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Bihar: बिहार का नौशाद जॉर्डन की जेल में बंद, विदेश से पत्नी को कॉल कर बोला- मुझे लड़की ने फंसाया

नौशाद का परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है. उसके विदेश जाने के बाद हालात सुधरने की उम्मीद थी, लेकिन जेल में बंद होने की सूचना से परिवार सदमे में है. पढ़िए अभिषेक मिश्रा की रिपोर्ट.

Bihar: बिहार का नौशाद जॉर्डन की जेल में बंद, विदेश से पत्नी को कॉल कर बोला- मुझे लड़की ने फंसाया
नौशाद अली के केस के बारे में अभी तक पुख्ता जानकारी सामने नहीं आई है.

बिहार के सुपौल का रहने वाला नौशाद अली पिछले कई दिनों से जॉर्डन की जेल में बंद है. उसकी पत्नी शबाना खातून ने आखिरी कॉल 6 मई को किया था, उसके बाद से कोई संपर्क नहीं हुआ. अचानक 15 मई को जॉर्डन की जेल से परिवार को सूचना मिली कि राघोपुर निवासी नौशाद कैद में है. युवक नौकरी के सिलसिले में विदेश गया था. परिवार को उम्मीद थी कि उसकी नौकरी के बाद घर के हालत सुधरेंगे, और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई बेहतर होगी. लेकिन कुछ ही महीनों में पत्नी-बच्चों को झटका लगा. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगा रहे हैं. नौशाद अली 14 दिसंबर को जॉर्डन के लिए रवाना हुआ था और 18 दिसंबर को वहां पहुंचा. अगले दिन 19 दिसंबर को कंपनी में उसका इंटरव्यू हुआ. विदेश पहुंचने के बाद वह नियमित रूप से अपने परिवार से बातचीत करता था. परिवार को विश्वास था कि अब उनके संघर्ष के दिन धीरे-धीरे समाप्त हो जाएंगे और नौशाद की कमाई से घर की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.

7 मई को नौशाद का फोन बंद

नौशाद की पत्नी शबाना खातून बताती हैं कि 6 मई तक पति से रेगुलर बातचीत होती रही. 7 मई को अचानक उसका फोन हो गया और शबाना को लगा कि काम का प्रेशर होगा. जब लगातार कई दिनों तक बात नहीं हुई तो चिंता बढ़ने लगी. पति की जानकारी पाने के लिए शबाना ने जॉर्डन में रह रहे गांव के ही युवक इम्तियाज से संपर्क किया. इम्तियाज ने बताया कि कंपनी जाकर जानकारी देने की बात कही, लेकिन उसकी जानकारी नहीं मिली. 

जेल से आया फोन और उड़ गए परिवार के होश

करीब एक सप्ताह बाद यानी 15 मई को अचानक नौशाद का फोन आया. यह फोन जॉर्डन की जेल से किया गया था. शबाना खातून को पति की आवाज सुनकर उन्हें राहत मिली, लेकिन अगले ही पल जो कुछ सुना उसके बाद हैरान रह गए. नौशाद ने फोन पर बताया कि वह जेल में है और उसे एक लड़की से जुड़े मामले में कैद किया गया है. उसने परिवार से मदद की गुहार लगाई. परिवार को अब तक मामले की पूरी जानकारी नहीं मिल पाई है और यही सबसे बड़ी चिंता का कारण बना हुआ है.

5 लाख रुपये की मांग ने बढ़ाई मुश्किल

परिवार के अनुसार, 19 मई को शबाना खातून के मोबाइल पर एक फोन आया. कॉल करने वाले ने नौशाद के बड़े भाई शमशाद का नंबर मांगा. इसके बाद शमशाद से संपर्क कर बताया गया कि नौशाद को कानूनी प्रक्रिया के जरिए छुड़ाने के लिए लंबी लड़ाई लड़नी होगी और इस पर करीब 5 लाख रुपये तक खर्च आ सकता है. दावा किया गया कि अगर समय पर कानूनी सहायता नहीं मिली तो सजा लंबी हो सकती है. समस्या यह भी है कि आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार के लिए इतनी बड़ी राशि जुटा पाना भी आसान नहीं है. 

पत्नी शबाना और नौशाद के बुजुर्ग माता-पिता गहरे सदमे में है.

पत्नी शबाना और नौशाद के बुजुर्ग माता-पिता गहरे सदमे में है.

कर्ज लेकर भेजा था विदेश, अब घर चलाना भी मुश्किल

पत्नी शबाना खातून बताती हैं कि परिवार ने कई लोगों से उधार लिया था. करीब 1 लाख रुपये गांव के 2 लोगों से ब्याज पर लिए गए थे. इसके अलावा 55 हजार रुपये का लोन भी लिया गया था. उम्मीद थी कि विदेश में नौकरी मिलने के बाद नौशाद धीरे-धीरे सभी कर्ज चुका देगा, लेकिन अब कर्ज का बोझ ब्याज के चलते भारी हो गया है. रोजमर्रा का खर्च चलाना भी कठिन हो गया है. बच्चों की पढ़ाई, खाना और अन्य जरूरतों की चिंता लगातार बनी हुई है. तीनों बच्चों को तो यह भी नहीं पता कि उनके पापा कहां है. नौशाद के पिता मोहम्मद अलाउद्दीन और माता सेरा खातून भी परेशान है. दोनों बड़े बेटे दिल्ली में मजदूरी करते हैं. तीसरे बेटे के विदेश की जेल में बंद होने की सूचना के बाद मां-बाप गहरे सदमे में हैं.

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