- भारत में फ्लेक्स फ्यूल वाहन बिक्री का आधा हिस्सा बनने पर 311.8 करोड़ लीटर इथेनॉल की अतिरिक्त मांग होगी.
- इससे किसानों को 12,403 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त होने की संभावना है और CO₂ उत्सर्जन में कमी आएगी.
- फ्लेक्स फ्यूल वाहन E20 से E100 तक इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रणों पर चल सकते हैं.
अगर भारत में नए दोपहिया और चार पहिया वाहनों की बिक्री का 50% हिस्सा फ्लेक्स फ्यूल मानकों के अनुरूप बने वाहनों (flex fuel compliant vehicles) की ओर शिफ्ट हो जाता है, तो इससे देश में 311.8 करोड़ लीटर इथेनॉल की अतिरिक्त मांग पैदा होगी और किसानों को 12,403 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त होगी. पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्री हरदीप पूरी ने गुरुवार को दिल्ली में ये आंकड़े जारी किए.
CO₂ उत्सर्जन में भी कमी आएगी
दिल्ली में मारुति सुजुकी द्वारा निर्मित देश के पहले फ्लेक्स-फ्यूल यात्री वाहन (flex-fuel passenger vehicle) लांच करते हुए हरदीप पूरी ने कहा - इससे 66.4 लाख मीट्रिक टन CO₂ उत्सर्जन में भी कमी आएगी. इस अवसर पर सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद थे. फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स E20 से लेकर E100 तक के विभिन्न इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रणों पर चल सकते हैं.
पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, आज देश में लगभग 37 लाख पैसेंजर गाड़ियां हैं, और इस सेक्टर में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को अगर बड़े स्तर पर अपनाया जाता है तो इससे इथेनॉल-आधारित मोबिलिटी में अच्छी बढ़ोत्तरी हो सकती है.
भारत अब कृषि अपशिष्ट, बांस और समुद्री शैवाल जैसे कई फीडस्टॉक स्रोत से इथेनॉल उत्पादन करने में सक्षम है. पेट्रोल में इथेनॉल का मिश्रण 2013-14 में सिर्फ 1.5% था जो बढ़कर 2025-26 में 20% हो गया. दरअसल, भारत ने 20% इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित समय से 5 साल पहले ही हासिल कर लिया.
इथेनॉल की खरीद अब 1,040 करोड़ लीटर से अधिक
पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, इथेनॉल की खरीद साल 2013-14 में लगभग 38 करोड़ लीटर थी, जो आज बढ़कर 1,040 करोड़ लीटर से अधिक हो गई है. इस दौरान, इथेनॉल उत्पादन की क्षमता भी 2014 के 421 करोड़ लीटर से बढ़कर 2026 में लगभग 2000 करोड़ लीटर हो गई है, यानी लगभग पांच गुना ज़्यादा. इस बड़े बदलाव की वजह से कच्चे तेल के आयात में कमी आई है, विदेशी मुद्रा की बचत हुई है, उत्सर्जन कम हुआ है और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी दर्ज़ हुई है.
नीति आयोग ने आधिकारिक तौर पर इथेनॉल आधारित फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (FFV) को, जिनमें E85 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रण पर चलने वाले वाहन भी शामिल हैं, शून्य-उत्सर्जन वाहन के रूप में क्लासीफाई किया है. E85 फ्यूल से पार्टिकुलेट मैटर (PM) का उत्सर्जन लगभग शून्य होता है, जिससे फ्लेक्स-फ्यूल वाहन देश में बढ़ते वायु प्रदूषण की चुनौती से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प साबित हो सकते हैं.
बुधवार को पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पूरी ने दिल्ली में हीरो मोटोकोर्प के पहले फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकिल को लॉन्च किया था जो E20 से E85 तक एथेनॉल मिश्रण के अनुकूल नई मोटरसाइकिलों हैं. स्प्लेंडर+ और एचएफ डीलक्स फ्लेक्स फ्यूल मोटरसाइकिलों के लॉन्च के साथ भारत ने फ्लेक्स-फ्यूल मोबिलिटी के क्षेत्र में प्रवेश किया है.
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