राजधानी दिल्ली में गुरुवार को हुई GST काउंसिल की 57वीं मीटिंग में कई बड़े फैसले लिए गए हैं, जिनसे कारोबारियों, टैक्सपेयर्स को फायदे होंगे. ये फायदा आम लोगों तक भी पहुंचेगा. मीटिंग में GST अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति खत्म करने से लेकर 10,000 रुपये से कम की मांग पर नोटिस नहीं देने तक, कई नियम आसान किए गए हैं.
वहीं कर्मचारी हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस, टेलीकॉम टावर, पाइपलाइन, फ्री सैंपल और एक्सपायर्ड स्टॉक पर ITC का रास्ता साफ हुआ है. छोटे कारोबारियों के लिए रिटर्न, रजिस्ट्रेशन और रिफंड की प्रक्रिया भी आसान होगी. हालांकि, इस बैठक में GST की दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है.
GST काउंसिल मीटिंग के बड़े फैसले
1. GST 2.0 के एक साल का असर
- GST की टैक्सेबल सप्लाई 40.19 लाख करोड़ रुपये महीने से बढ़कर 50.58 लाख करोड़ रुपये हो गई.
- यानी इसमें 25.8% की बढ़ोतरी हुई.
- FY 2025-26 में टैक्सेबल सप्लाई की ग्रोथ 25% से ज्यादा रही, जबकि FY 2024-25 में ये 13% थी.
- ग्राहकों को की गई सप्लाई 5.98 लाख करोड़ रुपये महीने से बढ़कर 7.58 लाख करोड़ रुपये हो गई.
- ग्रॉस टैक्स देनदारी 5.85 लाख करोड़ से बढ़कर 6.64 लाख करोड़ रुपये महीने हुई.
- घरेलू सप्लाई पर प्रभावी GST दर 14.55% से घटकर 13.13% रह गई.
- FY 2026-27 में GST राजस्व 11% बढ़ा है.
2. अब GST में दरों से ज्यादा प्रक्रिया सुधार पर फोकस
- GST की दरों का ढांचा तय हो चुका है, इसलिए अब रोजमर्रा की प्रक्रिया आसान करने पर जोर.
- रजिस्ट्रेशन, रिटर्न, रिफंड और ITC को ज्यादा आसान और ऑटोमेटेड बनाया जाएगा.
- सिस्टम अब विक्रेता और खरीदार के इनवॉयस का मिलान करता है.
- इससे फर्जी ITC को शुरुआती स्तर पर पकड़ने में मदद मिलेगी.

3. GST रजिस्ट्रेशन होगा और आसान
- कम जोखिम वाले कारोबारियों का रजिस्ट्रेशन 3 कामकाजी दिनों में बिना अधिकारी के हस्तक्षेप के हो रहा है.
- अभी 61% रजिस्ट्रेशन इसी ऑटोमेटेड तरीके से हो रहे हैं.
- रजिस्ट्रेशन फॉर्म अब कारोबारी को सिर्फ वही जानकारी मांगेगा, जो उसके लिए जरूरी है.
- नवंबर 2025 से सितंबर 2026 के बीच रजिस्ट्रेशन में बदलाव के 16.73 लाख आवेदन आए.
- इनमें 65.45% आवेदन नाम, डायरेक्टर/पार्टनर या अतिरिक्त कारोबार स्थल के पते से जुड़े थे. इन्हें भी ऑटोमेटिक मंजूरी मिलेगी.
4. रिटर्न में छोटी गलतियों पर राहत
- हर साल करीब 95 हजार सिस्टम जनरेटेड नोटिस रिटर्न में अंतर को लेकर जारी होते हैं.
- इनमें रिकवरी सिर्फ करीब 0.08% रकम की होती है.
- विक्रेता अपनी पहले बताई गई बिक्री में कमी को सीधे सेल्स स्टेटमेंट में सुधार सकेगा.
