भरत भूषण तिवारी के पुलिस एनकाउंटर पर ज्ञान बिंदु GS एकेडमी के डायरेक्टर रोशन आनंद की प्रतिक्रिया आई है. रोशन आनंद ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि पुलिस को तो रक्षक होना चाहिए, लेकिन आज वे शिकारी बन गए हैं. भरत तिवारी मर्डर केस इसका एक उदाहरण है. जब भरत तिवारी ने सरेंडर कर दिया था, तो उन्हें एनकाउंटर में क्यों मारा गया?
रोशन आनंद ने पुलिस के एक्शन पर सवाल उठाते हुए कहा कि, 'आप जनता के रक्षक हैं, शिकारी नहीं. अगर मुझे झूठे केस में गिरफ्तार न किया गया होता, तो मेरा भाई आज हमारे साथ होता. और भरत तिवारी के मामले में भी प्रशासन को यह बात समझनी चाहिए. इसकी सही जांच होनी चाहिए और लोग आपसे न्याय की उम्मीद करते हैं.'
कई अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज
दरअसल, बिहार के भोजपुर जिले में भरत भूषण तिवारी मुठभेड़ मामले में पुलिस के कई अधिकारियों के खिलाफ मंगलवार को प्राथमिकी दर्ज की गई. अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौती गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की पिछले सप्ताह बुधवार, 17 जून को पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी. भोजपुर पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, मृतक की मां द्वारा दी गयी शिकायत के आधार पर शाहपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई.
#WATCH | Saharsa, Bihar | On the alleged police encounter of 28-year-old Bharat Bhushan Tiwari in Bhojpur district, Gyan Bindu GS Academy Director Roshan Anand says, “The police are supposed to be protectors, but today they have become predators. One example is the Bharat Tiwari… pic.twitter.com/vxkLUdt4JR
— ANI (@ANI) June 24, 2026
न्यायिक जांच कराने का आदेश
बयान में बताया गया कि प्राथमिकी तत्कालीन जगदीशपुर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ), तत्कालीन शाहपुर थाना प्रभारी (एसएचओ) और घटना में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज की गई. तिवारी की मौत के बाद राज्य में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था और पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए थे. बिहार सरकार ने शनिवार को इस मामले की न्यायिक जांच कराने का आदेश दिया था.
पुलिस के शुरुआती बयान में 16 जून को तिवारी को कथित तौर पर 'मानसिक रूप से अस्वस्थ' बताया गया था. भरत के परिजनों और अन्य लोगों ने हालांकि उन्हें जनसरोकार से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में बताया, जो स्थानीय मुद्दों को प्रशासन के सामने उठाते रहे थे. सोशल मीडिया पर प्रसारित एक कथित वीडियो में मुठभेड़ से पहले तिवारी को अपना हथियार फेंकते हुए देखा जा सकता है.
पुलिस अधिकारियों ने मुठभेड़ के बाद बताया था कि भरत तिवारी लगातार पुलिस पर गोलीबारी कर रहे थे, जिसके जवाब में पुलिस ने 'आत्मरक्षा' में कार्रवाई की और उसके (भरत के) पैर में गोली लगी थी.
बिलौटी गांव में महापंचायत
भोजपुर के बिलौटी गांव में भरत तिवारी एनकाउंटर के विरोध में आज, 24 जून को महापंचायत बुलाई गई है. सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष के नेता एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए बिहार सरकार पर सवाल खड़े कर रहे हैं. भरत की मौत के बाद ग्रामीण आक्रोशित हो गए. स्थानीय लोगों का कहना था कि उस पर किसी प्रकार का पूर्व में आपराधिक मामला दर्ज नहीं था और वह आत्मसमर्पण कर चुका था. इसके बाद पुलिस ने गोली मारी. घटना के बाद से परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए और पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की.
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