जम्मू-कश्मीर में अचानक से लॉइन ऑफ कंट्रोल से लेकर इंटरनेशन बार्डर तक का माहौल गर्म हो रखा है। ऐसा कोई दिन नहीं बीत रहा कि सरहद पर फायरिंग की घटना न हो। लोग घर-बार छोड़ कर महफूज इलाके की ओर जा रहे हैं। पूरा का पूरा सरहदी इलाका वॉर जोन में तब्दील हो रहा है। कहां तो ये हो रहा था कि अब भारत−पाक के बीच अच्छे दिन आ रहे हैं, लेकिन अब हो रहा है ठीक उल्टा।
हुर्रियत के नेताओं से पाक उच्चायुक्त की मुलाकात को लेकर भारत-पाक विदेश सचिव स्तरीय बातचीत रद्द कर दी गई। लेकिन ये पहले भी हुआ है कि भारत-पाक के बातचीत से पहले हुर्रियत के नेता पाक उच्चायुक्त से मिलते रहे हैं। हां ये अंतर जरूर है कि इस बार सत्ता पर मोदी सरकार काबिज है।
कई जानकार सवाल उठाते हैं कि बातचीत इस बात को लेकर क्यों नहीं टूटी कि पाकिस्तान सरहद पर फायरिंग से बाज नहीं आ रहा है। अब तो गांव के गांव खाली हो रहे हैं, लिहाजा बातचीत का टूटना कोई शुभ संकेत नहीं है।
सीमा पर टेंशन को लोग इस बात से जोड़कर देख रहे हैं कि ये सब पाकिस्तान अपने अंदरूनी हालात से ध्यान हटाने के लिए कर रहा है। पहले जो जुबान कांग्रेस बोलती थी, अब वही जुबान बीजेपी बोल रही है। जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री तो कह रहे हैं कि पता नहीं केंद्र सरकार कैसे इससे निपटेगी। वही रक्षामंत्री अरुण जेटली की मानें तो सरकार पाकिस्तान को मुहतोड़ जवाब दे रही है। खैर वजह जो भी हो ये तो सही है सरहद पर हालात बद से बदत्तर होते जा रहे हैं।
This Article is From Aug 24, 2014
राजीव रंजन की कलम से : सरहद पर क्यों बढ़ी फायरिंग?
Rajeev Ranjan
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Updated:नवंबर 19, 2014 16:24 pm IST
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Published On अगस्त 24, 2014 18:28 pm IST
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Last Updated On नवंबर 19, 2014 16:24 pm IST
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