बजट 2026 को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और हर कोई यह जानना चाहता है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पिटारे से इस बार क्या निकलेगा. इस बार लोगों की नजर इस पर है कि सरकार किन सेक्टर को मजबूत करने पर जोर दे सकती है. 1 फरवरी को पेश होने वाले इस बजट को लेकर 'मोतीलाल ओसवाल' की एक ताजा रिपोर्ट आई है, जो बताती है कि सरकार खर्च और बचत के बीच संतुलन बनाए रखते हुए सरकार इस बार देश की सुरक्षा यानी डिफेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर पर सबसे ज्यादा ध्यान दे सकती है.
यह बजट ऐसे समय में आ रहा है जब दुनिया भर में उथल-पुथल मची है, ऐसे में भारत के लिए अपनी ग्रोथ की रफ्तार को बनाए रखना और साथ ही अपने खर्चों को कंट्रोल में रखना एक बड़ी चुनौती होगी.बाजार को बहुत बड़े एलान की उम्मीद नहीं है लेकिन छोटे और सही फैसले भी अच्छा असर डाल सकते हैं.
डिफेंस और इंफ्रा पर रहेगा पूरा फोकस
सरकार का इस बार का मुख्य एजेंडा देश को आत्मनिर्भर बनाना है. एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, बजट 2026 में डिफेंस क्रिटिकल मिनरल्स पावर इलेक्ट्रॉनिक्स इंफ्रा और अफोर्डेबल हाउसिंग जैसे सेक्टर पर ज्यादा ध्यान दिया जा सकता है. बदलते वैश्विक हालात और जियो पॉलिटिकल तनाव के कारण डिफेंस और जरूरी संसाधनों को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता बनता जा रहा है. इसी वजह से कैपेक्स यानी सरकार के खर्च का बड़ा हिस्सा इन सेक्टर में जा सकता है.
पॉजिटिव सरप्राइज की उम्मीद
रिपोर्ट में कहा गया है कि निवेशक इस बार बजट से बहुत बड़े एलान की उम्मीद नहीं कर रहे हैं. सरकार को कई मोर्चों पर संतुलन बनाना है इसलिए छोटे लेकिन असरदार फैसले लिए जा सकते हैं. जानकारों का मानना है कि सरकार भारी-भरकम वादे करने के बजाय चुनिंदा और जरूरी क्षेत्रों में निवेश बढ़ाकर मार्केट का भरोसा जीतने की कोशिश करेगी. ऐसे में अगर सही सेक्टर को सपोर्ट मिला तो बाजार का मूड बेहतर हो सकता है और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा.
बजट का असर अब टारगेटेड फैसलों तक सीमित
पिछले कुछ सालों में बजट के अलावा भी कई फैसले लिए गए हैं इसलिए अब बजट का असर पहले जैसा बड़ा नहीं रहा. इस बार शेयर बाजार सरकार के उन फैसलों पर नजर रखेगा जो सीधे ग्रोथ बढ़ाने वाले हों और चुनिंदा सेक्टर को फायदा पहुंचाएं. डिफेंस और इंफ्रा ऐसे ही सेक्टर माने जा रहे हैं.
खर्च और कमाई के बीच संतुलन की चुनौती
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती 'फिस्कल कंसोलिडेशन' है, जिसका सीधा मतलब है अपने घाटे को कम रखना.सरकार लगातार खर्च और घाटे को कंट्रोल करने की कोशिश कर रही है. कोविड के समय जो घाटा काफी बढ़ गया था वह अब धीरे धीरे कम हुआ है. कोरोना के समय देश का राजकोषीय घाटा 9.2 प्रतिशत तक पहुंच गया था, जिसे सरकार ने बहुत मेहनत से घटाकर 4.4 प्रतिशत के करीब लाने का अनुमान लगाया है. अब वित्त वर्ष 2027 के लिए सरकार का लक्ष्य अपने कर्ज को जीडीपी के अनुपात में कम करना है.अनुमान है कि सरकार इसी रास्ते पर आगे बढ़ेगी. हालांकि अगर जरूरत पड़ी तो हल्का सा ज्यादा खर्च भी किया जा सकता है ताकि ग्रोथ बनी रहे.
सही जगह खर्च हुआ पैसा तो बाजार देगा सपोर्ट
बाजार के एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार अपना पैसा विकास से जुड़े कामों में लगाती है, तो शेयर बाजार इसे हाथों-हाथ लेगा.अगर सरकार का खर्च प्रोडक्टिव कामों में जाता है जैसे इंफ्रा डिफेंस या लोगों की खरीद क्षमता बढ़ाने में तो शेयर बाजार इसे अच्छा कदम मान सकता है. वहीं बिना असर वाले खर्च से बचने की कोशिश रहेगी.
क्या मिडिल क्लास को फिर मिलेगी राहत?
पिछले बजट में मिडिल क्लास को टैक्स में राहत दी गई थी जिसका असर अभी पूरी तरह दिखना बाकी है. इसी वजह से इस बार खपत बढ़ाने के लिए बहुत बड़े कदम उठने की संभावना कम है. सरकार अब ज्यादा ध्यान कैपिटल खर्च पर दे सकती है.लेकिन अगर वित्त मंत्री की ओर से कोई छोटा सरप्राइज भी मिलता है, तो वह निवेशकों और आम जनता के लिए बड़ी बात होगी.
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