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This Article is From Apr 06, 2019

गुजरात इंफ़ैंट्री बनाम अहीर बख़्तरबंद के बीच है मुक़ाबला यूपी में!

रवीश कुमार
  • ब्लॉग,
  • Updated:
    अप्रैल 06, 2019 17:36 pm IST
    • Published On अप्रैल 06, 2019 17:36 pm IST
    • Last Updated On अप्रैल 06, 2019 17:36 pm IST

गुजरात इंफ़ैंट्री रेजीमेंट. प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह दोनों समाजवादी पार्टी का घोषणापत्र पढ़कर चौंक गए होंगे. दोनों भाजपाई सोच रहे होंगे कि ये सपाई क्यों उनके राज्य के नाम पर रेजीमेंट बना रहा है? बनाना था तो गुजरात बख़्तरबंद रेजीमेंट बनाते और अहीर इंफ़ैंट्री रेजीमेंट! सैनिक स्कूल में पढ़े अखिलेश यादव का गेम प्लान है क्या. अमित शाह ने तो चचा शिवपाल से पूछा होगा कि अखिलेश क्यों अहीर बख़्तरबंद रेजीमेंट और गुजरात इंफ़ैंट्री रेजीमेंट बना रहे हैं?

यूपी जब गुजरात के मोदी को पीएम बना सकता है तो उनके राज्य के नाम पर रेजीमेंट नहीं दे सकता? यूपी का दिल बड़ा भी तो है! कहीं इसके विरोध में गुजरात में आंदोलन न हो जाए कि आप हमारे राज्य के नाम पर रेजीमेंट क्यों बना रहे हैं? क्यों सेना में भेजना चाहते हैं? सब लड़ाई में चले जाएंगे तो कारोबार कौन करेगा! मोदी जी की सेना ठीक नहीं है तो गुजरात के नाम पर सेना बनाने की बात कैसे ठीक है!

मज़ाक़ छोड़िए. पिछले दिनों कई नेताओं ने कहा कि गुजरात के लोग शहीद नहीं होते. यह बात सही नहीं है. 2017 में Scoop Whoop ने इस पर अलगf अलग जगहों पर छपी रिपोर्ट को संकलित किया है. ऋतु सिंह ने बताया था कि 31 मार्च 2017 तक गुजरात में 26,656 पूर्व सैनिक थे. गुजरात के 39 सैनिकों को बहादुरी का पुरस्कार मिला है. आतंकवाद से लड़ते हुए 20 जवानों ने बलिदान दिया है. 24 जवानों ने सीमा पर शहादत दी है. कब से कब तक का ज़िक्र नहीं है.

उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा और उत्तराखंड से सेना में ख़ूब लोग जाते हैं. कुछ राज्य से नहीं जाते. राज्यों के बीच शहीदों की संख्या को लेकर तुलना नहीं की जा सकती. वैसे यूपी से शहीदों की संख्या का पता नहीं चल पाया.

रेडिफ पर आकार पटेल की रिपोर्ट है कि नेपाल आकार गुजरात से आधा है वो सेना में गुजरात से ज़्यादा सैनिक भेजता है. गुजरात में 2009 में विशेष अभियान के बाद 719 सैनिक भर्ती हुए थे. उसके पहले 230 सैनिक भर्ती हुए थे. सेना को ही सभी राज्यों की सूची निकाल देनी चाहिए. शहीदों की भी. इससे एक लाभ यह होगा कि कोई मदद करना चाहे तो वह सीधे परिवार से संपर्क कर सकता है.

कई जगहों पर ख़ास नौकरी में जाने का ट्रेंड बन जाता है. सेना का भी बन जाता है. एक वक़्त में गुजरात के लोगों ने लंबी समुद्री यात्राएं कर दुनिया भर में कारोबार किया. वो कम साहसिक नहीं रहा होगा. मैं तो लहरों की ऊंचाई देख कर लकड़ी की नाव से उतर ही जाता! अनजान जगहों पर जाकर कारोबार करना साहसिक और दुस्साहसिक होता है. 2014 में दो गुजरातियों का यूपी के धुरंधरों को ज़ीरो पर पहुंचा देना भी कम साहसिक नहीं था!

जिस तरह से सेना का राजनीतिकरण हो रहा है. करने वाला किसी लोक लिहाज़ की परवाह नहीं करता है. उसके जवाब में तो ये सब होगा. कोई पूछेगा कि गुजरात अर्ध सैनिक बलों के शहीदों के परिवारों को चार लाख क्यों देता है और यूपी पचीस लाख क्यों? सभी राज्यों में एक नीति होनी चाहिए. एक नीति यह भी हो कि सेना को लेकर राजनीति न हो.

वैसे अखिलेश यादव को पता होना चाहिए कि मोदी और शाह अपने आप में गुजरात इंफ़ैंट्री रेजीमेंट हैं, यूपी वालों को जवाब में बख़्तरबंद रेजीमेंट बनाना पड़ गया है! फ़ायर! ढ ढ ढ ढ ढ.

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