पश्चिम एशिया संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और विमान ईंधन (ATF) की आसमान छूती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. इससे न केवल एयरलाइन कंपनियों को राहत मिलेगी, बल्कि कहीं न कहीं इसका लाभ हम और आप तक भी पहुंचेगा. चलिए बात को ज्यादा घुमाए बिना पूरी खबर बता देते हैं. आज बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में 10,000 करोड़ रुपये के ATF प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड को मंजूरी दे दी गई है. ये फंड सुनिश्चित करेगा कि ATF के दाम एक सीमा से ज्यादा बढ़ जाएं तो एयरलाइनों को ज्यादा पैसे न देने पड़े. ATF की कीमतों को स्थिर बनाए रखने के लिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को इस फंड से मदद की जाएगी.
केंद्रीय कैबिनेट के इस अहम फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही कि क्या जेट फ्यूल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद भी आम जनता के लिए फ्लाइट टिकट के दाम नहीं बढ़ेंगे? पॉलिसी एक्सपर्ट डॉ प्रभात सिन्हा तो ऐसा ही मानते हैं. उनका कहना है कि फ्लाइट्स की टिकटों के दाम काबू में रखने के लिए इस फंड का इस्तेमाल किया जा सकता है. वे इसे सामान्य बात मानते हैं कि जब ATF के दाम बढ़ने पर भी एयरलाइन्स को कम पैसे ही देने होंगे तो उनके पास किराया बढ़ाने का भी आधार नहीं होगा!
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हवाई टिकटों को महंगा होने से कैसे रोकेगा यह फंड?
किसी भी एयरलाइन कंपनी के कुल ऑपरेटिंग खर्च में लगभग 40% हिस्सेदारी अकेले एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट फ्यूल की होती है. ऐसे में जब भी जेट फ्यूल महंगा होता है, कंपनियां उसका बोझ हवाई यात्रियों पर डाल देती हैं और टिकटें महंगी हो जाती हैं.
हमारी सहयोगी वेबसाइट NDTV Profit के मुताबिक, सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये की एकमुश्त बजटीय सहायता को मंजूरी दी है, जो तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को ब्याज मुक्त एडवांस (Interest-Free Advance) के रूप में दी जाएगी. जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में ATF की आयात समता मूल्य (Import Parity Price) तय बेंचमार्क से ऊपर जाएगी, तो एयरलाइंस को महंगी दरों पर ईंधन खरीदने की जरूरत नहीं होगी. तेल कंपनियों को होने वाले नुकसान की भरपाई इसी 10,000 करोड़ रुपये के कोष से की जाएगी.
सरकार ने घरेलू परिचालन के लिए ATF की प्रभावी कीमत को 75.6 रुपये प्रति लीटर पर कैप (सीमित) कर दिया है, जिससे एयरलाइंस पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा और वे यात्रियों का किराया बढ़ाने पर मजबूर नहीं होंगी.

Photo Credit: Air india / X
महज दो महीने में 2.5 गुना महंगा हुआ जेट फ्यूल
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय ATF कीमतों में अप्रत्याशित उछाल आया है. मार्च 2026 में ATF की कीमत लगभग 60.50 रुपये प्रति लीटर थी, जो मई 2026 तक आते-आते बढ़कर 142 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई. महज दो महीनों में कीमतें लगभग 2.5 गुना बढ़ गईं, जिसने पूरी एविएशन इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया था. अगर सरकार यह दखल नहीं देती, तो एयरलाइंस के लिए उड़ानें जारी रखना मुश्किल हो जाता और हवाई किराए आम आदमी के बजट से पूरी तरह बाहर हो जाते.
कैसे काम करेगी यह नई व्यवस्था?
कैबिनेट के फैसले के मुताबिक, एयर इंडिया, इंडिगो, स्पाइसजेट, अकासा समेत सभी शेड्यूल्ड घरेलू एयरलाइंस के लिए उपलब्ध ये सुविधा होगी. घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार के ऑपरेशन पर लागू होगी. इस ATF प्राइस स्टेबलाइजेशन सपोर्ट को 36 महीने यानी पूरे 3 साल के लिए लागू किया गया है.
इसके तहत एयरलाइंस और तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के बीच एक एमओयू (MoU) होगा, जिसमें नागर विमानन मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय भी शामिल रहेंगे.
एयरलाइनों को अगले तीन साल या फंड की पूरी रिकवरी होने तक केवल इन्हीं ओएमसी से ही ATF खरीदना होगा. जब अंतरराष्ट्रीय कीमतें कम होंगी, तब OMCs से अंतर की राशि वसूल कर भारत की समेकित निधि (Consolidated Fund of India) में वापस जमा करा दी जाएगी.
सरकार के इस फैसले से न केवल हवाई यात्रियों को किराये में बढ़ोतरी से सुरक्षा मिलेगी, बल्कि एविएशन इकोसिस्टम पर निर्भर करीब 77 लाख नौकरियों को भी सुरक्षित किया जा सकेगा.
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