भागलपुर और नवगछिया को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से पर बने 49 मीटर लंबे बेली ब्रिज का पहला ट्रायल सफल रहा. मंगलवार देर रात सीमा सड़क संगठन (BRO) की टीम की निगरानी में करीब 2.5 टन वजनी स्कॉर्पियो गाड़ी को 20 से 30 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पुल के एक छोर से दूसरे छोर तक सुरक्षित गुजारा गया.
ब्रेक टेस्ट में भी खरा उतरा पुल
पुल की मजबूती और आपातकालीन स्थितियों में इसकी भार सहन क्षमता को मापने के लिए अधिकारियों ने बीच रास्ते में गाड़ी को अचानक ब्रेक लगाकर भी टेस्ट किया गया. इस परीक्षण के दौरान भी बेली ब्रिज में किसी भी तरह की तकनीकी खामी, कंपन या अस्थिरता देखने को नहीं मिली, जिसे विशेषज्ञों ने एक बड़ा सकारात्मक संकेत माना है.
4 और 5 जून को होगा अंतिम ट्रायल
शुरुआती सफलता के बाद, अब सेतु पर बनाए गए सभी चार बेली ब्रिजों का विशेषज्ञों की देखरेख में अलग-अलग और विस्तृत परीक्षण किया जाएगा. आगामी 4 और 5 जून को इसका अंतिम चरण का ट्रायल होना तय हुआ है, जिसके बाद तैयार होने वाली तकनीकी मूल्यांकन रिपोर्ट के आधार पर ही प्रशासन द्वारा अंतिम फैसला लिया जाएगा.
हजारों आम लोगों को बड़ी राहत
विक्रमशिला सेतु इस क्षेत्र की लाइफलाइन है, जिसके बंद होने से लोगों को लंबे वैकल्पिक रास्तों का चक्कर लगाना पड़ रहा है. अंतिम मंजूरी मिलते ही जैसे ही छोटे वाहनों का आवागमन शुरू होगा, वैसे ही भागलपुर, नवगछिया, कोसी और सीमांचल क्षेत्र के हजारों यात्रियों को जाम और लंबी दूरी से बड़ी राहत मिल जाएगी.
4 मई को पुल का एक हिस्सा गिर गया था
बिहार के भागलपुर में रविवार (4 मई) देर रात विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा ट्रक की टक्कर से टकराकर गंगा नदी में समा गया था. किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई थी. विक्रमशिला सेतु को पूरी तरह से सील है. पुल पर वाहनों का आवागमन बंद कर दिया गया था. भागलपुर आने-जाने वाले यात्रियों को मुंगेर के रास्ते नवगछिया जाने की सलाह दी गई.
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