विज्ञापन

किसानों के खाद पर बड़ी खबर: 1 बोरी के दाम में मिल रही 15 बोरी! कम पड़ रही 1.7 लाख करोड़ की सब्सिडी, डबल करने की मांग

वैश्विक संकट के बीच भारत सरकार किसानों को 4500 रुपये वाली खाद की बोरी 300 रुपये में दे रही है. इस कारण फर्टिलाइजर सब्सिडी का बिल बजट अनुमान से दोगुना होकर 3.4 लाख करोड़ रुपये पहुंचने का अनुमान है. पूरी रिपोर्ट पढ़ें.

किसानों के खाद पर बड़ी खबर: 1 बोरी के दाम में मिल रही 15 बोरी! कम पड़ रही 1.7 लाख करोड़ की सब्सिडी, डबल करने की मांग
Big News for Farmers: किसानों के लिए खाद पर सरकार को सब्सिडी बढ़ानी पड़ सकती है.
Source: Canva

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और वैश्विक संकट के बीच देश के किसानों और सरकारी खजाने से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में फर्टिलाइजर्स (उर्वरक) के सप्लायर कम हो रहे हैं और कीमतें लगातार आसमान छू रही हैं. इस संकट का सीधा असर भारत सरकार के फर्टिलाइज़र सब्सिडी बिल पर पड़ा है. शीर्ष सरकारी सूत्रों ने NDTV को बताया कि मौजूदा वित्त वर्ष में खाद पर सब्सिडी का कुल बोझ बढ़कर करीब 3.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जो बजट अनुमान से करीब 100 फीसदी अधिक है.

300 रुपये में मिल रही 4,500 रुपये वाली खाद की बोरी

सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, वैश्विक बाजार में खाद बनाने की लागत में भारी उछाल आया है. कोविड-19 महामारी के बाद जिस खाद की प्रति बोरी (Sack) लागत करीब 2,900 रुपये थी, वो अब बढ़कर लगभग 4,500 रुपये हो चुकी है.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक बोरी खाद की असली कीमत 4,500 रुपये तक पहुंच चुकी है, लेकिन भारत सरकार आज भी देश के किसानों को यह खाद महज 300 रुपये/ बोरी की पुरानी रियायती कीमत पर दे रही है. यानी एक बोरी की वास्तविक कीमत पर किसानों को सरकार की मदद से 15 बोरियां मिल रही हैं. बाकी बची 4,200 की भारी-भरकम राशि सरकार खुद सब्सिडी के तौर पर वहन कर रही है.

बजट का अनुमान हुआ फेल, दोगुनी फर्टिलाइजर सब्सिडी की मांग

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में फर्टिलाइज़र सब्सिडी के लिए 1.71 लाख करोड़ रुपये (कुछ आंकड़ों में 1.77 लाख करोड़) का प्रावधान किया था. लेकिन कीमतों की मौजूदा रफ्तार को देखते हुए उर्वरक विभाग ने वित्त मंत्रालय से 100% ज्यादा अतिरिक्त फंड की मांग की है, क्योंकि यह बिल 3.4 लाख करोड़ रुपये तक जाने का अनुमान है.

Latest and Breaking News on NDTV

कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (CGA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने अकेले अप्रैल महीने में ही यूरिया और न्यूट्रिएंट बेस्ड फर्टिलाइजर्स पर सब्सिडी के रूप में 22,033 करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं, जो पूरे साल के बजट अनुमान का लगभग 13% है. इससे पहले वित्तीय वर्ष 2025-26 में भी सरकार का वास्तविक सब्सिडी खर्च बजट अनुमान से कहीं अधिक 2.11 लाख करोड़ रहा था.

खरीफ सीजन के लिए राहत: स्टॉक की स्थिति मजबूत

अंतरराष्ट्रीय बाजार में मचे इस हाहाकार के बीच भारतीय किसानों के लिए राहत की बात यह है कि देश में खरीफ सीजन के लिए जरूरी उर्वरकों का स्टॉक पूरी तरह संतोषजनक है.

उर्वरक विभाग के मुताबिक:

  • कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा खरीफ 2026 के लिए उर्वरक की कुल आवश्यकता का पुनर्मूल्यांकन 383.9 लाख मीट्रिक टन किया गया है.
  • वर्तमान में देश के पास 197.56 लाख मीट्रिक टन (51% से अधिक) का स्टॉक पहले से मौजूद है, जो सामान्य स्तर (33%) से काफी ज्यादा है.
  • जून महीने के दौरान भारतीय बंदरगाहों पर यूरिया, डीएपी (DAP) और एनपीके (NPK) का कुल आयात 25 लाख मीट्रिक टन से अधिक होने की उम्मीद है.
  • इसके अलावा, भारत सरकार ने सुरक्षा के लिहाज से 17 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त यूरिया की खरीद के लिए एक नया ग्लोबल टेंडर भी जारी कर दिया है.

जैविक खाद की तरफ बढ़े किसान, बिक्री में बंपर उछाल

रासायनिक खादों की बढ़ती कीमतों और युद्ध के बाद बने हालातों के बीच भारतीय किसानों में जैविक खाद (Organic Fertilizer) के प्रति रुझान तेजी से बढ़ा है. चालू खरीफ-2026 सीजन में 7 जून 2026 तक किसानों ने रिकॉर्ड 11.17 लाख मीट्रिक टन जैविक खाद (FOM/LFOM/PROM) खरीदी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा महज 3.20 लाख मीट्रिक टन था.

राज्यवार आंकड़ों की बात करें तो पंजाब के किसानों ने 2.83 लाख मीट्रिक टन, उत्तर प्रदेश ने 2.71 लाख मीट्रिक टन, हरियाणा ने 1.33 लाख मीट्रिक टन और मध्य प्रदेश ने 1.25 लाख मीट्रिक टन जैविक खाद की खरीदारी की है.

खजाने पर चौतरफा मार 

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सरकार पर केवल फर्टिलाइज़र सब्सिडी का ही दबाव नहीं है, बल्कि महंगे ईंधन (Crude Oil) ने भी मुश्किलें बढ़ा रखी हैं. मार्च में पेट्रोल-डीजल पर की गई 10 रुपये प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी कटौती और सरकारी तेल कंपनियों के घाटे के कारण सरकार को लगभग 1.23 लाख करोड़ रुपये के राजस्व (Tax Revenue) का नुकसान हुआ है. पहले जहां तेल कंपनियां रोजाना 1,000 करोड़ रुपये का घाटा सह रही थीं, वह अब भी करीब 650 करोड़ रुपये रोजाना बना हुआ है.

यही वजह है कि जहां सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को जीडीपी के 4.4% पर रोकने में सफलता पाई थी, वहीं इस साल अकेले अप्रैल महीने में ही राजकोषीय घाटा 26 महीने के उच्च स्तर 3.62 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पूरे साल के बजट लक्ष्य का 21.4 फीसदी है.

ये भी पढ़ें: SpaceX IPO: एलन मस्‍क का पार्टनर बनने को टूट पड़े निवेशक, 75 बिलियन डॉलर चाहा था, आ गए 250 बिलियन डॉलर!

ये भी पढ़ें: म्‍यूचुअल फंड से मोहभंग! साल भर के रिकॉर्ड निचले स्‍तर पर पहुंचा निवेश, क्‍यों कमजोर हुआ भरोसा?

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Fertilizer Subsidy, Farmers, Agriculture News, Urea, India Economy
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com