FASTag New Rule: फास्टैग यूजर्स के लिए बड़ी खबर है. NHAI ने फास्टैग के इस्तेमाल को लेकर एक अलर्ट जारी किया है, जिसे अगर आपने नहीं माना तो फिर आपका फास्टैग ब्लैकलिस्ट हो जाएगा. दरअसल पिछले कुछ समय से सरकार फास्टैग के नियमों में लगातार बदलाव कर रही है. इसका मकसद हो रही धांधलेबाजी को रोकना है. इसी बीच NHAI ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए बताया है कि अगर इसका इस्तेमाल नियम के अनुसार नहीं किया तो ये ब्लैकलिस्ट हो सकता है.
क्या बदले नियम?
दरअसल अभी देखा जाता था कि लोग इसे कार के विंड स्क्रीन पर पेस्ट नहीं करते थे, जब टोल आता था तो हाथ में लेकर अपना टैक्स पे कर देते थे. पर अब NHAI का कहना है कि अगर इसे कार में नियम के अनुसार विंडशील्ड पर फास्टैग (FASTag) पेस्ट नहीं किया तो इसे वैलिड नहीं माना जाएगा. ऐसे में डबल टैक्स की मार झेलनी पड़ सकती है.
सरकार ने क्या-क्या बदले नियम
पिछले कुछ समय में सरकार ने फास्टैग (FASTag) को डिजिटल बनाने, इसके प्रोसेस को तेज बनाने पर जोर दिया है. कैश पर लगाम से लेकर ज्यादा टोल देने की कई पेनल्टी शुरू की गई है. चलिए आपको बताते हैं फास्टैग को लेकर बड़े बदलाव क्या-क्या हुए हैं.
कैश पर लगाई लगाम
- अप्रैल 2026 से देशभर के NHAI संचालित हाइवे पर कैश पेमेंट पूरी तरह रोक दिया है. अगर आपको टोल देना है तो फास्टैग (FASTag) या फिर यूपीआई का इस्तेमाल करना होगा.
- अगर मान लीजिए आपका फास्टैग वैलिड नहीं है तो यूपीआई से पेमेंट करने पर 25 फीसदी ज्याद टैक्स लिया जाएगा.
- आईडी के जरिए टोल माफी पर कसी गई लगाम.
- बार-बार हाईवे का इस्तेमाल करने वालों के लिए एनुअल पास की शुरुआत हुई. प्राइवेट कार के लिए फीस 3075/साल है, जिसमें 200 ट्रिप कवर होंगी.
फास्टैग से बढ़ी सरकार की कमाई
वित्त वर्ष 2024-25 की बात करें तो मार्च 2025 के आखिर तक फास्टैग से टोल कलेक्शन 60 हजार करोड़ रहा. हर साल फास्टैग के जरिए रिकॉर्ड कमाई सरकार कर रही है. वही अगर मार्च 2026 की बात करें तो एनपीसीआई के डेटा के अनुसार टोल से कुल कमाई 80 हजार से 82 हजार करोड़ रही है. सालान दर पर FY26 में 19.6% की ग्रोथ देखी गई है.
फास्टैग से कमाई बढ़ने की वजह
सरकार ने फास्टैग (FASTag) के नियमों को कड़ा बनाया, जिसके चलते करीब 98% टोल का पेमेंट फास्टैग होना शुरू हो चुका है. यानी लीकेज कम हुई है. साथ ही नए हाइवे और एक्सप्रेसवे बन रहे हैं, जिससे कलेक्शन में उछाल आया है. इसके अलावा गाड़ियों की संख्या बढ़ रही है और सड़कों पर लॉजिस्टिक ट्रैफिक बढ़ा है.
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