8th Pay Commission Update: सरकार के एक करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों और पेंशन पाने वालों के लिए एक अच्छी खबर है. 8वां वेतन आयोग पर एक्शन अब तेजी से लिए जा रहे हैं. दिल्ली में इसको लेकर काफी चर्चा हो रही है, क्योंकि कमीशन ने कर्मचारी यूनियनों और संगठनों के साथ बातचीत शुरू कर दी है. हर दिन नए अपडेट्स सामने आ रहे हैं. अब खबर सामने आई है कि 28 से 30 अप्रैल के बीच सरकारी कर्मचारियों की यूनियनों से बातचीत शुरू हो जाएगी. इस खबर में जानिए कि इन बैठकों के मायने क्या हैं? फिटमेंट के लिए संगठनों ने क्या डिमांड रखी है? अगर इस मांग को मान लिया जाता है तो इसका असर सैलरी पर कितना देखने को मिलेगा?
बैठकों का मकसद
8वां वेतन आयोग चाहता है कि ज्यादा से ज्यादा कर्मचारी यूनियन अपनी बातें और सुझाव रखें. लेकिन समय कम होने की वजह से कुछ यूनियनों से बातचीत बाद में की जाएगी. अभी जो बैठकें चल रही हैं, उनमें तीन बातों पर चर्चा हो रही है, जिसमें शामिल हैं-
- कर्मचारियों की सैलरी कितनी बढ़ाई जाए
- भत्तों में क्या बदलाव हो
- पेंशन व्यवस्था को कैसे बेहतर किया जाए
फिटमेंट फैक्टर बदलेगा सारे समीकरण
पूरी सैलरी का सबसे अहम हिस्सा फिटमेंट फैक्टर होता है. इसे आप एक गुणा करने वाला नंबर समझ सकते हैं, जिससे पुराने बेसिक पे को गुणा करके नई सैलरी निकाली जाती है. 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था. इसी वजह से न्यूनतम बेसिक सैलरी 7 हजार से बढ़कर 18 हजार रुपये हुई थी. अब 8वें वेतन आयोग के लिए कर्मचारी यूनियन 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं. इसका मतलब क्या होगा? अगर सरकार 3.83 फिटमेंट फैक्टर मान लेती है, तो अभी की 18 हजार रुपये वाली बेसिक सैलरी सीधे बढ़कर करीब 69 हजार रुपये हो सकती है. यानी सैलरी में करीब तीन गुना की इजाफा.
69 हजार रुपये की मांग क्यों?
यूनियनों की बात सीधी है. उनका कहना है कि 2016 के बाद से महंगाई बहुत बढ़ गई है. अब घर किराए पर लेना, बच्चों की पढ़ाई और इलाज कराना पहले से कहीं ज़्यादा महंगा हो गया है. महंगाई भत्ता (DA) 50% से ऊपर चला गया है, यानी खर्च बढ़ने की बात साफ दिखती है. ऐसे में पुरानी सैलरी से रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो रहा है. इसलिए कर्मचारी चाहते हैं कि उनकी सैलरी आज के ज़माने और आज के खर्चों को देखते हुए बढ़ाई जाए, ना कि पुराने नियमों के हिसाब से.
कैसी होगी आपकी नई सैलरी?
सबसे पहले आपकी पुरानी बेसिक सैलरी के लिए फिटमेंट फैक्टर फिक्स किया जाएगा. फिर इसे बेसिक सैलर से गुणा किया जाएगा, जिसके बाद आपकी नई बेसिक सैलरी बनेगी. फिर नई बेसिक सैलरी में महंगाई भत्ता, हाउस रेंट अलाउंस और ट्रैवल अलाउंस जोड़े जाएंगे. यही वजह है कि फिटमेंट फैक्टर में थोड़ा चेंज होने पर भी आपकी हर महीने मिलने वाली सैलरी में हजारों रुपये का फर्क पड़ सकता है.
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