Monetary Policy Today News: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की महत्वपूर्ण बैठक शुरू हो चुकी है. सुबह 10 बजे मौद्रिक नीति पर लिए गए फैसले की घोषणा की जाएगी. इसके बाद ही ये साफ हो पाएगी कि आपके लोन की ईएमआई बढ़ेगी, घटेगी या फिर स्थिर रहेगी.
हालांकि, ज्यादातर बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अगुवाई वाली समिति फिलहाल रेपो रेट को 5.25% पर यथावत (Status Quo) रखेगी. देश में महंगाई के बढ़ते दबाव और कमजोर मानसून के जोखिमों को देखते हुए कुछ अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर से 100 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में पहुंचती हैं, तो अक्टूबर 2026 में आरबीआई रेपो रेट में 0.25% यानी 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर सकता है.
कच्चे तेल में उछाल और खुदरा महंगाई का दिखेगा असर
बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) और केयर एज (Care Edge) के अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में दरें बढ़ाने की संभावना काफी प्रबल हो गई है. उनके मुताबिक जून के महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.38% पर पहुंच गई, जो 17 महीनों में पहली बार आरबीआई के 4% के मध्यम अवधि के लक्ष्य को पार कर गई है. 17 जून के बाद से 31 जुलाई 2026 के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम करीब 11% तक चढ़ चुके हैं. इसी दौरान विदेशी निवेशकों की बिकवाली (FII Outflows) की वजह से भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले फिसलकर 95.34 के स्तर पर आ गया है, जबकि अमेरिका 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में भी 16 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
जून नीति समीक्षा की स्थिति
इससे पहले 5 जून को हुई नीति समीक्षा बैठक में आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखते हुए वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान को 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया था और महंगाई अनुमान को 4.6% से बढ़ाकर 5.1% किया था.
अक्टूबर से बढ़ सकती है आपकी बैंक EMI
रॉयटर्स के पोल में शामिल 72 में से 68 अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि अगस्त की बैठक में रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रहेगा, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि आरबीआई इस बार अपनी कमेंट्री में सख्त रुख अपना सकता है. अगर महंगाई दर केंद्रीय बैंक के सहनीय स्तर से ऊपर बनी रहती है, तो आरबीआई बाजारों को स्पष्ट संदेश दे सकता है कि आने वाले महीनों में दरें बढ़ाई जा सकती हैं. अगर कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है और खाद्य महंगाई पर मानसून की अनिश्चितता का असर पड़ता है, तो अक्टूबर की बैठक में रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% किया जा सकता है. रेपो रेट में बढ़ोतरी होते ही बैंकों की ओर से MCLR और EBLR दरों में इजाफा किया जाएगा, जिससे आपके होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की मंथली ईएमआई (EMI) महंगी हो जाएगी.
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वैश्विक बाजार और अमेरिकी फेड का रुख
वैश्विक मोर्चे पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने हाल ही में अपनी ब्याज दरों को 3.50% 3.70% के दायरे में स्थिर रखा है. फेड चेयरमैन केविन वॉर्स ने महंगाई को नियंत्रित करने की प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन फिलहाल तुरंत दरों में और बढ़ोतरी के संकेत नहीं दिए हैं. अमेरिकी फेड के इस रुख से भारतीय रिजर्व बैंक को भी घरेलू परिस्थितियों के अनुसार फैसला लेने की राहत मिली है. विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई अपनी भविष्य की मौद्रिक नीति का फैसला पूरी तरह से आंकड़ों और वैश्विक परिस्थितियों के आधार पर ही करेगा.
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