विज्ञापन

RBI की सख्ती के बावजूद NBFC गोल्ड लोन में 70% का रिकॉर्ड उछाल, जानें क्या हैं इसके बड़े कारण

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से नियमों को सख्त किए जाने के बावजूद गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के गोल्ड लोन में जून 2026 तक सालाना आधार पर करीब 70% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है. जानिए खुदरा ऋण (Retail Credit) में सोने के बदले कर्ज की बढ़ती मांग, आरबीआई के 2025 के कड़े दिशा निर्देश और इस अभूतपूर्व उछाल के पीछे के मुख्य कारण.

RBI की सख्ती के बावजूद NBFC गोल्ड लोन में 70% का रिकॉर्ड उछाल, जानें क्या हैं इसके बड़े कारण
आरबीआई की सख्ती के बावजूद एनबीएफसी गोल्ड लोन में 70% का उछाल! जानें क्या हैं इसके बड़े कारण
NDTV

NBFC Gold Loans 2026: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से नियमों में सख्ती और कड़े नियामक ढांचे (Regulatory Framework) को लागू करने के बावजूद देश में गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के गोल्ड लोन यानी सोने के गहनों के बदले कर्ज में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है.

आरबीआई की ओर से जारी ताजा सेक्टोरल क्रेडिट आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 के आखिर तक एनबीएफसी का कुल आउटस्टैंडिंग गोल्ड लोन पोर्टफोलियो सालाना आधार पर 69.3% बढ़कर 3.41 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया. इससे ठीक एक महीने पहले यानी मई 2026 में भी इसमें 69.9% की समान रफ्तार से वृद्धि दर्ज की गई थी.

रिटेल क्रेडिट में गोल्ड लोन की सबसे तेज रफ्तार

आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, एनबीएफसी का कुल रिटेल क्रेडिट पोर्टफोलियो जून 2026 में 20.3% की दर से बढ़कर 25.62 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो जून 2025 में 21.29 लाख करोड़ था, लेकिन खुदरा ऋण के इस पूरे बास्केट में गोल्ड लोन की ग्रोथ ओवरऑल रिटेल क्रेडिट की तुलना में 3 गुना से भी अधिक रही.

खुदरा ऋण  जून 2026 में  कुल कर्ज  सालाना वृद्धि दर      
 गोल्ड लोन3.41 लाख करोड़ रुपये  69.3%
 कंज्यूमर ड्यूरेबल्स लोन  72,201 करोड़ रुपये  46.8%
 व्हीकल लोन  6.24 लाख करोड़  रुपये15.2%
 हाउसिंग लोन 8.44 लाख करोड़ रुपये 11.4%

 
आरबीआई की निगरानी और 2025 के कड़े नियम

\गोल्ड लोन में यह ऐतिहासिक उछाल ऐसे समय में आया है, जब आरबीआई ने इस सेगमेंट में खामियों को देखते हुए कड़े कदम उठाते हुए थर्ड पार्टी एजेंटों की ओर से लोन सोर्सिंग, सोने के मूल्यांकन में ढिलाई, लोन टू वैल्यू रेश्यो की कमजोर निगरानी और नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दों पर चिंता जताई थी. इसके साथ ही आरबीआई ने Lending Against Gold and Silver Collateral Directions, 2025 जारी कर सभी विनियमित संस्थाओं के लिए सख्त गाइडलाइंस अनिवार्य कर दी थीं. इसके अलावा, नियामक जांच और कड़े नियमों के बाद भी लोन पोर्टफोलियो में यह लगातार बढ़त दर्शाती है कि आम जनता और छोटे कारोबारियों में सोने के बदले तत्काल कर्ज लेने की मांग कितनी मजबूत बनी हुई है.

यह भी पढ़ें- कटे-फटे नोटों को बदलने से मना नहीं कर सकता बैंक, इनकार किया तो यहां करें शिकायत 

उद्योग और सेवाओं में नरमी, कृषि ऋण में तेजी

गोल्ड लोन और रिटेल सेगमेंट की मजबूत रफ्तार के विपरीत अर्थव्यवस्था के अन्य प्रमुख क्षेत्रों में कर्ज की रफ्तार धीमी दर्ज की गई है.  बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सुस्त रफ्तार की वजह से औद्योगिक कर्ज की वृद्धि दर गिरकर 6.7% रह गई, जो एक साल पहले 10.3% थी. वहीं, व्यापार और परिवहन संचालकों को मिलने वाले कर्ज की रफ्तार धीमी पड़ने से सर्विसेज क्रेडिट ग्रोथ 17.6% हो गई है, जो एक साल पहले 22.4% थी). हालांकि, कृषि और संबद्ध गतिविधियों के क्षेत्र में शानदार सुधार देखा गया है और इसका क्रेडिट ग्रोथ पिछले साल के 5.1% से बढ़कर 17.9% पर पहुंच गया है. 

यह भी पढ़ें- SIP में निवेश कर बनना चाहते हैं करोड़पति, तो भूल कर भी न करें ये गलतियां

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Gold Loan, NBFC, RBI, Personal Finance, Indian Economy
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com