मोहम्मद अली ने साठ के दशक में वियतनाम युद्ध के खिलाफ खुलकर अपनी राय जाहिर की थी. उनकी उस वक्त बेहद आलोचना हुई थी और जेल जाने की नौबत तक आ गई थी. महान अली ने कहा था, "मेरा जमीर मुझे अपने भाइयों या किसी अश्वेत व्यक्ति या किसी गरीब भूखे पर एक ताकतवर अमेरिका के लिए गोली चलाने की इजाजत नहीं देता. और उन पर किसलिए गोली चलाऊं? उन्होंने मुझे कभी नीग्रो नहीं कहा, कभी मुझ पर हमला नहीं किया, कभी मुझ पर कुत्ते नहीं छोड़े, मुझसे मेरी राष्ट्रीयता नहीं छीनी, बलात्कार नहीं किया या मेरे माता-पिता को नहीं मारा. तो फिर मैं उन्हें क्यों मारूं? मैं उन पर गोली क्यों चलाऊं? मुझे जेल में डाल दो."
मोहम्मद अली ने अपनी अभिव्यक्ति की आजादी का इस्तेमाल उस दौरे में किया जब युद्ध के हालात थे. ऐसे में अली की बातों के बड़े मायने थे. मोहम्मद अली ने जो कहा उस पर कायम रहे, चाहे जेल जाने की नौबत आ गई.
पिछले कुछ दिनों से गुरमेहर कौर के एक वीडियो के बाद कई भारतीय खिलाड़ी भी युद्ध की तरह ही खेमों में बंटते दिख रहे हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा गुरमेहर कौर के वीडियो पर भारतीय खिलाड़ी सोशल मीडिया के मैदान पर भिड़ते नज़र आ रहे हैं. पहले क्रिकेटर वीरेन्द्र सहवाग ने एक प्लैकार्ड लेकर गुरमेहर कौर के वीडियो पर छक्का लगाने की कोशिश की.
सहवाग ने प्लैकार्ड पर लिखा, "मैंने दो तिहरे शतक नहीं लगाए, मेरे बल्ले ने लगाए." इसके जवाब में गुरमेहर भावुक हो गईं और कहा, "सहवाग के ट्वीट को देखकर मेरा दिल टूट गया."
फिर पहलवान योगेश्वर दत्त ने बयानों का 'दांव' लगा दिया. उन्होंने देशभक्ति का सहारा लेकर गुरमेहर के बयान की तुलना हिटलर और ओसामा बिन लादेन से कर दी. जाहिर है यह खिलाड़ी भी आलोचकों के निशाने पर आ गए. लेकिन बॉलीवुड लेखक जावेद अख़्तर इस आलोचना में भी शायद एक सीमा लांघ गए. उन्होंने ट्वीट किया, "ये समझा जा सकता है कि एक थोड़ा-बहुत पढ़ा-लिखा खिलाड़ी या एक पहलवान एक शहीद की बेटी को ट्रोल करता है, लेकिन कुछ पढ़े-लिखे लोगों को क्या हो गया है."
फिर सहवाग ने यू-टर्न लिया और योगेश्वर जावेद अख्तर से जूझ गए. पहलवान बबीता फोगाट भी 'मैदान-ए-जंग' में कूद पड़ीं. इस बीच सहवाग के बयान पर सोशल मीडिया पर उन्हें इतने बाउंसर पड़े कि उन्होंने यू-टर्न ले लिया. गौतम गंभीर भी ट्वीट पर सक्रिय हो गए. लिखा, "अभिव्यक्ति की आजादी सबके लिए बराबर है."
फिर गौतम गंभीर और बबीता फोगाट जैसे खिलाड़ी अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर पक्ष-विपक्ष में खड़े दिखे. गंभीर का ट्वीट आया, "वक्त आ गया है कि इसका इस्तेमाल जीवन के सभी पहलू में हर रोज किया जाए."
इन सबके बीच स्टार ओलिंपियन बैडमिंटन खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा ने लगे रहो मुन्ना भाई की तरह ट्वीटरबाज़ों के लिए Get Well soon का संदेश डाल दिया. ज्वाला ने लिखा, "ये देखकर दुख होता है कि खिलाड़ी बिना (गुरमेहर के) संदेश के प्रसंग को समझे इसमें उलझ गए... इस संदेश का मतलब था...शान्ति!!!
अब सोशल मीडिया के मैदान पर अगली गुगली कैसी और किसकी पड़ेगी इसका भी इंतज़ार है.
(विमल मोहन एनडीटीवी इंडिया में कार्यरत हैं...)
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OPINION
This Article is From Mar 01, 2017
सोशल मीडिया पर राष्ट्रवाद के खेल में उलझ गए खिलाड़ी
मोहम्मद अली ने साठ के दशक में वियतनाम युद्ध के खिलाफ खुलकर अपनी राय जाहिर की थी. उनकी उस वक्त बेहद आलोचना हुई थी और जेल जाने की नौबत तक आ गई थी. महान अली ने कहा था, "मेरा जमीर मुझे अपने भाइयों या किसी अश्वेत व्यक्ति या किसी गरीब भूखे पर एक ताकतवर अमेरिका के लिए गोली चलाने की इजाजत नहीं देता. और उन पर किसलिए गोली चलाऊं? उन्होंने मुझे कभी नीग्रो नहीं कहा, कभी मुझ पर हमला नहीं किया, कभी मुझ पर कुत्ते नहीं छोड़े, मुझसे मेरी राष्ट्रीयता नहीं छीनी, बलात्कार नहीं किया या मेरे माता-पिता को नहीं मारा. तो फिर मैं उन्हें क्यों मारूं? मैं उन पर गोली क्यों चलाऊं? मुझे जेल में डाल दो."
- मार्च 01, 2017 19:32 pm IST
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