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चांदी की शुद्धता के लिए BIS की स्‍कीम लॉन्‍च, तय किए 3 ग्रेड, सिक्‍कों और बुलियन पर लगेंगे हॉलमार्क, जानिए आप कैसे कर पाएंगे जांच

BIS ने चांदी की रिफाइनरी और टकसालों के लिए सर्टिफिकेशन स्कीम शुरू की है. जानिए 999.9, 999.5 और 999 ग्रेड, हॉलमार्क और शुद्धता जांच के नियम.

चांदी की शुद्धता के लिए BIS की स्‍कीम लॉन्‍च, तय किए 3 ग्रेड, सिक्‍कों और बुलियन पर लगेंगे हॉलमार्क, जानिए आप कैसे कर पाएंगे जांच
अब चांदी के सिक्कों और बुलियन पर भी BIS हॉलमार्क
Source: NDTV Graphics/Canva

सोने की तरह अब चांदी के बुलियन और सिक्कों की शुद्धता की पहचान के लिए भी एक फ्रेमवर्क तैयार किया गया है. भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने चांदी की रिफाइनरी और टकसालों के लिए सर्टिफिकेशन स्कीम शुरू की है. इसका मकसद चांदी की शुद्धता की जांच, हॉलमार्किंग और उत्पादों की पहचान को एक तय मानक के तहत लाना है.

इस योजना के तहत चांदी के बुलियन और सिक्कों के लिए तीन शुद्धता ग्रेड तय किए गए हैं. BIS से लाइसेंस प्राप्त रिफाइनरी और टकसाल इन मानकों को पूरा करने वाले उत्पादों पर आधिकारिक हॉलमार्क लगा सकेंगी.

चांदी के लिए कौन से 3 शुद्धता ग्रेड तय हुए?

BIS ने भारतीय मानक IS 2112:2025 में संशोधन के बाद चांदी के बुलियन और सिक्कों के लिए तीन शुद्धता ग्रेड तय किए हैं. इनमें 999.9,  999.5 और  999.0 ग्रेड शामिल हैं.  999.9 ग्रेड का मतलब ये होगा कि प्रति 1,000 हिस्सों में चांदी की मात्रा 999.9 हिस्‍सा है.  इन ग्रेड का मतलब है कि चांदी में प्रति हजार हिस्सों के आधार पर कितनी शुद्ध चांदी मौजूद है.

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ये मानक चांदी के बुलियन और सिक्कों की शुद्धता पहचानने में मदद करेंगे. हालांकि, ये ग्रेड अपने आप में किसी उत्पाद की कीमत या निवेश पर मिलने वाले रिटर्न की गारंटी नहीं देते.

चांदी के हॉलमार्क में क्या-क्या होगा?

नई व्यवस्था के तहत हॉलमार्क वाली चांदी के बुलियन और सिक्कों पर एक मानकीकृत BIS चिह्न होगा. इससे उत्पाद की शुद्धता और उसकी पहचान से जुड़ी जानकारी हासिल करने में मदद मिलेगी. इनमें BIS स्टैंडर्ड मार्क, चांदी की पहचान के लिए SILVER शब्‍द, मेकर का पहचान चिह्न और यूनिक सीरियल नंबर होगा.

इस व्यवस्था का मकसद चांदी की सप्लाई चेन में प्रामाणिकता और पहचान को बेहतर बनाना है. सीरियल नंबर से उत्पाद के संबंधित बैच की पहचान करने में भी मदद मिल सकती है.

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रिफाइनरी और टकसालों को कैसे मिलेगा BIS लाइसेंस?

इस योजना के तहत BIS उन चांदी की रिफाइनरी और टकसालों को लाइसेंस देगा, जो निर्धारित मानकों को पूरा करेंगी. लाइसेंस देने से पहले इन संस्थानों की तकनीकी क्षमता, चांदी को शुद्ध करने की प्रक्रिया और जांच के लिए उपलब्ध उपकरणों का आकलन किया जाएगा.

लाइसेंस मिलने के बाद ही संबंधित संस्थान तय शर्तों के अनुसार चांदी के बुलियन और सिक्कों पर आधिकारिक BIS हॉलमार्क लगा सकेंगे. इससे हॉलमार्क लगाने की प्रक्रिया के लिए संस्थानों की योग्यता और परीक्षण व्यवस्था को भी मानकीकृत करने में मदद मिलेगी.

देखें वीडियो: BIS ने लॉन्‍च की सिल्‍वर रिफाइनरी स्‍कीम 

चांदी की शुद्धता जांचने के लिए कौन से तरीके अपनाए जाएंगे?

BIS के मानक में चांदी की मात्रा तय करने के लिए सैंपल लेने और जांच की प्रक्रियाएं तय की गई हैं. इसमें अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है.

इन जांच प्रक्रियाओं का उद्देश्य चांदी के बुलियन और सिक्कों में मौजूद चांदी की मात्रा का निर्धारण करना है. इससे तय शुद्धता ग्रेड के अनुरूप उत्पादों की जांच करने में मदद मिलेगी.

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ग्राहकों और चांदी के कारोबार के लिए इसका क्या मतलब है?

नई योजना चांदी की शुद्धता को लेकर अधिक व्यवस्थित व्यवस्था तैयार करने की दिशा में कदम है. हॉलमार्क पर शुद्धता ग्रेड, निर्माता की पहचान और सीरियल नंबर होने से उत्पाद की पहचान और उसके बैच का पता लगाने में मदद मिल सकती है.

रिफाइनरी और टकसालों के लिए भी लाइसेंस और परीक्षण से जुड़ी स्पष्ट व्यवस्था होगी. इससे चांदी के बुलियन और सिक्कों के लिए शुद्धता के मानकों को एक समान फ्रेमवर्क में लाने का प्रयास किया गया है. ध्‍यान रहे कि ये चांदी के हर उत्पाद पर अपने आप लागू होने वाली अनिवार्य हॉलमार्किंग व्यवस्था नहीं है.

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