Gold Price: सोने चांदी की कीमत में भारी उछाल के बाद अब बड़ी गिरावट देखी जा रही है. वैश्विक बाजार में जनवरी 2026 में सोना 5,602 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था, जिसके बाद यह गिरकर 3,942 डॉलर प्रति औंस तक आ गया. DSP Netra की रिपोर्ट के मुताबिक इसमें ऊपरी स्तर से लगभग 30 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है. हालांकि, यह गिरावट 1980 के बाद आई 71 प्रतिशत की ऐतिहासिक गिरावट से काफी कम है. तब सोने को पुराने रिकॉर्ड स्तर तक दोबारा पहुंचने में लगभग 28 वर्ष का समय लगा था. सोने के साथ ही चांदी की कीमत में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 में चांदी 121.6 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी, जिसके बाद इसका भाव गिरकर 55.6 डॉलर प्रति औंस रह गया. यानी चांदी की कीमत में भी करीब 54 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है. हालांकि, इसके बावजूद यह गिरावट 1980 के बाद आई 93 प्रतिशत की ऐतिहासिक गिरावट से काफी कम है. तब चांदी के अपने पुराने रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने में 31 वर्ष से अधिक का समय लगा था.
भारत में भी खूब बढ़ी थी चमकीली धातुओं की कीमत
भारत में 24 कैरेट सोने की कीमत का अब तक का सबसे ऊपरी स्तर जनवरी 2026 में दर्ज किया गया था. 29 जनवरी 2026 को सोने की कीमतें ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाते हुए लगभग ₹1,76,000 से ₹1,83,050 प्रति 10 ग्राम के बीच पहुंच गई थीं. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मुनाफावसूली, मजबूत अमेरिकी डॉलर और भू-राजनीतिक तनावों में आई थोड़ी कमी की वजह से कीमतों में बड़ी गिरावट आई है. 8 जुलाई यानी बुधवार को 24 कैरेट सोने की मौजूदा कीमत बिना GST के लगभग ₹1,45,250 से ₹1,45,410 प्रति 10 ग्राम है. वहीं, चांदी की बात करें तो भारत में चांदी का भाव जनवरी 2026 में 3.86 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया था. हालांकि, वैश्विक बाजारों के साथ ही भारत में भी इसके बाद चांदी में भारी गिरावट दर्ज की गई है. फिलहाल, 8 जुलाई यानी बुधवार को चांदी की कीमत 2.33 लाख से 2.45 लाख प्रति किलोग्राम के बीच चल रही है.
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इस वजह से सोने चांदी में आ रही है गिरावट
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर में मजबूती सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव का सबसे बड़ा कारण बनी. दरअसल, डॉलर इंडेक्स फिर से मजबूत होकर 101 के स्तर पर पहुंच गया है. फिलहाल, यह 100.07 के आसपास कारोबार करता नजर आ रहा है. आमतौर पर डॉलर मजबूत होने पर सोने-चांदी जैसी सुरक्षित निवेश की ओर लोगों का रुझान कम हो जाता है, जिससे इनकी कीमतों में गिरावट आती है. इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने और होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने की वजह से भी कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है. डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 68.3 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड करीब 71.67 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. तेल की कीमतों में नरमी से महंगाई का दबाव कम होने की उम्मीद बढ़ जाती है, जिससे सोने-चांदी जैसी सुरक्षित निवेश में कमी आती है, जिससे इनकी कीमतों में गिरावट का रुख देखने को मिलता है.
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दरअसल, कीमती धातुओं में बड़ी तेजी के बाद सुधार यानी गिरावट आना सामान्य बात है. इतिहास बताता है कि सोना और चांदी में बड़ी गिरावट के बाद स्थायी निचला स्तर बनाने में कुछ महीनों से लेकर कई वर्षों तक का समय लग सकता है. वहीं, पुराने रिकॉर्ड स्तर तक दोबारा पहुंचने में कई बार दशकों का समय भी लग जाता है. ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बजाय लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करना चाहिए.
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