मध्यपूर्व एशिया के सुलगते रेगिस्तान और संकीर्ण समुद्री रास्तों से उठती युद्ध की लपटें अब वैश्विक अर्थव्यवस्था को झुलसाने की कगार पर हैं. पिछले एक महीने से 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) के लगभग बंद होने के बाद अब दुनिया के चौथे सबसे बड़े शिपिंग मार्ग- बाब अल-मंदेब (Bab el-Mandeb) पर युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं. ईरान की ताजा धमकी ने न केवल अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में खलबली मचा दी है, बल्कि भारत जैसे देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर भी बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है.
बाब अल-मंदेब पर ईरान की नई धमकी
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पहले से ही 650 से ज्यादा कार्गो जहाज फंसे हुए हैं, जिसके कारण कच्चा तेल 105 डॉलर प्रति बैरल के पार बना हुआ है. अब ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका और इजरायल ने उसके खर्ग द्वीप या अन्य रणनीतिक ठिकानों पर हमला किया, तो वह बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को ब्लॉक कर देगा. यह वह संकीर्ण रास्ता है जो स्वेज नहर की ओर जाने वाले समुद्री यातायात को नियंत्रित करता है.
U.S. Energy Information Administration के अनुसार, यदि यह रास्ता बंद होता है, तो जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी सिरे (Cape of Good Hope) से होकर जाना होगा. इसका मतलब है:
- 40% ज्यादा दूरी: यात्रा लंबी और थकाऊ हो जाएगी.
- बाब अल-मंदेब शिपिंग और पारगमन समय बढ़ने से महंगाई आसमान छुएगी.
महा-संकट: जब होर्मुज और मंदेब ब्लॉक हो जाए
- दुनिया के तेल का गणित समझें तो स्थिति बेहद डरावनी है.
- होर्मुज: यहां से दुनिया की 20% तेल सप्लाई होती है, जो पहले से ही बाधित है.
- बाब अल-मंदेब: यहां से वैश्विक तेल सप्लाई का लगभग 12% गुजरता है.
यदि ईरान बाब अल-मंदेब को ब्लॉक करता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार की एक-तिहाई (32%) तेल सप्लाई सीधे तौर पर ठप हो जाएगी. यह वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए किसी 'ब्लैक होल' से कम नहीं होगा.

गहरा सकता है LPG का संकट
भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल और 60% एलपीजी (LPG) आयात करती है. शिपिंग मंत्रालय के मुताबिक, होर्मुज के ब्लॉक होने से भारत के 18 जहाज पहले से ही पश्चिम में फंसे हैं, जिन पर 500 भारतीय नाविक सवार हैं. इनमें 1 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा LPG लोड किए हुए तीन बड़े टैंकर भी शामिल हैं. भारत को मिलने वाले 45% कच्चे तेल और 90% LPG की सप्लाई पहले ही चरमरा चुकी है. अगर बाब अल-मंदेब भी बंद हुआ, तो यूरोप और अफ्रीका के साथ होने वाला भारत का व्यापार पूरी तरह ठप हो जाएगा.
हूती मिलिशिया और युद्ध का विस्तार
यमन के दक्षिण-पश्चिम में स्थित बाब अल-मंदेब पर ईरान समर्थित हूती (Houthi) मिलिशिया का वर्चस्व है. ताजा खबरों के मुताबिक, हूतियों ने इस लड़ाई में ईरान का साथ देने का फैसला किया है. शनिवार को हूतियों ने इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर युद्ध के विस्तार का संकेत दे दिया है.
भौगोलिक दृष्टि से यह जलडमरूमध्य सबसे संकीर्ण पॉइंट पर मात्र 18 मील चौड़ा है. यहाँ टैंकरों के आने-जाने के लिए केवल 2-2 मील चौड़े चैनल ही उपलब्ध हैं. इतनी कम जगह में किसी भी बड़े टैंकर को निशाना बनाना या रास्ता रोकना बेहद आसान है, जैसा कि हूती 2023 में कर चुके हैं.
महंगाई और आयात का बढ़ता दबाव
ईरान की तस्नीम समाचार एजेंसी ने साफ कर दिया है कि अगर जमीनी कार्रवाई हुई, तो युद्ध के नए मोर्चे खुलेंगे. भारत के लिए वैकल्पिक स्रोत तलाशना पहले ही महंगा साबित हो रहा है. अगर ये दोनों चोकपॉइंट्स बंद होते हैं, तो न केवल पेट्रोल-डीजल बल्कि प्राकृतिक गैस की कीमतें भी आम आदमी की पहुंच से बाहर हो सकती हैं.
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