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This Article is From Oct 05, 2017

आरजेडी के उपाध्‍यक्ष रघुवंश बाबू को ग़ुस्सा क्यों आता है?

रघुवंश बाबू ने बृहस्पतिवार को मुंह खोला तो सबको उम्मीद थी कि एक बार फिर वो नीतीश कुमार या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बुधवार शाम अर्थव्यवस्था पर दिए गए भाषण पर बोलेंगे, लेकिन उन्होंने अपनी पार्टी को ही कटघरे में खड़ा कर दिया.

आरजेडी के उपाध्‍यक्ष रघुवंश बाबू को ग़ुस्सा क्यों आता है?
राष्ट्रीय जनता दल के उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह (फाइल फोटो)
  • लालू यादव के साथ सीबीआई द्वारा पूछताछ पर रघुवंश मौन रहे
  • शिवानंद तिवारी को RJD का उपाध्‍यक्ष बनाए जाने से खफा हैं रघुवंश
  • रघुवंश सिंह बुधवार को विधायकों और ज़िला अध्‍यक्षों की बैठक से अलग रहे थे
पटना: राष्ट्रीय जनता दल के उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह नाराज़ चल रहे हैं. हालांकि वो ख़ुश बहुत कम होते हैं लेकिन इस बार उनके ग़ुस्से के केंद्र में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नहीं बल्कि राजद अध्यक्ष लालू यादव और उनका परिवार है. रघुवंश बाबू ने बृहस्पतिवार को मुंह खोला तो सबको उम्मीद थी कि एक बार फिर वो नीतीश कुमार या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बुधवार शाम अर्थव्यवस्था पर दिए गए भाषण पर बोलेंगे, लेकिन उन्होंने अपनी पार्टी को ही कटघरे में खड़ा कर दिया. सिंह के अनुसार इस साल 20 नवंबर तक जो पार्टी के संगठनात्‍मक चुनाव कराने की घोषणा को गई है वो एक औपचारिकता है जिसकी आड़ में कुछ निर्णय थोप दिए जाएंगे. रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि चुनाव दिखावा होता है जबकि किसको कौन पद दिया जाएगा ये सब पहले से तय होता है.

रघुवंश बाबू ने हाल के समय में पहली बार अपनी पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाया है. दरअसल उनके नज़दीकी लोगों का मानना है कि शायद चुनाव के माध्यम से पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को पार्टी अध्यक्ष की कमान दे दी जाए जिससे पार्टी का बेड़ा गर्क हो सकता है. जब आप मुख्यमंत्री रहते हैं तब अधिकारियों की एक टीम आपके साथ काम करती है लेकिन जब आप अध्यक्ष रबरस्टांप बनाते हैं तब पार्टी का भविष्य अंधकारमय हो जाता है, ऐसा उनके क़रीबियों का कहना है. रघुवंश सिंह इन मुद्दों पर अपनी नाराज़गी के कारण बुधवार को विधायकों और ज़िला अध्‍यक्षों की बैठक से अलग रहे थे.

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पार्टी के नेताओं की मानें तो रघुवंश बाबू राजद अध्यक्ष लालू यादव के उस फ़ैसले से ख़फ़ा हैं जिसके तहत उन्होंने शिवानंद तिवारी को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना दिया. रघुवंश प्रसाद सिंह भी पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और उनके क़रीबी मानते हैं कि लालू यादव ने ऐसा कर शिवानन्द का क़द बढ़ाया हो या नहीं, लेकिन रघुवंश प्रसाद सिंह को उनकी पार्टी के प्रति समर्पण और वफ़ादारी के बदले सम्मान की जगह एक तरह से सज़ा ही दी है. शिवानन्द पिछले दो दशक में राजद से विधायक और मंत्री हुए और जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर राज्यसभा गए. चारा घोटाले में भी वो याचिकाकर्ता रहे जिसके कारण लालू यादव को सज़ा हुई और अब वो चुनाव नहीं लड़ सकते.

फ़िलहाल बृहस्पतिवार को लालू यादव के साथ सीबीआई द्वारा पूछताछ पर रघुवंश जहां मौन रहे वहीं शिवानंद ने एक बयान देकर नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए कहा, 'नीतीश जी चतुर व्यक्ति हैं, वह जानते हैं कि लालू यादव ही उनके लिए चुनौती है. बिहार की राजनीति के मैदान में लालू जबतक उनके सामने हैं तबतक वे अपने को सुरक्षित महसूस नहीं कर सकते हैं. इसलिए लालू नीतीश के निशाने पर हैं.'

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लेकिन नीतीश कुमार के सामने संकट है. आमने-सामने लालू यादव से मुक़ाबला उनके बस का नहीं है. लालू के देहाती मुहावरों का तीर अंदर तक पहुंच जाता है. इसका जवाब अभिजात्य मिज़ाज वाले नीतीश कुमार के पास नहीं है. इसलिए उन्होंने अपने प्रवक्ताओं को लालू यादव के पीछे लगा रखा है. लेकिन समाज में और विशेष रूप से बिहार के पिछड़ों, दलितों और अकलियतों के बीच लालू की जो छवि बनी हुई है उसको तोड़ना तो दूर, उसे दरकाना भी उनके प्रवक्ताओं के बस का नहीं है. बल्कि नीतीश के लोगों की लालू के विरुद्ध अपमानजनक भाषा दलितों और पिछड़ों को लालू के पीछे और गोलबंद कर रही है.
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