- RJD ने तेजस्वी यादव को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर पार्टी नेतृत्व में औपचारिक बदलाव किया है
- तेजस्वी यादव अब संगठन संचालन और चुनावी रणनीति के केंद्र में होंगे
- लालू यादव मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगे. पार्टी बूथ स्तर पर संगठन सुदृढ़ करने पर काम करेगी
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव सामने आया है. पार्टी ने तेजस्वी यादव को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है. यह फैसला सिर्फ एक पद का बदलाव नहीं है, बल्कि RJD के भविष्य, नेतृत्व की दिशा और आने वाले बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारी का साफ संकेत भी है. लंबे समय से यह चर्चा चल रही थी कि पार्टी में नई पीढ़ी को औपचारिक रूप से कमान दी जाएगी, और अब यह फैसला जमीन पर उतर चुका है.
तेजस्वी यादव पार्टी के बॉस

तेजस्वी यादव पहले से ही पार्टी के सबसे बड़े चेहरे हैं. 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने RJD को सबसे बड़ी पार्टी बनाया और 75 सीटें दिलाईं. नेता प्रतिपक्ष के तौर पर उन्होंने सरकार को लगातार घेरा, रोजगार, महंगाई, पलायन और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर आक्रामक राजनीति की. अब कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद उनकी भूमिका और जिम्मेदारी दोनों बढ़ गई हैं. अब वह सिर्फ विधानसभा में विपक्ष का चेहरा नहीं, बल्कि संगठन के संचालन और चुनावी रणनीति के केंद्र में होंगे.
लालू यादव की भूमिका
RJD का यह फैसला एक तरह से पीढ़ीगत बदलाव को औपचारिक रूप देता है. पार्टी के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की सेहत और उम्र को देखते हुए यह तय माना जा रहा था कि संगठन की रोजमर्रा की जिम्मेदारी किसी और को दी जाएगी. हालांकि, लालू यादव अब भी पार्टी के मार्गदर्शक बने रहेंगे, लेकिन रणनीतिक फैसलों और संगठनात्मक नियंत्रण की कमान तेजस्वी के हाथ में आना तय माना जा रहा है.

RJD का प्लान
- तेजस्वी को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का एक बड़ा मकसद संगठन को मजबूत करना है. पिछले कुछ वर्षों में RJD पर यह आरोप लगता रहा है कि पार्टी सिर्फ चुनाव के समय सक्रिय होती है, जबकि बूथ और मंडल स्तर पर संगठन कमजोर है. अब पार्टी का फोकस होगा कि हर जिले, हर प्रखंड और हर बूथ पर संगठन को सक्रिय किया जाए. कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर तेजस्वी से यह उम्मीद की जा रही है कि वह युवा नेताओं और कार्यकर्ताओं को आगे लाएंगे और संगठन में नई ऊर्जा भरेंगे.
- पार्टी का अगला बड़ा प्लान 2030 का विधानसभा चुनाव है. तेजस्वी के नेतृत्व में RJD पहले ही यह साफ कर चुकी है कि चुनाव का मुख्य एजेंडा रोजगार और विकास होगा. “10 लाख नौकरी” का वादा 2020 में RJD का सबसे बड़ा हथियार था, जिसने पार्टी को सत्ता के बेहद करीब पहुंचा दिया. अब पार्टी इस एजेंडे को और व्यापक रूप देने की तैयारी में है—सरकारी नौकरियों के साथ-साथ निजी क्षेत्र, स्टार्टअप और स्थानीय उद्योगों में रोजगार सृजन पर जोर दिया जाएगा.
- तेजस्वी के कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद सामाजिक समीकरण भी पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा होंगे. RJD की पारंपरिक ताकत यादव और मुस्लिम (MY) वोट बैंक रहा है, लेकिन पार्टी अब इससे आगे बढ़ना चाहती है. अति पिछड़ा वर्ग, दलित, महादलित और शहरी गरीब तबकों को जोड़ने की कोशिश तेज होगी. इसके लिए पार्टी संगठन में इन वर्गों के नेताओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की योजना बना रही है.

- एक और बड़ा फोकस शहरी और युवा वोटर होंगे. बिहार की आबादी का बड़ा हिस्सा युवा है, और बेरोजगारी उनके लिए सबसे बड़ा मुद्दा है. तेजस्वी खुद युवा नेता हैं और सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय रहते हैं. पार्टी की योजना है कि डिजिटल कैंपेन, सोशल मीडिया और ग्राउंड एक्टिविटी को जोड़कर युवाओं तक सीधा संदेश पहुंचाया जाए. छात्र-युवा संगठनों को फिर से सक्रिय करने पर भी काम होगा.
- महिलाओं को जोड़ना भी RJD के आगे के प्लान में शामिल है. अब तक पार्टी पर यह आरोप लगता रहा है कि महिला नेतृत्व सीमित है. तेजस्वी के कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद संगठन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, महिला विंग को मजबूत करने और महिला मुद्दों को चुनावी एजेंडे में प्रमुखता देने की तैयारी है. महंगाई, स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर महिला केंद्रित अभियान चलाए जा सकते हैं.
- RJD का एक और बड़ा लक्ष्य अपनी छवि को “सिर्फ जाति की राजनीति करने वाली पार्टी” से बाहर निकालना है. तेजस्वी लगातार यह कहते रहे हैं कि उनकी राजनीति विकास और रोजगार पर आधारित है. कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद वह इस लाइन को और मजबूती से आगे बढ़ाएंगे. पार्टी का प्रयास होगा कि शासन का एक वैकल्पिक मॉडल जनता के सामने रखा जाए—जिसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और विकास को प्राथमिकता मिले.
महागठबंधन में निर्णायक भूमिका
महागठबंधन की राजनीति भी RJD के भविष्य के प्लान का बड़ा हिस्सा है. कांग्रेस, वाम दल और अन्य सहयोगियों के साथ तालमेल बनाकर चलना तेजस्वी के लिए एक बड़ी चुनौती होगी. कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर अब गठबंधन की सीट शेयरिंग, साझा न्यूनतम कार्यक्रम और चुनावी समन्वय में उनकी भूमिका और निर्णायक होगी. पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि महागठबंधन में नेतृत्व को लेकर अब कोई भ्रम नहीं है.

तेजस्वी के सामने चुनौतियां
हालांकि, चुनौतियां भी कम नहीं हैं. सत्ता में बैठी सरकार और NDA लगातार RJD पर परिवारवाद और भ्रष्टाचार के आरोप लगाती रही है. तेजस्वी के सामने यह बड़ी चुनौती होगी कि वह पार्टी को इन आरोपों से ऊपर उठाकर एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में पेश करें. इसके लिए संगठनात्मक अनुशासन, साफ छवि वाले नेताओं को आगे लाना और मुद्दों पर आधारित राजनीति जरूरी होगी.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं
