की जरूरत आंकी गई है.

अप्रैल के पहले सप्ताह तक 180 लाख मीट्रिक टन ओपनिंग स्टॉक (Opening Stock) के रूप में मौजूद है, जो पिछले साल के मुकाबले 33 प्रतिशत अधिक है.

आयात के वैकल्पिक रास्ते और ग्लोबल टेंडर

चूंकि भारत यूरिया का 20-30% और डाई-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) का 30% खाड़ी देशों से मंगवाता है, इसलिए सरकार ने अब रूस, मोरक्को, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और कनाडा जैसे देशों से आपूर्ति सुनिश्चित की है.

  • नया रूट: रूस से लगभग 28 लाख टन माल केप ऑफ गुड होप (Cape of Good Hope) मार्ग से मंगाया जा रहा है.
  • ग्लोबल टेंडर: संकट को भांपते हुए फरवरी के मध्य तक 13.5 लाख टन यूरिया के लिए ऑर्डर जारी कर दिए गए थे.

कैबिनेट का बड़ा फैसला, बढ़ाई गई सब्सिडी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने खरीफ सीजन 2026 के लिए फॉस्फेटिक एंड पोटेशिक (P&K) उर्वरकों पर न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी (NBS) दरों को मंजूरी दी है. बजटीय आवंटन की बात करें तो इस सीजन के लिए 41,533.81 करोड़ रुपये की सब्सिडी तय की गई है, जो पिछले साल से 4,317 करोड़ रुपये अधिक है.

केंद्र ने राज्यों को सख्त निर्देश दिए हैं कि उर्वरकों की जमाखोरी, कालाबाजारी या डायवर्जन (Diversion) को रोकने के लिए विशेष अभियान चलाएं. देश के 652 जिलों में खाद की बिक्री की कड़ी निगरानी की जा रही है ताकि किसानों को कोई असुविधा न हो.

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