Bihar Superfood Makhana: बिहार के सुपरफूड की धाक अब पूरी दुनिया में जमी हुई है. दुनिया की जुबां पर मखाने का स्वाद चढ़ गया है और इसलिए कई देशों में इसकी डिमांड बढ़ने लगी है. इस कड़ी में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए सरकार ने बिहार के दरभंगा से कनाडा के लिए वैल्यू-एडेड फ्लेवर वाले मखाने (फॉक्स नट्स) की पहली समुद्री शिपमेंट को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया है. कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के तहत ये पहल न केवल ग्लोबल बाजारों में बिहार के प्रीमियम कृषि उत्पादों को बढ़ावा दे रही है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो रही है.
समुद्री रास्ते से कनाडा पहुंचा बिहार का मखाना
मुंद्रा बंदरगाह के जरिए कनाडा स्थित जेडकेवी फूड्स को भेजे गए इस शिपमेंट में दो कंटेनरों में पैक कुल 7 मीट्रिक टन फ्लेवर मखाना शामिल है. इस मखाने की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग न्यूट्रीविन एग्रो प्राइवेट लिमिटेड द्वारा अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप की गई है. यह इस बात का प्रमाण है कि भारत के छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में खाद्य प्रसंस्करण, वैल्यू-एडिशन और निर्यात संबंधी मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता तेजी से बढ़ रही है.
वैश्विक बाजार में भारत का दबदबा और उत्पादन
भारत दुनिया का सबसे बड़ा मखाना उत्पादक देश है, जिसमें वैश्विक आपूर्ति का लगभग 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा अकेला भारत प्रदान करता है. देश के कुल उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी लगभग तीन-चौथाई है. उद्यानिकी सांख्यिकी विभाग के अनुसार, वर्ष 2025-26 के दूसरे अग्रिम अनुमानों के मुताबिक भारत का कुल मखाना उत्पादन बढ़कर 80,590 मीट्रिक टन हो गया है. पारंपरिक तालाब की खेती से लेकर आधुनिक फील्ड-सिस्टम तकनीक और 'स्वर्ण वैदेही' व 'सबौर मखाना-1' जैसी उन्नत किस्मों के इस्तेमाल से उत्पादकता में भारी सुधार हुआ है.
सरकार की खास योजनाएं और राष्ट्रीय मखाना बोर्ड
मखाने के बढ़ते महत्व को देखते हुए केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट में 'राष्ट्रीय मखाना बोर्ड' की स्थापना की है, जिसका औपचारिक शुभारंभ सितंबर 2025 में बिहार में किया गया था. इसके साथ ही मखाना विकास के लिए केंद्रीय क्षेत्र योजना के तहत 2025-26 से 2030-31 की अवधि के लिए 476.03 करोड़ रुपये का परिव्यय मंजूर किया गया है. यह योजना अनुसंधान, गुणवत्तापूर्ण बीज, कटाई के बाद की तकनीकों, ब्रांडिंग और निर्यात को मजबूत करने पर केंद्रित है.
निर्यात और घरेलू बाजार का भविष्य
भारत हर वर्ष 60,000 मीट्रिक टन से अधिक मखाने का उत्पादन करता है, जिसमें से लगभग 40 प्रतिशत का निर्यात किया जाता है. अमेरिका (40%), कनाडा (20%) और यूएई (17%) हमारे प्रमुख निर्यात बाजार हैं. वहीं, जर्मनी, नेपाल और ब्रिटेन जैसे देश प्रीमियम कीमतें प्रदान करते हैं. विशेषज्ञों का अनुमान है कि स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और सुपरफूड्स की मांग के कारण घरेलू मखाना बाजार 2029-30 तक 11,000 से 12,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. अलग HSN कोड मिलने से अब मखाना निर्यात के सटीक आंकड़े भी मिलने लगे हैं, जिससे इस सेक्टर का भविष्य बेहद उज्ज्वल नजर आ रहा है.
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