- भाजपा ने आठ सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम घोषित किए, जिसमें हरदीप सिंह पुरी और बी एल वर्मा शामिल नहीं हैं
- दोनों का राज्य सभा कार्यकाल समाप्त हो रहा है, पर वे बिना सांसद बने छह महीने तक मंत्री रह सकते हैं
- मोदी मंत्रिपरिषद में इस महीने फेरबदल की संभावना है, जिसमें नए चेहरों को मौका मिलने की संभावना है
भाजपा ने आज उत्तर प्रदेश की आठ राज्य सभा सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए. इसमें केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और उपभोक्ता मामलों के राज्य मंत्री बी एल वर्मा का नाम नहीं है. दोनों उत्तर प्रदेश से राज्य सभा सांसद हैं और उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है. दोनों नेता बिना सांसद रहे भी छह महीने तक मंत्री बने रह सकते हैं. अगले छह महीने तक भाजपा के लिए राज्य सभा की कोई नई सीट जीतने की उम्मीद नहीं है. ऐसे में इन दोनों मंत्रियों के मंत्रिपरिषद में बने रहने पर प्रश्न चिन्ह लग गया है.
इस तरह अब मोदी मंत्रिपरिषद में पांच मंत्री पद खाली हो सकते हैं. धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से दिया था. वहीं राज्य सभा कार्यकाल समाप्त होने पर जॉर्ज कूरियन और रवनीत सिंह बिट्टू ने मंत्रिपरिषद से इस्तीफ़ा दे दिया था. परिवहन राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष बना दिए गए हैं, जबकि वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी यूपी भाजपा के अध्यक्ष बनाए गए हैं. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को भाजपा का कोषाध्यक्ष भी बनाया गया है. ऐसे में एक व्यक्ति एक पद के सिद्धांत के तहत वे कब तक मंत्री बने रहेंगे, यह भी पूछा जा रहा है.
सूत्रों के अनुसार मोदी मंत्रिपरिषद में इसी महीने फेरबदल हो सकता है. सरकार पहले परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए तीन दिनों का विशेष संसद सत्र बुला सकती है. यह सत्र नवरात्रि समाप्त होने के बाद हो सकता है. इसके तुरंत बाद मंत्रिपरिषद में फेरबदल की संभावना है. पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र कहा जा रहा था कि हरदीप सिंह पुरी को फिर से राज्य सभा दी जा सकती है. वे इस समय कैबिनेट में एकमात्र सिख चेहरा हैं. लेकिन अब उन्हें राज्य सभा न मिलने के बाद कहा जा रहा है कि पार्टी पंजाब से किसी सिख चेहरे को मंत्रिपरिषद में ला सकती है.
क्या हरसिमरत कौर बादल को फिर से मिलेगा मंत्री बनने का मौका?
अगर अकाली दल के साथ गठबंधन होता है तो ऐसे में हरसिमरत कौर की वापसी की संभावना भी है जो महिला और सिख दोनों हैं. वहीं धर्मेंद्र प्रधान की किसी बड़ी ज़िम्मेदारी की चर्चा चल रही है. 14 से अधिक मंत्रियों के पास एक से अधिक मंत्रालय हैं. ऐसे में नए चेहरों को लाकर उनकी ज़िम्मेदारी हल्की की जा सकती है. अभी 29 कैबिनेट मंत्री, पांच राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार और 34 राज्य मंत्री हैं. इस तरह प्रधानमंत्री को मिला कर मंत्रिपरिषद में 69 सदस्य हैं. संविधान के अनुच्छेद 75(1A) के तहत अधिकतम 81 सदस्य हो सकते हैं यानी अभी 12 मंत्री और बनाए जा सकते हैं.
2029 पर फोकस करते हुए तय किए जाएंगे मंत्रियों के नाम
हालांकि मंत्रिपरिषद के फेरबदल में कई मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी भी हो सकती है. प्रदर्शन के आधार पर भी कुछ मंत्रियों को हटाया जा सकता है. आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र भी कुछ राज्यों से मंत्रियों की संख्या बदली जा सकती है. मंत्रिपरिषद में फेरबदल करते समय 2029 लोक सभा चुनाव को ध्यान में रखा जाएगा. नए सहयोगी दलों को भी मिल सकती है मंत्रिपरिषद में जगह. टीएमसी के बाग़ियों से बनी एनसीपीआई से मंत्री बनाए जाने की अटकलें हैं.
AAP से आए 7 सांसदों और शिवसेना शिंदे को भी मिल सकता है चांस
आम आदमी पार्टी से बीजेपी में शामिल हुए सात राज्य सभा सांसदों में से किसी को पंजाब चुनाव के मद्देनज़र जगह मिल सकती है. इसके साथ ही कैबिनेट मंत्री का पद मिल सकता है. शिवसेना यूबीटी के छह सांसदों के शामिल होने से उसकी संख्या बढ़कर तेरह हो गई है. शिवसेना से श्रीकांत शिंदे के नाम की अटकलें हैं. कुछ बीजेपी नेताओं के मंत्री बनने की चर्चा थी. पर उन्हें संगठन में जगह दी गई है. जैसे स्मृति ईरानी, विनोद तावड़े, सतीश पूनिया, तरुण चुग आदि. अब राज्यों से युवा चेहरों को लाया जा सकता है.
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