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This Article is From Jun 01, 2018

न दंगा चला न जिन्‍ना, चला गन्‍ना

Nidhi Kulpati
  • ब्लॉग,
  • Updated:
    जून 01, 2018 03:54 am IST
    • Published On जून 01, 2018 03:54 am IST
    • Last Updated On जून 01, 2018 03:54 am IST
'न दंगा चला न जिन्ना...बस गन्ना चला'...कैराना के चुनावी नतीजों के बाद राष्ट्रीय लोकदल के नेता जयंत चौधरी का बयान सटीक बैठ गया......पश्चिमी उत्तरप्रदेश के  कैराना लोकसभा सीट पर एकजुट-विपक्ष की जीत ने राजनीतिक कयासों का भंडार सामने लाकर रख दिया है.....मोदी सरकार में इस राज्य का सबसे ज्यादा सांसद -विधायक देने का योगदान रहा है....तो यहां हार की गहराई की समीक्षा हो रही है.

कैराना में गोरखपुर और फूलपुर की जीत के बाद विपक्ष ने साझेदारी को फिर परखना चाहा और अंजाम उसके मन का रहा......अखिलेश यादव ने अपने उमीदवार को आरएलडी के टिकट पर लड़वाया ...पास के नूरपुर में सपा के उमीदवार के लिए जयंत चौधरी ने जा कर टिकट मांगे.....मायावती की बसपा उपचुनाव नहीं लड़ती और पिछली बार की तरह इस बार भी अपना समर्थन बरकरार रखा.....मायावती के हौसले कर्नाटक में जेडीएस के समझौते के साथ बुलंद बने हुए हैं....कांग्रेस ने इस बार अपना उमीदवार मैदान में नही उतारा....तो आज अखिलेश यादव ने इस एकजुटता पर बसपा,आरएलडी,एनसीपी,कांग्रेस,आप,निशाद और पीस पार्टी का धन्यवाद अदा किया....साथ ही बीजेपी पर तंज भी कस दिया कि वो उसी की तरह सोशल इंजिनियरिंग कर रहे हैं....

बीजेपी के लिए कैराना लोकसभा का झटका गहरा है ....यह वह लोकसभा सीट है जहां से दो मंत्री आते हैं... राज्य के गन्ना मंत्री सुरेश राणा और केंद्र में डॉ घर्मसिंह सैनी, स्वतन्त्र प्रभार राज्यमंत्री,आयुष मंत्रालय ......लेकिन यहां  5 में से 4 सीटों पर हार हुई है..... थाना भवन से गन्ना मंत्री सुरेश राणा विधायक...यहां पर बीजेपी 12837 वोटों से हारी..... नकुड़ से मंत्री धर्मसिंह सैनी विधायक हैं जहा पर बीजेपी 32665 वोटों से हारी ..... शामली में बीजेपी 5878 वोटों से हारी... कैराना  में  बीजेपी 7451 वोटों से जीती... गंगोह में बीजेपी 12961 वोटों से हारी....यानी मंत्रियों का न प्रचार चला न प्रभाव ...असर तो दो बार मुख्यमंत्री आदित्यनाथ का भी नहीं चला....पास में के बागपत में प्रधानमंत्री तक आए थे लेकिन शायद गन्ना किसानों की नाराज़गी को दूर नहीं कर पाए.....पूर्व में गोरखपुर और पश्चिम में कैराना तक बीजेपी के लिए यूपी के नतीजे ठीक नहीं हैं....

2013 में मुजफ्फरनगर के दंगों के बाद जाट और मुस्लिम समाज में दरार पड़ गई थी...वोट भी बंट गए थे और जीत मिली थी बीजेपी को लेकिन इस बार ये दोनों समाज एकजुट रहे.....इनका  पश्चिमी उत्तरप्रदेश में दबदबा है...... इस बार भी जिन्ना की फोटो का मसला गर्माने की कोशिश की गई लेकिन इस बार गन्ना किसान के पेट पर मार सरकार पर भारी पड़ गई......गन्ना किसानों ने आज के नतीजों के बाद कहा कि हमसे बार-बार 14 दिनों में पेमेन्ट का वादा किया था जिसे निभाया नहीं गया......4 महिनों से किसानों का बकाया नहीं दिया गया है जिससे वे खासे परेशान हैं.......किसान समझ रहे हैं कि wto में वादा है तो चीनी का आयात को रोका नहीं जा सकता ....लेकिन अपने गन्ने के पेमेन्ट नहीं मिलने के बाद किसानों ने सरकार को संदेश भेजने का मन बनाया है.....किसानों का ये भी मानना है कि चौधरी चरण सिंह के बाद बीजेपी पर भरोसा किया गया था लेकिन वो इस बार टूट गया है.....अब देखना होगा की बीजेपी की केंद्र और राज्य की सरकार ये भरोसा 2019 से पहले कैसे जीतती है....

लेकिन सवाल विपक्षी एकता के पुख्तापन का भी है.....कर्नाटक में जेडीएस के साथ गठबंधन के दौरान मायावती - प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के सवाल पर मुस्कुरा दी थीं......ममता दीदी की अपनी कोशिशें और मुलाकातें जारी हैं....आज उन्होंने महेशतला में जीत के बाद  दिल्ली चलो का नारा फिर बुलंद किया......इन दो परिपक्व नेताओं के साथ ही युवा नेताओं की होड़ में अखिलेश यादव, राहुल गांधी के साथ तेजस्वी यादव, जंयत चौधरी की कतार लंबी है..... कांग्रेस के लिए क्षेत्रीय दलों और नेताओं को कितनी जमीन दी जाए देखने लायक रहेगा......कर्नाटक में 23 मई को मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की शपथ को एक हफ्ता हो चला है लेकिन अब तक मंत्रिमंडल का स्वरूप तय नहीं हो पाया है.....बहरहाल 2019 की बिसात बिछ चुकी है देखना होगा पांसे कैसे चले जाएंगे...


निधि कुलपति एनडीटीवी इंडिया में सीनियर एडिटर हैं.

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति एनडीटीवी उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार एनडीटीवी के नहीं हैं, तथा एनडीटीवी उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.

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