- खरीदार का गलत GST नंबर दर्ज होने पर उसे भी सुधारा जा सकेगा.
- ITC का हिसाब इनवॉयस मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए होगा.
5. रिफंड जल्दी और ज्यादा ऑटोमेटेड
- रिफंड आवेदन की स्वीकृति की समय सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन होगी.
- 10 दिन में स्वीकृति या कमी का मेमो नहीं आया तो आवेदन स्वीकृत माना जाएगा.
- जोखिम के आधार पर 90% रिफंड सिस्टम खुद मंजूर करेगा.
- मंजूरी के बाद 3 कामकाजी दिनों में आदेश जारी होगा.
- कैश लेजर में पड़े अतिरिक्त बैलेंस का रिफंड पूरी तरह ऑटोमेटिक होगा.
6. 10,000 रुपये से कम की मांग पर नोटिस नहीं
- 10,000 रुपये से कम की रकम पर GST नोटिस जारी नहीं होगा.
- नोटिस जारी करने और सुनवाई की प्रक्रिया के लिए एक समान नियम बनाए जाएंगे.
7. ईमानदार खरीदार के ITC पर बड़ा कदम
- ऐसे खरीदारों को सुरक्षा देने के लिए अधिकारियों की एक कमेटी बनेगी, जिन्होंने:
- सही इनवॉयस लिया है,
- सामान प्राप्त किया है,
- सप्लायर को पूरा भुगतान किया है.
- कमेटी 3 महीने में रिपोर्ट देगी.
- इसके बाद अगली GST Council बैठक में प्रस्ताव लाया जाएगा.
8. कर्मचारी बीमा पर ITC
- कर्मचारियों के लिए लिए गए हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर ITC मिलेगा.
9. टेलीकॉम और पाइपलाइन सेक्टर को राहत
- टेलीकॉम टावर पर ITC मिलेगा.
- फैक्ट्री के बाहर बिछाई गई पाइपलाइन पर भी ITC उपलब्ध होगा.
10. फ्री सैंपल और एक्सपायर्ड सामान पर ITC
- कंपनियों को दिए गए फ्री सैंपल पर ITC मिलेगा.
- शेल्फ लाइफ खत्म होने के बाद कानून के तहत नष्ट किए जाने वाले सामान पर भी ITC मिलेगा.
- इससे खासकर फार्मा और FMCG सेक्टर को फायदा होगा.
11. एक ही सेवा पर दो बार टैक्स नहीं
- एक ही कारोबार की कड़ी में सेवा खरीदकर आगे बेचने पर टैक्स दो बार नहीं लगेगा.
- होटल में 7,500 रुपये तक का कमरा, रेस्टोरेंट/कैटरिंग और यात्री परिवहन जैसी सेवाओं को इसका फायदा मिलेगा.
- इन सेवाओं की टैक्स चेन में ITC का रास्ता साफ होगा.
12. इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर में रिफंड का दायरा बढ़ा
- अब सिर्फ सामान ही नहीं, इनपुट सर्विस पर चुकाए GST का भी रिफंड मिल सकेगा.
- ये सुविधा 1 नवंबर 2026 या उसके बाद लिए गए ITC पर लागू होगी.
- प्लांट और मशीनरी पर चुकाए टैक्स को भी रिफंड के दायरे में लाया जाएगा.
- ये सुविधा 1 अप्रैल 2027 या उसके बाद लिए गए ITC पर लागू होगी.
- इससे नई मैन्युफैक्चरिंग लाइन लगाने वाली कंपनियों का पैसा ITC में फंसा नहीं रहेगा.
13. कारोबार बंद करना आसान होगा
- GST रजिस्ट्रेशन रद्द करने की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से ऑटोमेटिक होगी.
- छोटे टैक्सपेयर्स से इसकी शुरुआत होगी.
- फाइनल रिटर्न को क्लोजर आवेदन का ही हिस्सा बनाया जाएगा.
- रिटर्न या बैंक डिटेल नहीं देने पर निलंबित रजिस्ट्रेशन में सुधार के बाद सिस्टम उसे बहाल कर सकेगा.
14. छोटे कारोबारियों के लिए साल में एक बार रिटर्न
- 5 करोड़ रुपये तक टर्नओवर और सिर्फ उपभोक्ताओं को सामान बेचने वाले कारोबारियों के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था को मंजूरी दी गई है.
- इसमें साल में एक बार रिटर्न और हर तिमाही टैक्स भुगतान का विकल्प होगा.
- विस्तृत नियम अगली GST Council बैठक में आएंगे.
15. रास्ते में माल की जांच कम होगी
- किसी वाहन को रोकने के लिए विशेष खुफिया जानकारी जरूरी होगी.
- रोकने की मंजूरी कम से कम ज्वाइंट कमिश्नर स्तर के अधिकारी से पहले लेनी होगी.
- रास्ते में पड़ने वाले हर राज्य को माल रोककर जांचने का अधिकार नहीं होगा.
- मुख्य रूप से माल भेजने वाले राज्य और मंजिल वाले राज्य में जांच होगी.
- यानी पांच राज्यों से गुजरने वाले ट्रक को हर राज्य में जांच का सामना नहीं करना पड़ेगा.
16. GST में गिरफ्तारी की शक्ति खत्म
- GST अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति हटाई जा रही है.
- अभियोजन की सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये की जाएगी.
- न्यूनतम सजा का प्रावधान हटाया जाएगा.
- सजा का फैसला न्यायिक विवेक पर होगा.
- सामान्य जुर्माने की अधिकतम सीमा 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये की जाएगी.
17. सर्विस एक्सपोर्ट को बढ़ावा
- भारतीय कंपनी अपनी विदेश स्थित शाखा के जरिए विदेशी ग्राहक को सेवा देती है तो उसे एक्सपोर्ट बेनिफिट मिलेगा.
- भारत में विदेशी ग्राहक के सामान की टेस्टिंग, रिपेयर, सर्टिफिकेशन, रिसर्च या प्रोसेसिंग भी सर्विस एक्सपोर्ट मानी जाएगी, भले सामान भारत से बाहर न जाए.
- एक्सपोर्ट पेमेंट के लिए RBI के नियमों के आधार पर एक समान व्यवस्था होगी.
18. ई-कॉमर्स पर छोटे विक्रेताओं को राहत
- छोटे विक्रेता दूसरे राज्य में ई-कॉमर्स कंपनी के वेयरहाउस को अपना प्रमुख कारोबार स्थल घोषित कर सकेंगे.
- इसके लिए ई-कॉमर्स ऑपरेटर की सहमति होगी, जो सिस्टम के जरिए ऑटोमेटिक दी जाएगी.
- एक राज्य में एक PAN पर एक रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था होगी.
- इससे छोटे विक्रेता दूसरे राज्यों के ग्राहकों तक आसानी से पहुंच सकेंगे.
19. अलग-अलग ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर एक जैसा GST
- अलग-अलग प्लेटफॉर्म के बिजनेस मॉडल के कारण एक ही डिलीवरी पर अलग-अलग टैक्स नहीं लगेगा.
- टैक्स इस आधार पर तय होगा कि वास्तव में कौन-सी सेवा दी गई है.
- यानी एक जैसी डिलीवरी पर एक जैसा GST लगेगा.
20. इस बैठक में GST दरों में बड़ा बदलाव नहीं
57वीं GST Council बैठक में GST दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है. दरों की समीक्षा अब साल में एक बार होने वाली अलग बैठक में की जाएगी. इस बैठक में मुख्य फोकस प्रक्रिया, ITC, रिफंड, रजिस्ट्रेशन और अनुपालन आसान करने पर रहा.
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