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ATF Price Hike: देश में LPG, PNG, CNG के बाद जेट फ्यूल के भी दाम 5.5% बढ़े, क्‍या महंगा होगा हवाई सफर?

ATF Prices Hike: समाचार एजेंसी ANI ने इंडियन ऑयल से जुड़े सूत्रों के हवाले से ये जानकारी दी है. जेट फ्यूल महंगा होने के बाद लोगों के बीच चर्चा हो रही है कि क्‍या अब हवाई यात्रा महंगी हो जाएगी. यहां जानिए कितना महंगा हुआ जेट फ्यूल.

ATF Price Hike: देश में LPG, PNG, CNG के बाद जेट फ्यूल के भी दाम 5.5% बढ़े, क्‍या महंगा होगा हवाई सफर?
जेट फ्यूल महंगा हुआ, क्‍या हवाई यात्रा भी महंगी हो जाएगी?
(NDTV File Photo)

ATF Price Hikes: सितंबर का महीना महंगाई के कई झटके लेकर आया है. इस महीने के पहले दिन आज 1 सितंबर को देश में LPG, CNG और PNG की कीमतों के बाद अब हवाईजहाज में इस्‍तेमाल होने वाले ATF यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतें भी बढ़ा दी गई हैं. जेट फ्यूल की कीमतों में करीब 5.5 फीसदी या 6.28 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. ये कीमतें घरेलू एयरलाइंस के लिए बढ़ाई गई हैं. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि क्‍या आने वाले समय में हवाई यात्रा महंगी हो जाएगी. हालांकि जानकारों के अनुसार, हवाई यात्रा को और भी कई फैक्‍टर्स प्रभावित करते हैं. 

अब ATF की कितनी कीमत हो गई? 

हमारी सहयोगी वेबसाइट NDTV प्रॉफिट ने IOCL सूत्रों के हवाले से बताया है कि घरेलू एयरलाइंस के लिए ATF की कीमतें 115 रुपये प्रति लीटर से 6.28 रुपये बढ़ाकर 121.28 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं. समाचार एजेंसी PTI ने भी इस खबर की पुष्टि की है. 

एयरलाइंस का खर्चा बढ़ेगा तो क्‍या हवाई सफर भी महंगा होगा? 

ATF की कीमतें बढ़ने के चलते इंडिगो, एयर इंडिया, स्‍पाइसजेट और अकासा एयर जैसी घरेलू एयरलाइन कंपनियों की ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ जाएगी. कारण कि जेट फ्यूल उनके सबसे बड़े खर्चों में से एक होता है. जेट फ्यूल की ऊंची कीमतें हवाई किराए में बढ़ोतरी का कारण बन सकती हैं. हालांकि एयर टिकट की कीमतें यात्रियों की मांग, एयरलाइंस के बीच कंपटीशन और सीट की उपलब्धता जैसे फैक्‍टर्स से भी प्रभावित होती हैं. 

ये बढ़ोतरी 1 अगस्त को हुई वैसी ही बढ़ोतरी के बाद हुई है, जब ATF की कीमतें लगभग 5 रुपये प्रति लीटर बढ़ाकर 110 रुपये से 115 रुपये प्रति लीटर कर दी गई थीं. उससे पहले, जुलाई में फ्यूल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी. 

देश में, एविएशन फ्यूल आमतौर पर एयरलाइन की ऑपरेटिंग कॉस्ट का 35 से 40 प्रतिशत होता है, जिससे ATF दरों में कोई भी बदलाव इंडस्ट्री की प्रॉफिटेबिलिटी (मुनाफे) के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बन जाता है. इसलिए, इंडस्ट्री हवाई टिकट की दरें बढ़ाकर ग्राहकों पर इसका बोझ डाल सकती है.

फिक्स्ड प्राइसिंग फॉर्मूला अपनाने वाली एयरलाइन फायदे में

इस साल की शुरुआत में, सरकार ने एक प्राइस स्टेबिलाइजेशन स्कीम शुरू की थी, जो एयरलाइंस को तीन साल तक के लिए फ्यूल की दरें लॉक करने और ग्लोबल ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के असर को कम करने की सुविधा देती है.

नई व्यवस्था के तहत, जो घरेलू एयरलाइन इस स्वैच्छिक योजना को चुनती हैं, वे 115 रुपये प्रति लीटर की फिक्स्ड ATF कीमत का भुगतान करेंगी, जो पहले 104.93 रुपये प्रति लीटर थी. घरेलू एयरलाइंस इस योजना के तहत एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों को तीन साल तक के लिए लॉक कर सकती हैं.

जो एयरलाइंस इस फ्रेमवर्क से बाहर रहने का विकल्प चुनती हैं, वे मार्केट-लिंक्ड दरों पर फ्यूल खरीदना जारी रखेंगी. जो एयरलाइंस इसमें शामिल होती हैं, वे लॉक-इन अवधि के दौरान इंटरनेशनल बेंचमार्क कीमतों में उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रहेंगी, जबकि इसमें शामिल न होने वाली एयरलाइंस को कीमतों में गिरावट का फायदा तो मिल सकता है, लेकिन भविष्य में होने वाली किसी भी बढ़ोतरी का बोझ भी उन्हें ही उठाना होगा.

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