- कच्छ कॉपर लिमिटेड ने स्थिरता, डीकार्बोनाइजेशन को लेकर एक महत्वाकांक्षी विकास रणनीति पेश की है
- कंपनी अपनी स्मेल्टिंग क्षमता पांच लाख से बढ़ाकर दस लाख टन प्रतिवर्ष करने की योजना बना रही है
- कंपनी अपने परिचालन में 115 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा जोड़कर कार्बन उत्सर्जन कम करने पर जोर दे रही है
अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की सहायक कंपनी कच्छ कॉपर लिमिटेड (केसीएल) ने स्थिरता, डीकार्बोनाइजेशन और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर आधारित एक महत्वाकांक्षी विकास रणनीति पेश की है. कंपनी का टारगेट भारत की कॉपर प्रोडक्शन कैपेसिटी को मजबूत करना और देश के ऊर्जा परिवर्तन (एनर्जी ट्रांजिशन) को समर्थन देना है.
कच्छ क्षेत्र के मुंद्रा में ग्रीनफील्ड कॉपर रिफाइनरी संचालित करने वाली कंपनी की वर्तमान कॉपर स्मेल्टिंग क्षमता 5 लाख टन प्रतिवर्ष है. कंपनी इसे भविष्य में बढ़ाकर 10 लाख टन प्रतिवर्ष करने की योजना बना रही है. यह विस्तार पूरा होने पर इस संयंत्र को दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-लोकेशन कस्टम कॉपर स्मेल्टर बना सकता है.
कंपनी की क्या है रणनीति?
अपनी पहली सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट में कंपनी ने पर्यावरण, सामाजिक और सुशासन (ईएसजी) सिद्धांतों को कारोबारी रणनीति का हिस्सा बनाने की प्रतिबद्धता जताई है, जिसके प्रमुख फोकस क्षेत्रों में नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल, जिम्मेदार जल प्रबंधन, उत्सर्जन नियंत्रण, संसाधन संरक्षण और सामुदायिक विकास शामिल हैं.
डीकार्बोनाइजेशन रोडमैप के तहत कंपनी अपने परिचालन में 115 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा जोड़ने की योजना बना रही है, जिससे उत्पादन गतिविधियों का कार्बन फुटप्रिंट कम होगा और कंपनी के दीर्घकालिक स्थिरता लक्ष्यों को समर्थन मिलेगा.
कॉपर की मांग बढ़ने की उम्मीद
जल संरक्षण भी कंपनी की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है. रिपोर्ट के अनुसार, कच्छ कॉपर अपने संचालन में लगभग 100 प्रतिशत डिसैलिनेटेड (समुद्री जल शुद्धिकृत) पानी का उपयोग करती है और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज नीति का पालन करती है. इसका उद्देश्य मीठे पानी पर निर्भरता कम करना और पर्यावरणीय प्रभाव को घटाना है.
कंपनी ने औद्योगिक उत्सर्जन नियंत्रण में भी प्रगति का दावा किया है. उसके अनुसार, वह वर्तमान में 99.8 प्रतिशत सल्फर उत्सर्जन का उपचार उन्नत पर्यावरणीय तकनीकों के जरिए कर रही है.
अडाणी समूह ने 1.2 अरब डॉलर का किया है निवेश
यह सस्टेनेबिलिटी रोडमैप अदाणी समूह के कॉपर सेक्टर में बड़े निवेश का हिस्सा है. समूह ने इस परियोजना में 1.2 अरब डॉलर का निवेश किया है, जिसके जरिए घरेलू कॉपर उत्पादन बढ़ाने और भारत के औद्योगिक इकोसिस्टम को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है.
यह विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब बिजली ग्रिड, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसी ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में कॉपर की मांग तेजी से बढ़ रही है. घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ने से भारत की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है.
भारत ने 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य रखा है. इसी को ध्यान में रखते हुए कच्छ कॉपर की क्षमता विस्तार और सस्टेनेबिलिटी पहलों को औद्योगिक विकास और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
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(Disclaimer: New Delhi Television is a subsidiary of AMG Media Networks Limited, an Adani Group Company.)
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