EPFO Pension Rules: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने कम सैलरी पर पहली नौकरी वाले कर्मचारियों के लिए एक जरूरी अपडेट जारी किया है. अगर किसी कर्मचारी ने अपनी पहली जॉब 25,000 रुपये या उससे कम मंथली सैलरी पर शुरू की है, तो वह कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-95) के तहत पेंशन का लाभ ले सकते है. अगर आपने पहली नौकरी ₹25,000 या उससे कम सैलरी पर शुरू की है, तो ये खबर आपके लिए जरूर है. EPS-95 स्कीम को लेकर EPFO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया है कि EPFO के नियमों के अनुसार, यदि आपकी पहली नौकरी के दौरान सैलरी ₹25,000 या उससे कम है, तो आप ईपीएस-95 के तहत पेंशन के हकदार हैं.
कैसे मिलेगा EPS पेंशन का लाभ?
EPFO का कहना है कि अगर आपकी सैलरी से पेंशन के लिए पैसा कट रहा है, तो इसका मतलब है कि रिटायरमेंट के बाद आपका भविष्य सुरक्षित हो रहा है. इसके साथ ही EPFO ने यह भी बताया है कि अगर कर्मचारियों की सैलरी से पेंशन का पैसा नहीं कट रहा हो, तो उन्हें क्या करना चाहिए. आइए जानते हैं कैसे मिलेगा EPS पेंशन का फायदा और कंपनी न काटे पेंशन का पैसा तो आप इसकी शिकायत कहां दर्ज करा सकते हैं.
₹25,000 तक सैलरी पर क्या है नियम?
EPFO के मुताबिक, ₹25,000 या उससे कम सैलरी पाने वाले पात्र कर्मचारियों के लिए EPS की मेंबरशिप अनिवार्य है. वहीं, ₹25,000 से ज्यादा सैलरी पाने वाले ऐसे कर्मचारी, जो पहले EPS के मेंबर नहीं रहे हैं, इस स्कीम में नए मेंबर बनने के लिए एलिजिबल नहीं हैं. इसलिए सिर्फ मौजूदा सैलरी देखकर फैसला करना सही नहीं होगा. कर्मचारी पहले EPS के मेंबर थे या नहीं, यह भी देखना जरूरी है.
EPF और EPS में कितना जमा होता है पैसा
EPF और EPS रिटायरमेंट से जुड़ी दो अलग-अलग स्कीम्स हैं. EPF में कर्मचारी की रिटायरमेंट सेविंग जमा होती है, जबकि EPS के तहत पात्र सदस्यों को पेंशन का लाभ मिलता है.
EPFO के नियम के मुताबिक, आपकी कंपनी (नियोक्ता) आपकी सैलरी से अलग आपकी बेसिक सैलरी का 12% हिस्सा आपके पीएफ (EPF) खाते में जमा करती है.उस 12% कुल रकम में से 8.33% हिस्सा सीधे आपकी पेंशन योजना (EPS) में चला जाता है .यह सरकार द्वारा तय की गई वेतन सीमा और नियमों के हिसाब से होता है. बाकी बचा हुआ सारा पैसा आपके रेगुलर प्रोविडेंट फंड (EPF) खाते में सुरक्षित जमा हो जाता है, जिस पर आपको ब्याज मिलता है.
पेंशन योग्य सैलरी पर कैलकुलेशन
मान लीजिए कि आपकी पेंशनएबल सैलरी ₹25,000 है, तो कंपनी के 12% योगदान के हिसाब से कुल ₹3,000 जमा होंगे. इस ₹3,000 में से ₹2,082.50 सीधे आपकी पेंशन योजना (EPS) में चले जाएंगे और बाकी बचे ₹917.50 आपके पीएफ (EPF) खाते में जमा होंगे. हालांकि, यह योगदान हर कर्मचारी की सैलरी की पात्रता और सरकार के तय नियमों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है.
पेंशन का पैसा नहीं कट रहा तो क्या करें?
EPFO ने कर्मचारियों को सलाह दी है कि एलिजिबल होने के बावजूद EPS का कॉन्ट्रीब्यूशन नहीं कट रहा है, तो सबसे पहले अपनी कंपनी के HR डिपार्टमेंट से संपर्क करें. अपनी मेंबरशिप का पुराना रिकॉर्ड और एलिजिबिलिटी भी चेक कर लें. यदि कंपनी की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की जाती है, तो आप तुरंत EPFO के आधिकारिक शिकायत पोर्टल (EPFiGMS) पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं.
सैलरी लिमिट बढ़ाने से 51 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को फायदा
17 सितंबर 2026 से EPFO के अनिवार्य कवरेज की मंथली सैलरी लिमिट ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 की गई. श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के मुताबिक, इस बदलाव से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारियों को सोशल सिक्योरिटी के दायरे में लाने की उम्मीद है. इनमें खास तौर पर वे कर्मचारी शामिल हैं, जिनकी मंथली सैलरी ₹15,000 से ज्यादा और ₹25,000 तक है.
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