Dharavi Redevelopment: मुंबई के धारावी में गणेश नगर-मेघवाड़ी के लोगों को अचानक बिना नोटिस घर खाली कराने के आरोपों पर धारावी रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट (DRP) ने सफाई दी है. DRP ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि 6 अगस्त को की गई कार्रवाई तय कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई. प्रोजेक्ट की ओर से कहा गया कि लोगों को पहले कई बार नोटिस दिए गए, उनकी परेशानी सुनी गईं और स्वेच्छा से घर खाली करने के लिए पर्याप्त समय और मौका भी दिया गया.
अप्रैल में दिया गया था नोटिस
DRP के मुताबिक, अप्रैल में सेक्टर 6 के निवासियों के लिए पब्लिक नोटिस जारी किया गया था. इसमें लोगों से रेंटल एग्रीमेंट करने और मानसून के दौरान होने वाली परेशानी से बचने के लिए अपने परिसर खाली करने को कहा गया था.इसके बाद संबंधित सभी कब्जाधारियों को घर खाली करने के नोटिस दिए गए. जिन लोगों ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई, उनकी सुनवाई भी की गई. DRP ने बताया कि इन सुनवाइयों का आयोजन 6 जुलाई और 13 जुलाई को किया गया था.
28 जुलाई को लगाए गए डिमोलिशन नोटिस
DRP ने बताया कि इसके बाद 28 जुलाई को डिमोलिशन नोटिस भी जारी किए गए. प्रोजेक्ट के मुताबिक, सभी जरूरी कानूनी और वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही ढांचे हटाने की कार्रवाई की गई.DRP का कहना है कि बार-बार समझाने और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बावजूद कुछ लोग घर खाली करने के लिए तैयार नहीं हुए. इसके बाद कार्रवाई करनी पड़ी.
16 झोपड़ियों में से 12 लोगों ने खुद खाली किया घर
DRP के मुताबिक, इस इलाके में कुल 16 चिन्हित झोपड़ियां थीं. इनमें से 12 झोपड़ियों को लोगों ने काउंसलिंग और बातचीत के बाद स्वेच्छा से खाली कर दिया.वहीं, बाकी चार को पुलिस की मदद से हटाना पड़ा. DRP ने कहा कि इन चार संरचनाओं में रहने वाले लोग कानूनी प्रक्रिया पूरी होने और बार-बार दिए गए निर्देशों के बावजूद घर खाली करने के लिए तैयार नहीं हुए थे.
आखिर क्यों जरूरी थी यह कार्रवाई?
DRP के मुताबिक, इन ढांचों को हटाना पब्लिक और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी था. इस काम को पूरा करना माहिम और माटुंगा रेलवे की जमीन पर पुनर्वास निर्माण शुरू करने की दिशा में भी जरूरी कदम था.
प्रोजेक्ट के अनुसार, गणेश नगर-मेघवाड़ी में पुनर्वास का काम प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है. इसका मकसद पात्र निवासियों के पुनर्वास अधिकारों को सुरक्षित रखना और साथ ही जरूरी सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को समय पर आगे बढ़ाना है.
घर खाली करने वालों को कितना किराया मिलेगा?
DRP ने कहा है कि प्रभावित परिवारों को उनकी अंतिम पात्रता तय होने का इंतजार किए बिना किराये की सहायता दी जा रही है. ग्राउंड फ्लोर पर रहने वाले लोगों को हर महीने 18,000 रुपये और ऊपरी मंजिल पर रहने वालों को 15,000 रुपये प्रति माह किराये के तौर पर दिए जाएंगे.इसके अलावा लोगों को एक बार 5,000 रुपये की शिफ्टिंग सहायता, एक महीने की ब्रोकरेज और हर साल किराये में 5 फीसदी की बढ़ोतरी भी मिलेगी. यह सहायता तब तक जारी रहेगी, जब तक स्थायी पुनर्वास पूरा नहीं हो जाता.
जिनकी पात्र नहीं उन्हें भी मिलेगा मौका
DRP ने कहा कि जिन निवासियों की पात्रता अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुई है, उन्हें संबंधित सरकारी अधिकारियों के सामने अपनी पात्रता पूरी करने और दस्तावेजों की जांच कराने का पर्याप्त अवसर दिया जा रहा है.प्रोजेक्ट के मुताबिक, पुनर्वास प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर पात्र परिवार को लागू पुनर्वास नीति के तहत मिलने वाले सभी लाभ मिलें. इसके साथ ही एक साल की किराये की सहायता भी बिना किसी भेदभाव के एडवांस में दी जा रही है.
तीन महीने का किराया पहले, बाकी नौ महीने बाद
DRP के मुताबिक, तय पेमेंट सिस्टम के तहत रेंटल एग्रीमेंट होने के बाद तीन महीने का किराया जारी किया जाता है. बाकी नौ महीने का किराया घर खाली करने और संबंधित जगह का कब्जा सौंपने के बाद दिया जाता है.इस पैकेज में ब्रोकरेज और शिफ्टिंग सहायता भी शामिल है. इसके बाद मिलने वाली किराये की सहायता सीधे परिवार के मुखिया के बैंक खाते में जमा की जाती है. यह भुगतान तब तक जारी रहता है, जब तक परिवार को स्थायी पुनर्वास आवास नहीं मिल जाता.
नोटिस के बाद भी घर खाली नहीं करने पर क्या होगा?
DRP ने कहा कि कानूनी प्रावधानों के तहत अगर किसी व्यक्ति को उचित नोटिस दिया जा चुका है और पूरी कानूनी प्रक्रिया भी पूरी हो गई है, लेकिन इसके बावजूद वह परिसर खाली नहीं करता, तो उसे कानून के मुताबिक हटाया जा सकता है.DRP के मुताबिक, ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति किराये की सहायता और अन्य शिफ्टिंग बेनिफिट से भी वंचित हो सकता है.
पुनर्वास पर DRP का भरोसा
धारावी पुनर्विकास प्रोजेक्ट (DRP) का कहना है कि प्रभावित लोगों का पुनर्वास पूरी तरह से पारदर्शी, कानूनी और मानवीय तरीके से पूरा किया जा रहा है. DRP का मकसद सभी पात्र लोगों के अधिकारों की रक्षा करते हुए इस योजना को सही तरीके से लागू करना है. इसके साथ ही, क्षेत्र में बनने वाले जरूरी सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को भी तय समय पर पूरा किया जाएगा, ताकि विकास का काम बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सके.
(Disclaimer: New Delhi Television is a subsidiary of AMG Media Networks Limited, an Adani Group Company.)
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