ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग का असर अब सिर्फ मिसाइलों और धमाकों तक सीमित नहीं है. इसका एक ऐसा असर होने जा रहा है जो पूरी दुनिया के कारोबार को हिलाकर रख देगा. दरअसल, ग्लोबल इंश्योरेंस मार्केट एक ऐसे संकट की ओर बढ़ रहा है, जिससे आने वाले दिनों में हर चीज का इंश्योरेंस प्रीमियम आसमान छू सकता है.
शिप कैप्टन और US मर्चेंट मरीन के जॉन ए कोनराड वी (John A Konrad V) ने ईरान युद्ध के बीच ग्लोबल इंश्योरेंस मार्केट (Global insurance Market) को लेकर एक बड़ी चेतावनी दी है. उनका कहना है कि इस युद्ध की वजह से दुनिया एक बड़े आर्थिक संकट की ओर बढ़ रही है.
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लंदन दुनिया के इंश्योरेंस मार्केट का रिमोट कंट्रोल
बहुत कम लोग जानते हैं कि लंदन सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के इंश्योरेंस मार्केट का सेंटर है. 'लॉयड ऑफ लंदन' (Lloyd's) जैसी कंपनियां दुनिया के लगभग 40% समुद्री व्यापार का इंश्योरेंस करती हैं. चाहे कोई जहाज डूबे, पोर्ट पर बमबारी हो या सप्लाई चेन रुके, उसका बिल आखिर में लंदन ही पहुंचता है. असल में, बिना इंश्योरेंस के न तो कोई बड़ी फैक्ट्री चल सकती है और न ही कोई कंपनी बाजार से पैसा जुटा सकती है. इसलिए, अगर लंदन के मार्के में हलचल होती है, तो उसका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है.
इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ने की असली वजह
इंश्योरेंस की कीमतें इस बात पर तय होती हैं कि रिस्क कितना है. लंदन के पास दुनिया की सबसे बेहतरीन इंटेलिजेंस यानी खुफिया जानकारी होती है, जो उसे सही दाम तय करने में मदद करती है. माना जाता है कि ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी MI6 और अमेरिकी एजेंसियों से मिलने वाला डेटा लॉयड को यह बताता है कि खतरा कहां और कितना है.
लेकिन हालिया खबरों के मुताबिक, अमेरिका और ब्रिटेन के बीच जानकारी साझा करने का यह रास्ता (Intelligence Pipeline) कुछ कमजोर पड़ा है. जब इंश्योरेंस कंपनियों को खतरे का सटीक अंदाजा नहीं होता, तो वे सुरक्षित रहने के लिए प्रीमियम की दरें कई गुना बढ़ा देती हैं.
क्यों कैंसिल हो रहे हैं पुराने इंश्योरेंस?
आमतौर पर युद्ध के समय कंपनियां प्रीमियम बढ़ाती हैं, लेकिन इस बार कई जगह इंश्योरेंस कवर पूरी तरह कैंसिल किया जा रहा है. यह एक बहुत बड़ा संकेत है. इसका मतलब है कि खतरा इतना गहरा और अनिश्चित है कि कंपनियां उसकी कीमत भी तय नहीं कर पा रही हैं. जब जहाज या सामान का इंश्योरेंस कैंसिल होता है या बहुत महंगा हो जाता है, तो कंपनियां उस रास्ते से ट्रेड करना बंद कर देती हैं या सामान की कीमतें बढ़ा देती हैं.
ग्लोबल मार्केट पर असर
यह सिर्फ जहाजों तक सीमित नहीं है. दुनिया की ज्यादातर इंश्योरेंस कंपनियां लंदन के रेट्स को ही आधार मानकर अपनी कीमतें तय करती हैं. अगर लंदन में रेट बढ़ते हैं, तो टोक्यो से लेकर अर्जेंटीना और भारत तक हर जगह फैक्ट्रियों, गगनचुंबी इमारतों और सप्लाई चेन का इंश्योरेंस महंगा हो जाएगा.
जानकारों का मानना है कि यह 2008 की आर्थिक मंदी या कोविड जैसे संकट की शुरुआत हो सकती है, जहां अनिश्चितता के कारण पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ सकती है.
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