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देश की GDP ग्रोथ तेज होने का अनुमान पर महंगाई ने बढ़ाया सिरदर्द, RBI गवर्नर ने चीनी को भी ठहराया जिम्‍मेदार

देश की GDP ग्रोथ को लेकर RBI ने जो अनुमान लगाया है, वो खुश कर देने वाला है, लेकिन महंगाई के मोर्चे पर देशवासियों को झटका लग सकता है. आगे महंगाई बढ़ने वाली है. गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने वजह भी बताई है.

देश की GDP ग्रोथ तेज होने का अनुमान पर महंगाई ने बढ़ाया सिरदर्द, RBI गवर्नर ने चीनी को भी ठहराया जिम्‍मेदार
RBI MPC Meeting: गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने बताया देश में क्‍यो बढ़ने वाली है महंगाई

देश में महंगाई और बढ़ने वाली है. RBI MPC की 3 दिन तक चली मीटिंग के बाद बुधवार को गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने देश की आर्थिक स्थिति को लेकर बड़े आंकड़े जारी किए. RBI के मुताबिक, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी घरेलू आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं. GDP ग्रोथ के मोर्चे पर अच्‍छी खबर ये है कि FY 2027 में देश की ग्रोथ 7.1 फीसदी रह सकती है. हालांकि महंगाई के मोर्चे पर आम लोगों को झटका लग सकता है. गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने बताया कि देश में महंगाई बढ़ सकती है.

GDP ग्रोथ पर RBI का अनुमान

वित्त वर्ष 2027 के लिए रियल जीडीपी ग्रोथ (Real GDP Growth) 7.1% रहने का अनुमान जताया गया है, जो पहले 6.7% आंकी गई थी. वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही (Q1 FY28) में भी जीडीपी विकास दर 7.1% पर बने रहने की संभावना है.

आरबीआई के अनुसार, ग्रोथ रेट चालू वित्त वर्ष की 

  • दूसरी तिमाही (Q2) में  7.2 प्रतिशत
  • तीसरी तिमाही (Q3) में 6.9 प्रतिशत
  • चौथी तिमाही (Q4) में 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है. 

 गवर्नर ने कहा कि घरेलू आर्थिक गतिविधियां वैश्विक चुनौतियों के बीच भी लचीली बनी हुई हैं. उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत ने 7.8 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर्ज की, जो मजबूत घरेलू मांग और निवेश गतिविधियों का परिणाम है.

महंगाई मोर्चे पर क्या है स्थिति?

एक तरफ जहां जीडीपी के आंकड़े उत्साहजनक हैं, वहीं महंगाई (CPI Inflation) चिंता का विषय बनी हुई है. अगस्त महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.8% हो गई, जो जुलाई में 4.5% थी. पूरे वित्त वर्ष के लिए CPI महंगाई 5.2% रहने का अनुमान है. तिमाही आधार पर Q2 में 4.9%, Q3 में 6% और Q4 में 5.7% रहने की संभावना है.

CPI महंगाई का अनुमान 

  • दूसरी तिमाही में 4.9 प्रतिशत
  • तीसरी तिमाही में 6 प्रतिशत 
  • चौथी तिमाही में 5.7 प्रतिशत

अगस्त में मुख्य रूप से अनफेवरेबल बेस इफेक्‍ट्स (अनुकूल आधार प्रभाव), चीनी और प्याज जैसी चुनिंदा वस्तुओं के दाम बढ़ने और खाद्य-ईंधन की कीमतों में तेजी के कारण महंगाई बढ़ी है.

मैन्युफैक्चरिंग और भविष्य की चुनौतियां

दूसरी तिमाही (Q2) में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज दोनों के पीएमआई (PMI) आंकड़े विस्तार क्षेत्र (expansionary zone) में बने हुए हैं, हालांकि पहली तिमाही के मुकाबले रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है. गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि हालांकि सप्लाई-साइड के दबाव सीमित हैं, लेकिन ऊर्जा और अन्य इनपुट लागतों पर पड़ने वाले प्रभावों के दूसरे दौर के असर (second-round effects) को अलग करना मुश्किल है, जिस पर आरबीआई की पैनी नजर है.

गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि मैन्‍युफैक्‍चरिंग और सर्विस सेक्‍टर, दोनों में कारोबारी गतिविधियां विस्तार की राह पर हैं. दूसरी तिमाही के दौरान मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज पीएमआई वृद्धि क्षेत्र में बने रहे, हालांकि उनकी गति पिछली तिमाही की तुलना में कुछ धीमी हुई है.

चीन, प्‍याज, पेट्रोल-डीजल ने बढ़ाई महंगाई 

महंगाई के मोर्चे पर आरबीआई ने चिंता जताई है. गवर्नर ने कहा कि खाद्य महंगाई का दबाव अब व्यापक रूप लेता जा रहा है और चीनी, प्याज जैसी वस्तुओं की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है. अगस्त में खाद्य और ईंधन महंगाई दोनों में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसका एक कारण आधार प्रभाव (बेस इफेक्ट) भी रहा.

उन्होंने कहा कि आरबीआई महंगाई के रुझानों का आकलन करने के लिए महंगाई अपेक्षाओं, कंपनियों के मूल्य निर्धारण व्यवहार, कोर इन्फ्लेशन और विभिन्न आर्थिक संकेतकों पर लगातार नजर रख रहा है.

वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए गवर्नर ने कहा कि दुनिया भर में महंगाई दबाव बढ़ने की आशंका है, जिसके कारण प्रमुख केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति को और सख्त बना रहे हैं. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने कच्चे तेल के दाम भी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित कर रहे हैं.

आरबीआई का मानना है कि घरेलू मांग, निवेश गतिविधियां, सेवा क्षेत्र की मजबूती और विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार भारतीय अर्थव्यवस्था को समर्थन देते रहेंगे. हालांकि महंगाई, ऊर्जा कीमतों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर लगातार निगरानी बनाए रखना आवश्यक होगा.

भारत का व्यापार घाटा जुलाई और अगस्त में बढ़कर 58.7 अरब डॉलर हो गया, जबकि पिछले साल इन्हीं दो महीनों में यह 55.1 अरब डॉलर था.

आरबीआई प्रमुख मल्होत्रा ​​ने एमपीसी के बयान में कहा, "यह मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक सामान और कच्चे तेल के आयात के कारण हुआ है. आगे चलकर, वैश्विक व्यापार वृद्धि में नरमी, ऊर्जा की ऊंची कीमतें और व्यापार नीति में बनी अनिश्चितताएं इस साल भारत के चालू खाता घाटे के लिए जोखिम पैदा करती हैं."

आरबीआई गवर्नर मल्होत्रा ​​ने कहा कि इस वित्तीय वर्ष के पहले चार महीनों में शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में पिछले वर्ष के 9.6 बिलियन डॉलर की तुलना में लगातार सुधार दर्ज किया गया और यह 13.8 अरब डॉलर रहा.

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