अगर आप अक्सर ओला, उबर से राइड बुक करते हैं या स्विगी-जोमैटो से खाना ऑर्डर करते हैं, तो यह खबर आपके काम की है. कैब बुक करने से लेकर खाना मंगाने और ऑनलाइन शॉपिंग तक, रोज इस्तेमाल होने वाले कई ऐप्स पर GST को लेकर CBIC ने कन्फ्यूजन दूर कर दिया है. केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने स्पष्ट किया है कि राइड-हेलिंग और डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर बिजनेस मॉडल के आधार पर अलग-अलग टैक्स नहीं लगेगा. ओला, उबर, स्विगी, जोमैटो, फ्लिपकार्ट और अमेजन जैसी सभी प्लेटफॉर्म पर अब 5 फीसदी की एक समान जीएसटी दर लागू होगी.
सभी प्लेटफॉर्म पर 5% GST
CBIC के GST मेंबर संजय मंगल ने NDTV Profit को बताया कि GST काउंसिल ने अलग-अलग बिजनेस मॉडल के बावजूद इन प्लेटफॉर्म के लिए एक समान टैक्स सिस्टम को मंजूरी दी है.बिजनेस मॉडल अलग होने से इस टैक्स दर में फर्क नहीं पड़ेगा.
यह 5 फीसदी की दर उन प्लेटफॉर्म पर भी लागू होगी जो ग्राहकों को डिलीवरी पार्टनर्स से जोड़ते हैं और उन कंपनियों पर भी जो खुद डिलीवरी की सुविधा देती हैं. सरकार का जोर टैक्स सिस्टम को आसान बनाने और कारोबारियों को पहले से नियमों की जानकारी देने पर है.
साल में सिर्फ एक बार बदलेंगी GST दरें
सरकार ने GST की दरों को दो मुख्य स्लैब और एक विशेष दर के स्ट्रक्चर में व्यवस्थित किया है. अब GST दरों में बदलाव साल में एक बार, 1 अप्रैल से लागू करने की योजना है. इसके लिए GST काउंसिल नए वित्त वर्ष शुरू होने से पहले इस पर फैसला कर लेगी..
ITC और रिफंड की प्रक्रिया होगी आसान
GST से जुड़े दूसरे सुधारों पर भी काम चल रहा है. सरकार रजिस्ट्रेशन, रिफंड और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के दावों की प्रक्रिया आसान बनाने पर ध्यान दे रही है.
मोटर वाहनों से जुड़े ITC के मुद्दे अधिकारियों के समूह के पास भेजे जाएंगे. वहीं, निर्माण क्षेत्र में ITC के दावों पर अभी चर्चा नहीं हुई है. इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत जमा ITC के रिफंड में 1 नवंबर से उपलब्ध इनपुट सर्विस क्रेडिट लागू नियमों के मुताबिक पात्र होगा. 1 अप्रैल 2027 या उसके बाद क्लेम किए गए ITC को क्रेडिट के लिए उपलब्ध कराने की बात कही गई है. यह बदलाव पहले से जमा पुराने क्रेडिट पर लागू नहीं होगा, जिसका इस्तेमाल टैक्स चुकाने में किया जा सकता है.
अगले वित्त वर्ष से जरूरी होगा IMS
अगले वित्त वर्ष से इनवॉइस मैनेजमेंट सिस्टम (IMS) अनिवार्य होगा. इससे कारोबारियों के बिलों का मिलान आसान होने, सप्लाई चेन बेहतर तरीके से जुड़ने और टैक्स देनदारी में अंतर के कारण आने वाले नोटिस कम होने की उम्मीद है.
CBIC फेसलेस असेसमेंट का एक प्रस्तावित स्ट्रक्चर भी सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी करेगा. फिलहाल यह व्यवस्था केंद्रीय GST प्रशासन के तहत रजिस्टर्ड टैक्सपेयर्स के लिए प्रस्तावित है.
GST कलेक्शन में 15% की बढ़ोतरी
संजय मंगल के मुताबिक, दरों में बदलाव के बाद प्रभावी GST दर घटकर 10.84% रह गई है. इसके बावजूद टैक्स के दायरे में आने वाली सप्लाई बढ़ी है और पिछले तीन महीनों में रेवन्यू में 15% की बढ़त दर्ज हुई है.
हालांकि, मासिक GST कलेक्शन कब तक 3 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को छुएगा, इस पर फिलहाल कोई निश्चित अनुमान नहीं जताया गया है. उनका कहना है कि ग्रोथ लगातार आगे बढ़ रही है और इसमें तेजी आने की उम्मीद है.
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