सोने-चांदी के भाव में हाल ही में तेजी देखी गई थी, जिसके बाद निवेशकों में उम्मीद जगी थी. लेकिन गुरुवार (23 जुलाई) को सोने-चांदी के भाव में भारी गिरावट दर्ज की गई है. गुरुवार को 4 घंटे में 4000 रुपये से ज्यादा चांदी में गिरावट दर्ज की गई. जबकि सोने का भाव प्रति 10 ग्राम 1.45 लाख रुपये से नीचे आ गया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना-चांदी के भाव में गिरावट दर्ज की गई है. इस गिरावट का कारण निवेशकों की मुनाफावसूली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को बताया जा रहा है.
कितना गिरा सोने-चांदी का भाव
सोने-चांदी की कीमतों में 23 जुलाई को MCX पर सोने का दाम 1350 रुपये गिरकर 1,44,330 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया. जबकि चांदी भी 4419 रुपये नीचे गिर कर 2,22,579 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव 1.45 फीसदी की गिरा, जबकि चांदी में 2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.
सोने और चांदी की कीमतों में यह गिरावट, उनमें हुई ज़बरदस्त रिकवरी के एक दिन बाद आई है. ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन के अनुसार, घरेलू स्पॉट मार्केट में बुधवार (22 जुलाई) को सोने की कीमतें ₹1,900 बढ़कर ₹1.49 लाख प्रति 10 ग्राम (दो हफ़्ते के उच्चतम स्तर) पर पहुंच गई थीं, जबकि चांदी की कीमतें ₹8,500 बढ़कर ₹2.30 लाख प्रति किलोग्राम हो गई थीं.
क्यों गिरी सोने और चांदी की कीमतें?
कीमती धातुओं (बुलियन) की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण पिछले कुछ सत्रों में हुई भारी बढ़त के बाद 'प्रॉफिट बुकिंग' है. वैश्विक स्तर पर भी सोने की कीमतें अपने दो हफ़्ते के उच्चतम स्तर से नीचे आ गईं, क्योंकि अगले हफ़्ते होने वाली US फेडरल रिज़र्व की बैठक से पहले ट्रेडर्स सतर्क हो गए हैं.
पश्चिम एशिया में फिर से बढ़े तनाव के बीच कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई की चिंताएं बढ़ा दी हैं. ऊर्जा की ऊंची कीमतें फेडरल रिज़र्व के ब्याज दरों से जुड़े नज़रिए पर असर डाल सकती हैं, जिससे निवेशकों की नज़र इस बात पर है कि क्या ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं.
आमतौर पर ऊंची ब्याज दरों का सोने पर दबाव पड़ता है, क्योंकि ब्याज देने वाली संपत्तियों की तुलना में इस कीमती धातु से नियमित आय नहीं होती है. कीमतों में गिरावट के बावजूद, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता की वजह से सोने को सपोर्ट मिल रहा है. वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन एसेट्स) में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए प्रेरित किया है.
कीमती धातुओं में आई व्यापक मजबूती का फायदा चांदी को भी मिला है, हालांकि इंडस्ट्रियल डिमांड की वजह से इस धातु में उतार-चढ़ाव ज़्यादा रहा है.
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