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IMF ने भारत का GDP ग्रोथ अनुमान बढ़ाया, 6.4% नहीं, अब इस रफ्तार से बढ़ सकती है इंडियन इकोनॉमी 

IMF का मानना है कि भारत मजबूत घरेलू मांग, सेवा क्षेत्र, सुधारों और डेमोग्राफिकल लाभ के चलते आने वाले वर्षों में ग्‍लोबल ग्रोथ का प्रमुख इंजन बना रहेगा.

IMF ने भारत का GDP ग्रोथ अनुमान बढ़ाया, 6.4% नहीं, अब इस रफ्तार से बढ़ सकती है इंडियन इकोनॉमी 
IMF ने माना है कि भारत ने उम्‍मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है.
(NDTV File Photo)


भारत की इकोनॉमी को लेकर IMF ने अपना अनुमान बढ़ा दिया है. IMF के मुताबिक, FY27 यानी वित्त वर्ष 2026-27 में देश की GDP ग्रोथ 7% रह सकती है. इससे पहले भारतीय इकोनॉमी की ग्रोथ के लिए IMF का अनुमान 6.4% था. यानी अपने पुराने अनुमान के मुकाबले IMF ने 0.6 फीसदी की बढ़ोतरी की है. दुनियाभर में चल रही जियो पॉलिटिकल टेंशन के बीच भारत के लिए ये बड़ी खबर है.  

IMF से पहले वर्ल्‍ड बैंक ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए भारत की GDP के लिए ग्रोथ का अनुमान अप्रैल के 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है. वहीं भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अक्टूबर की अपनी मौद्रिक नीति बैठक में वित्त वर्ष 2027 के लिए GDP ग्रोथ के अनुमान को 6.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है. 

ग्रोथ अनुमान में 0.6 फीसदी बढ़ोतरी 

IMF की अक्टूबर 2026 वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (WEO) रिपोर्ट के अनुसार, भारत की आर्थिक ग्रोथ वित्त वर्ष 2027 और वित्त वर्ष 2028 दोनों में 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है. वित्त वर्ष 2027 के लिए यह अनुमान जुलाई 2026 के अपडेट की तुलना में 0.6 प्रतिशत अंक और अप्रैल 2026 के अनुमान से 0.5 प्रतिशत अंक अधिक है. वहीं वित्त वर्ष 2028 के अनुमान में भी जुलाई की तुलना में 0.3 प्रतिशत अंक और अप्रैल की तुलना में 0.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की गई है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2025 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी. कैलेंडर वर्ष के आधार पर IMF ने 2026 में भारत की वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत और 2027 में 7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है.

घरेलू मांग और सर्विस सेक्‍टर में मजबूती 

IMF के अनुसार, यह बेहतर अनुमान मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की मजबूती को दर्शाता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊंची तेल कीमतों के बावजूद भारत की आर्थिक गतिविधियां घरेलू मांग और सेवाओं के दम पर मजबूत बनी हुई हैं.

रिपोर्ट में भारत को अन्य कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं से अलग बताते हुए कहा गया है कि जहां मध्य पूर्व संघर्ष और ऊर्जा कीमतों में वृद्धि के कारण कई देशों के आउटलुक में कटौती की गई है, वहीं भारत के अनुमान को बढ़ाया गया है. IMF ने इसके पीछे अनुकूल जनसांख्यिकीय संरचना, बड़ा और विस्तार करता घरेलू बाजार तथा लगातार जारी संरचनात्मक सुधारों को प्रमुख कारण बताया है.

महंगाई बड़ी चिंता पर धीरे-धीरे कम होगी 

IMF का अनुमान है कि भारत में उपभोक्ता मूल्य महंगाई (CPI) 2026 में 5 प्रतिशत रह सकती है, जो 2025 में 2 प्रतिशत थी. इसके बाद 2027 में महंगाई घटकर 4.4 प्रतिशत रहने की संभावना है.

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का चालू खाता घाटा (करंट अकाउंट डेफिसिट) 2026 में जीडीपी के 1.5 प्रतिशत और 2027 में 1.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि 2025 में यह 0.7 प्रतिशत था.

भारत कई मामलों में बेहतर 

पब्लिक फाइनेंस के मोर्चे पर IMF ने भारत को अलग स्थान दिया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि महामारी के बाद अधिकांश विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को ऋण-से-जीडीपी अनुपात स्थिर रखने के लिए अधिक राजकोषीय सख्ती की जरूरत होगी, जबकि भारत इस मामले में अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में है.

व्यापार के क्षेत्र में IMF ने भारत के हालिया समझौतों का भी उल्लेख किया. रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय संघ (ईयू) और ब्रिटेन के साथ हुए व्यापार समझौते टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने, आपूर्ति शृंखला को मजबूत बनाने और व्यापार को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं.

वैश्विक परिदृश्य की बात करें तो IMF ने 2026 में वैश्विक वृद्धि दर 3.1 प्रतिशत और 2027 में 3.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है. उभरते और विकासशील एशिया की वृद्धि दर 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है.

चीन, अमेरिका की ग्रोथ कम होगी 

रिपोर्ट के अनुसार, चीन की वृद्धि दर 2025 के 5 प्रतिशत से घटकर 2026 में 4.5 प्रतिशत और 2027 में 4 प्रतिशत रह सकती है. वहीं अमेरिका की अर्थव्यवस्था 2026 और 2027 दोनों वर्षों में 2.3 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है.

इसके साथ ही, IMF ने चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व में संघर्ष लंबा खिंचने या और बढ़ने की स्थिति में ऊर्जा और खाद्य कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं, जिससे वैश्विक महंगाई, राजकोषीय संतुलन और आर्थिक वृद्धि पर दबाव पड़ सकता है.

UN को भी भारतीय इकोनॉमी पर भरोसा 

संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भी भरोसा जताया है कि भारतीय इकोनॉमी तेज रफ्तार से ग्रोथ करेगी. UN की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की GDP ग्रोथ दर 7.3% रहने का अनुमान है. वहीं, वित्त वर्ष 2027-28 में इंडियन इकोनॉम की रफ्तार 6.8% रह सकती है.  

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इस तेज ग्रोथ की वजह घरेलू मांग में मजबूती, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में बढ़ोतरी और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर सरकार के खर्च को बताया गया है. हालांकि, भारत की कच्चे तेल के आयात पर भारी निर्भरता अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई है. व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (UNCTAD) की रिपोर्ट Trade and Development Report 2026: The Geoeconomics of Development में ये अनुमान बताए गए थे. 

रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू खपत भारतीय इकोनामी की ग्रोथ में अहम भूमिका निभा रही है. भारत में घरेलू खपत इस साल 6.9% और अगले साल 5.6% बढ़ने का अनुमान है. यानी भारतीय खुल कर खर्च कर रहे हैं, जिसका फायदा इकोनॉमी को मिल रहा है. 

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