GST रिफॉर्म को लेकर पिछले दिनों हुई काउंसिल की 57वीं बैठक में लिए गए फैसलों को लागू कराने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया है. वित्त मंत्रालय ने अब अधिकारियों की अलग-अलग कमेटियों की जगह एक स्टैंडिंग कमेटी बनाने का फैसला किया गया है. सरकार ने राज्यों से तकनीक के इस्तेमाल के जरिए ज्यादा से ज्यादा कारोबारियों को GST के दायरे में लाने को कहा है. वहीं, 1 अप्रैल से B2C लेनदेन में ई-इनवॉइसिंग की व्यवस्था शुरू करने की दिशा में भी पहल हो सकती है.
GST व्यवस्था में रेट से जुड़े बदलावों के बाद अब सरकार का जोर नए सिस्टम को स्थिर करने और ज्यादा से ज्यादा कारोबारियों को टैक्स के दायरे में लाने पर है. हाल में हुई बैठक के बाद मंत्रालय के अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, GST सिस्टम में अधिकारियों की मौजूदा अलग-अलग कमेटियों को खत्म कर एक स्टैंडिंग कमेटी बनाने का फैसला किया गया है. इसके अलावा, राज्यों को टैक्स बेस बढ़ाने पर ध्यान देने को कहा गया है.
सरकार का मानना है कि GST दरों में बदलाव और प्रक्रिया से जुड़े सुधारों के बाद इकोनॉमी में कंजप्शन यानी खपत बढ़ने की उम्मीद है. अब इन सुधारों को जमीन पर लागू करने और GST व्यवस्था को स्थिर करने पर ध्यान दिया जाएगा.
GST में अब सिर्फ एक स्टैंडिंग कमेटी
GST सिस्टम में अभी लॉ कमेटी और फिटमेंट कमेटी जैसी अधिकारियों की अलग-अलग समितियां काम करती हैं. अब इन सभी मौजूदा कमेटियों को खत्म करने का फैसला किया गया है. इनकी जगह एक स्टैंडिंग कमेटी बनाई जाएगी, जिसे GST काउंसिल के फैसलों को लागू कराने की जिम्मेदारी दी जाएगी.
इस कमेटी में 12 राज्यों के अधिकारियों को रोटेशन के आधार पर प्रतिनिधित्व मिलेगा. एक समय में इसमें पांच बड़े राज्यों, चार मध्यम श्रेणी के राज्यों और तीन छोटे राज्यों के अधिकारी शामिल होंगे.
इस बदलाव का मकसद GST से जुड़े फैसलों को लागू करने की प्रक्रिया में बेहतर तालमेल बनाना है.
राज्यों से कहा- GST का टैक्स बेस बढ़ाइए
GST दरों और प्रक्रियाओं में सुधार के बाद अब वित्त मंत्रालय ने राज्यों से टैक्स बेस बढ़ाने पर ध्यान देने को कहा है. इसका मतलब है कि ज्यादा से ज्यादा कारोबारियों और संस्थाओं को GST व्यवस्था से जोड़ा जाए.
सरकार ने इसके लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने पर जोर दिया है. हालांकि, टैक्स बेस बढ़ाने के नाम पर सख्ती यानी केवल प्रवर्तन कार्रवाई के जरिए कारोबारियों को टैक्स के दायरे में लाने पर जोर नहीं देने की बात कही गई है.
इसका फोकस ऐसे कारोबारियों और संस्थाओं तक पहुंच बनाने पर है, जो अभी GST व्यवस्था से बाहर हैं. ज्यादा कारोबारियों के जुड़ने से टैक्स अनुपालन का दायरा बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
1 अप्रैल से B2C ई-इनवॉइसिंग की दिशा में पहल
GST प्रक्रिया में एक और अहम बदलाव B2C लेनदेन में ई-इनवॉइसिंग से जुड़ा है. सरकार सभी राज्यों में 1 अप्रैल से B2C ई-इनवॉइसिंग व्यवस्था शुरू करने की दिशा में पहल कर सकती है.
इसके लिए केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) को 1 अप्रैल तक जरूरी सिस्टम तैयार करने को कहा गया है. हालांकि, B2C में ई-इनवॉइसिंग मैंडेटरी नहीं होगी.
सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, GST काउंसिल में लिए गए सभी फैसलों को 1 अप्रैल से लागू किया जाएगा. ऐसे में अब ध्यान फैसलों की घोषणा से आगे बढ़कर उन्हें लागू करने की तैयारी पर है. GST दरों के सिंप्लिफिकेशन और प्रक्रिया से जुड़े सुधारों के बाद सरकार नए सिस्टम को स्थिर करना चाहती है. साथ ही उम्मीद है कि इन बदलावों से अर्थव्यवस्था में खपत बढ़ेगी.
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