अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए हवाई ईंधन (ATF) की कीमतों में लगातार दूसरे महीने बढ़ोतरी की गई है, जिससे विदेशी यात्रा महंगी होने की आशंका बढ़ गई है. हालांकि, घरेलू विमानन कंपनियों के लिए जेट फ्यूल की कीमतों में मई महीने के लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है. इंडियन ऑयल (IOC) द्वारा जारी बयान के अनुसार, कच्चे तेल की बढ़ती लागत के बावजूद घरेलू एयरलाइंस के लिए कीमतों को स्थिर रखा गया है क्योंकि तेल कंपनियां बढ़े हुए इनपुट कॉस्ट के बोझ को खुद वहन कर रही हैं. इसी वजह से घरेलू एयरलाइंस के लिए हवाई ईंधन (ATF) के दाम मई महीने में नहीं बढ़ाए गए हैं.
इसका सीधा मतलब यह है कि देश के भीतर हवाई सफर करने वाले यात्रियों को फिलहाल राहत है. हालांकि, इंटरनेशनल रूट पर सफर करने वालों के लिए थोड़ी मुश्किल हो सकती है क्योंकि विदेशी उड़ानों के लिए फ्यूल की कीमतें लगातार दूसरे महीने बढ़ा दी गई हैं.बता दें कि ATF की कीमतें आमतौर पर हर महीने की 1 तारीख को इनपुट कॉस्ट के आधार पर तय की जाती हैं.
ATF पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में भी कटौती
इसके साथ ही सरकार ने 1 मई से एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी घटा दी है. वित्त मंत्रालय के मुताबिक ATF यानी विमान ईंधन पर एक्सपोर्ट ड्यूटी ₹33 प्रति लीटर तय की गई है. इस पर सिर्फ स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) लागू होगा.नए फैसले में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के साथ डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी घटा दी है. वहीं पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी पहले की तरह शून्य रखी गई है. अब डीजल के एक्सपोर्ट पर कुल ड्यूटी ₹23 प्रति लीटर तय की गई है. इसमें स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) ₹23 है, जबकि रोड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (RIC) शून्य रखा गया है. सरकार ने साफ किया है कि पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर पहले की तरह ही कोई ड्यूटी नहीं लगेगी. यानी पेट्रोल निर्यात पर टैक्स पूरी तरह शून्य बना रहेगा.
बता दें कि बीते महीने अप्रैल महीने में सरकार ने पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई थी. ATF पर ड्यूटी ₹42 प्रति लीटर कर दी गई थी.डीजल पर ड्यूटी बढ़ाकर ₹55.5 प्रति लीटर कर दी गई थी.अब नए फैसले में इन दोनों पर ड्यूटी घटाकर कंपनियों को राहत दी गई है.
ATF से जुड़े नियमों में बदलाव
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ATF से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है. अब ATF को सिंथेटिक फ्यूल के साथ मिलाकर इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है. सरकार के इस फैसले से एविएशन सेक्टर में नए और वैकल्पिक फ्यूल के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा. इसके साथ फ्यूल स्टैंडर्ड्स को लेकर साफ नियम बनेंगे और इंडस्ट्री में टेक्नोलॉजी के हिसाब से बदलाव आसान होगा.
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