हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस लेने वालों के लिए पिछले कुछ महीनों से एक ही सवाल था कि 18 प्रतिशत GST हटने के बाद क्या सच में प्रीमियम सस्ता हुआ या नहीं. अब सरकार ने संसद में साफ शब्दों में कहा है कि GST छूट का फायदा सीधे ग्राहकों को मिला है और प्रीमियम में 18 प्रतिशत टैक्स का बोझ हट गया है.
लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी और हेल्थ पॉलिसी पर GST छूट
राज्यसभा में बजट सत्र के दौरान लिखित जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि सितंबर 2025 में GST काउंसिल ने सभी इंडिविजुअल लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी और हेल्थ पॉलिसी, जिसमें फैमिली फ्लोटर भी शामिल है, पर GST छूट की सिफारिश की थी. इसके बाद 18 प्रतिशत टैक्स खत्म कर दिया गया.
18 प्रतिशत टैक्स हटने के बाद क्या बढ़ी थी कीमत?
जब सितंबर 2025 में यह फैसला लिया गया, तब बाजार में चर्चा शुरू हो गई थी कि कंपनियां अब अपने कुछ खर्च जैसे कमीशन और ऑफिस किराया को GST के जरिए एडजस्ट नहीं कर पाएंगी. इससे डर था कि बेस प्रीमियम 1 से 4 प्रतिशत तक बढ़ सकता है. कुछ ब्रोकरेज फर्म ने भी ऐसा अनुमान लगाया था.
लेकिन सरकार ने संसद में साफ किया कि ऐसा नहीं हुआ. इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI नई पॉलिसी और रिन्यूअल दोनों के प्रीमियम पर नजर रखे हुए है ताकि कंपनियां GST छूट का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाएं.
IRDAI की सख्त निगरानी
सरकार ने बताया कि IRDAI इंश्योरेंस कंपनियों से लगातार जानकारी मांग रहा है कि कहीं GST हटने के बाद प्रीमियम बढ़ाया तो नहीं गया. इस साल की शुरुआत में सभी जनरल और हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों ने पुष्टि की कि प्रीमियम में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई और GST का पूरा फायदा पॉलिसी होल्डर को दिया गया.
वित्तीय सेवा विभाग ने भी IRDAI के अधिकारियों, सरकारी बीमा कंपनियों के चेयरमैन, निजी कंपनियों के CEO और लाइफ - जनरल इंश्योरेंस काउंसिल के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की. इन बैठकों का मकसद यही था कि ग्राहकों को मिलने वाली राहत सच में उन तक पहुंचे.
आम परिवार के इंश्योरेंस प्रीमियम में भारी बचत
अगर आप अपने परिवार के लिए हेल्थ या लाइफ इंश्योरेंस लेते हैं तो 18 प्रतिशत टैक्स हटने का सीधा असर आपकी जेब पर पड़ता है. पहले जिस प्रीमियम पर GST जुड़ता था, अब वह टैक्स नहीं लगेगा. इसका मतलब है कि कुल भुगतान कम होगा और लंबी अवधि में अच्छी बचत हो सकती है.सरकार का कहना है कि यह कदम ज्यादा से ज्यादा लोगों को बीमा कवर लेने के लिए प्रेरित करेगा. भारत में अभी भी बहुत से परिवार ऐसे हैं जिनके पास हेल्थ या लाइफ कवर नहीं है. ऐसे में प्रीमियम कम होना एक बड़ी राहत माना जा रहा है.
मेडिकल और एजुकेशनल किताबों पर GST का क्या है नियम
इसी दौरान लोकसभा में मेडिकल और एजुकेशनल किताबों पर GST को लेकर भी सवाल पूछा गया. सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि क्या सरकार को पता है कि मेडिकल और एजुकेशनल किताबों पर GST लगने से छात्रों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है.
इस पर सरकार ने जवाब दिया कि GST दर और छूट का फैसला GST काउंसिल करती है, जिसमें राज्य और केंद्र दोनों के प्रतिनिधि होते हैं. फिलहाल छपी हुई किताबें, जिसमें ब्रेल किताबें भी शामिल हैं, GST से मुक्त हैं. यानी छात्रों को प्रिंटेड किताबों पर GST नहीं देना पड़ता.
अगर आप नई पॉलिसी लेने की सोच रहे हैं या पुरानी पॉलिसी का रिन्यूअल करने वाले हैं, तो यह समय आपके लिए फायदेमंद हो सकता है. यह खबर सीधे आपकी जेब और आपके परिवार की सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए इंश्योरेंस लेते समय अब प्रीमियम ब्रेकअप जरूर देखें और समझें कि आपको GST छूट का पूरा फायदा मिल रहा है या नहीं.
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